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WII ने दी IIT की जैव विविधता रिपोर्ट, परिसर में 237 वंश और 87 अलग-अलग पौधों के परिवारों से संबंधित कुल 304 प्रजातियों को किया गया दर्ज

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posted on : मार्च 11, 2022 11:27 अपराह्न
 
भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) ने आईआईटी रुड़की की जैव विविधता रिपोर्ट  दी जिसमें परिसर के भीतर 237 वंश और 87 अलग–अलग पौधों के परिवारों से संबंधित कुल 304 प्रजातियों को दर्ज किया गया

रुड़की :  भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई), देहरादून ने आज सीनेट हॉल में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की (आईआईटी रुड़की) परिसर के वनस्पतियों और जीवों की जैव विविधता रिपोर्ट जारी की। यह स्टडी आईआईटी रुड़की द्वारा प्रायोजित की गई थी और यह आईआईटी रुड़की कैंपस के जैव विविधता का इस तरह का पहला दस्तावेज है। वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई), को परिसर में मौजूद 175 साल पुरानी जैव विविधता से संबंधित सूची को पूरा करने का दायित्व दिया गया था, इस दौरान आईआईटी रुड़की परिसर में टाइफोनियम इनोपिनटम की एक महत्वपूर्ण खोज हुई, जो अरेसी Araceae (अरुम) परिवार से जुड़ा एक (घासनुमा) औषधीय पौधा है। यह उत्तराखंड राज्य का पहला रिकॉर्ड है।

पांच महीने  तक चले इस लंबे वानस्पतिक सर्वेक्षण में पेड़ों, झाड़ियों और जड़ी–बूटियों के साथ–साथ लकड़ी और जड़ी–बूटियों की लताओं से संबंधित पौधों की उपस्थिति का पता चला। परिसर के अंदर 237 वंश और 87 विविध पौधों के परिवारों से संबंधित कुल 304 प्रजातियां दर्ज की गईं। इनमें से अधिकांश का प्रतिनिधित्व फूल वाले पौधों या एंजियोस्पर्म -291 प्रजातियों द्वारा किया जाता है, जबकि जिम्नोस्पर्म यानी शंकुधारी पौधों का प्रतिनिधित्व 9 प्रजातियों द्वारा किया है। टेरिडोफाइट्स जिसमें फ़र्न और उनके परिजन शामिल हैं, केवल 4 प्रजातियों में गए। फूलों के प्रकारों में,140 प्रजातियों के साथ पेड़ सबसे प्रमुख थे, इसके बाद जड़ी–बूटियां – 91 प्रजातियां, झाड़ियाँ – 45 प्रजातियां और 28 प्रजातियां लताएं थीं। इसके अलावा, परिसर में फूलों की विविधता में एक्सोटिक्स का प्रभुत्व है और जिनमें से अधिकांश सजावटी प्रजातियां हैं।

इस रिपोर्ट में पौधों को छोटे से बड़े  के क्रम में दर्शाया गया है। परिसर में हर प्लांट ग्रुप के चुने हुई प्रजातियों  के बारे में संक्षिप्त विवरण दर्शाया गया है जिसके साथ उनकी चेक लिस्ट भी उपलब्ध करवाई गई है। इसके अतिरिक्त, पौधों के अलावा, परिसर में दर्ज विभिन्न प्रजातियों की तस्वीरों वाली प्लेट भी प्रदान की जाती है। इसलिए इस दस्तावेज़ का उपयोग शौकिया प्रकृति प्रेमियों और अन्य सभी द्वारा एक फील्ड गाइड के रूप में भी किया जा सकता है।

आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी ने अपने उद्बोधन में कहा,- “मानव प्रभाव जलवायु परिवर्तन को तेज़ कर रहा है, इस प्रकार वैश्विक स्तर पर गंभीर पर्यावरणीय चिंताएं बढ़ रही हैं। इस प्रकार, हमारे ग्रह के भविष्य को ध्यान में रखते हुए, जीवन के अधिक टिकाऊ तरीकों को अपनाने के लिए प्रकृति की ओर मुड़कर अवलोकन करने का समय आ गया है। यह सब किसी के तत्काल परिवेश से शुरू होता है और सौभाग्य से हमारे लिए हमारे आईआईटी रुड़की परिसर को बड़े हरे क्षेत्रों से नवाजा गया है जो हमारे परिसर को ‘शहरी हरे–भरे‘ क्षेत्र  की विशेषता प्रदान करता है। इसके साथ ही पर्यावरण की रक्षा के हमारे निरंतर प्रयासों को आगे बढ़ाते हुए, भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII), देहरादून के साथ एक सहयोगात्मक अध्ययन शुरू किया गया और इसके परिणामस्वरूप पुष्प और पशु संपदा की एक सूची भी तैयार हो चुकी है।  मुझे पूर्ण विश्वास है कि इस दस्तावेज़ की सहायता से हमारे विद्यार्थी, स्टाफ और परिसर के तथा अन्य  स्थानों के लोग प्रकृति से प्रेरणा ग्रहण करेंगे“।

डॉ. धनंजय मोहन, आईएफएस, निदेशक, भारतीय वन्यजीव संस्थान, ने अवगत करवाया, –  “365 एकड़ में फैले और तेजी से बढ़ते रुड़की शहर के बीच स्थित, आईआईटी रुड़की परिसर विभिन्न प्रकार के वनस्पतियों और जीवों का समर्थन करने के लिए  जाना है। मैं आईआईटी रुड़की के निदेशक महोदय का आभारी हूं कि उन्होंने आईआईटी कैंपस में स्थित विभिन्न वनस्पतियों और जीवों का दस्तावेजीकरण करने का अवसर प्रदान किया। इस दस्तावेज़ का प्रकाशन एक आकर्षक और रंगीन शैली में किया गया है जो कि परिसर में होने वाली विविध विविधताओं के अनुरूप है। मुझे आशा है कि यह प्रकाशन  सभी के द्वारा पसंद किया जाएगा और इसके माध्यम से कैंपस वासियों का रुझान प्रकृति के संरक्षण की  ओर बढ़ेगा”। इस महत्वपूर्ण समारोह में आईआईटी रुड़की के ग्रीन कमेटी के संयोजक  प्रोफेसर अरुण कुमार, ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज की तथा इस अध्ययन की पृष्टभूमि के बारे में जानकारी दी ; डॉ. आर. सुरेश कुमार, अनुसंधान टीम के नायक, वैज्ञानिक, भारतीय वन्यजीव संस्थान, जिन्होंने रात में विचरण करने वाले और बिल में रहने वाले पशुओं को पहचानने में प्रतिभागिता की तथा प्रोफेसर अवलोकिता अग्रवाल, आईआईटी रुड़की उपस्थित रहे।

 

 

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