posted on : सितम्बर 2, 2022 5:09 अपराह्न
कोटद्वार। कोटद्वार तहसील के अंतर्गत सुखरौ नदी में बने पुल का एक पिलर नदी के तेज बहाव के कारण धंस गया। वहीं पुल का पिलर नदी में हवा में तैर रहा है। वर्तमान में सुरक्षा की दृष्टि से स्थानीय प्रशासन ने पुल पर पूर्ण रूप से आवाजाही को बंद कर दिया है। वर्ष 2009 में प्रदेश में भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री भुवन चंद खण्डूडी ने पुल का निर्माण करवाया था। विगत 3 से 4 सालों से सुखरौ नदी में रिवर चैनेलाइज के नाम पर हो रहे खनन जो कि मानकों के विपरीत हो रहा था आज उसी के कारण पुल पर खतरा मंडरा रहा है। अगर पुल टूटता है तो लाखों की जनसंख्या वाले भाबर का संपर्क कोटद्वार से टूट जायेगा।

पूर्व में स्थानीय जनता ने रिवर चैनेलाइज के नाम पर हो रहे अवैध खनन का विरोध भी किया था। उस दौरान कुछ लोगो के खिलाफ स्थानीय प्रशासन ने मुकदमा भी दर्ज किया था। वर्ष 2020 में सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने नदी का सर्वे किया और सर्वे के दौरान उन्होंने उपजिलाधिकारी कोटद्वार को एक रिपोर्ट प्रेषित की थी, जिसमें उन्होंने रिवर चैनल के नाम पर हो रहे खनन को मानकों के विपरीत बताया था और कहा था कि आने वाले कुछ समय में पुल पर भी खतरा मंडरा सकता है। लेकिन कोटद्वार में बैठे तत्कालीन आलाधिकारी और जिले के अधिकारियों ने इस पर कोई संज्ञान नहीं लिया। जिस कारण आज यह स्थिति पैदा हुई कि सुखरौ नदी में बना पुल 3 से 4 इंच धस गया है तो वही पुल का पिलर हवा में तैर रहा है। नदी का पानी पुल के पिलर के नीचे से गुजर रहा है।

बताते चलें कि वर्ष 2017-18 से लगातार इस नदी में रिवर चैनेलाइज के नाम पर अवैध खनन किया जा रहा है। जो कि मानकों के विपरीत किया गया। रिवर चैनेलाइज के दौरान सिंचाई विभाग की टीम ने वर्ष 2020 में अपनी रिपोर्ट में बताया कि सुखरौ नदी में हो रहे रिवर चैनेलाइज के नाम पर खनन के कारण पुल को खतरा हो सकता है लेकिन कोटद्वार में तैनात तत्कालीन उप जिलाधिकारी और जिले के तत्कालीन जिलाधिकारी सिर्फ और सिर्फ खनन माफियाओं के रिश्तेदार बने रहे, और उन्हें भारी मात्रा में इस नदी में खनन करने की अनुमति देते रहे। उसी का नतीजा है कि आज इस नदी में बने पुल का पिलर हवा में लटक रहा है और पुल 3 से 4 इंच धस गया है। जब इस संबंध में लोनिवि के अधिशासी अभियंता डीपी सिंह से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि कई बार खनन रोकने को लेकर पत्राचार किया गया है लेकिन कोई नतीजा नहीं मिला। जेसीबी से नदी के पानी को डाइवर्ट किया गया है। वहीं, उपजिलाधिकारी कोटद्वार प्रमोद कुमार ने कहा कि मामले की जांच कराई जायेगी और जो भी दोषी पाया गया उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जायेगी।


