हरिद्वार । गायत्री के उपासक तथा धर्म शास्त्रों के ज्ञाता महामंडलेश्वर स्वामी विज्ञानानंद सरस्वती जी महाराज ने कहा है कि मानव धर्म सबसे बड़ा है जिसमें सभी धर्मों का सार है जिस व्यक्ति में मानवता रूपी वृत्ति का समावेश हो जाता है उसके लिए विश्व का प्रत्येक प्राणी परमपिता परमेश्वर का अंश प्रतीत होने लगता है, वे आज गीता विज्ञान आश्रम में आयोजित गोवर्धन पूजा एवं भैयादूज महोत्सव के उपलक्ष में अन्नकूट कार्यक्रम में पधारे श्रद्धालुओं को धर्म की महत्ता समझा रहे थे।
भगवान श्रीराम एवं भगवान श्री कृष्ण के जीवन पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि सम्पूर्ण विश्व में अनेकों धर्म हैं लेकिन सनातन धर्म मानवता प्रधान है जिसे हमारे त्रेता एवं द्वापर के अवतारों में स्पष्ट रुप से देखा गया है। किसी वर्ग या समुदाय विशेष के उत्थान के लिए कार्य करने को धर्म की श्रेणी में नहीं लाया जा सकता बल्कि जिस व्यक्ति में मानवता के गुण पाए जाते हैं वही सबसे बड़ा धर्मात्मा होता है।
अन्नकूट गोवर्धन पूजा को मानवता की सेवा का पर्व बताते हुए उन्होंने कहा कि गोवेर्धन पूजा से परोपकार की प्रेरणा मिलती है और भगवान श्रीकृष्ण ने भी निराकार के स्थान पर साकार की पूजा का विधान बताया था इसीलिए सनातन धर्म को मानवतावादी धर्म बताया जाता है तथा समाज के लिए उपयोगी वृक्ष, पौधा, पशु, जल, अग्नि, सूर्य एवं चंद्रमा सहित माता-पिता और गुरु की सेवा को ही धर्म की संज्ञा दी गयी है।
दीपावली को सनातन धर्म का सबसे बड़ा पर्व बताते हुए उन्होंने कहा कि धर्म का अर्थ ही उमंग होता है और दीपावली का यह महापर्व लगातार 5 दिनों तक समाज को समरसता, समृद्धि एवं आत्मीयता का संदेश देता है ,जो समाज में मानवता का समावेश करने के लिए प्रति वर्ष मनाया जाता है। संपूर्ण समाज संस्कारित बने यही इन पर्वों का हेतु है, अंत में छप्पन भोग प्रसाद के माध्यम से सभी भक्तों का अंतःकरण पवित्र किया गया।




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