कोटद्वार । नगरनिगम क्षेत्र के बालासौड में गीताराम गौड़ की पुत्री की शादी में विदाई के अवसर पर वर-वधु सुनील एवं शिखा ने घर के आंगन में समळौंण आनंदोलन के तहत अमरूद का समळौंण पौधा रोपकर शादी को यादगार बनाने के साथ साथ पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन का संदेश दिया। पौधे की संरक्षण की जिम्मेदारी वधू की माता माया देवी ने ली ।
उन्होंने कहा की मैं इस पौधे का पालन पोषणअपनी पुत्री समझ कर करूंगी। कार्यक्रम का संचालन विकासखंड दुगड्डा की समळौंण आन्दोलन की संयोजिका गीता बिष्ट ने किया । उन्होंने कहा पर्यावरण बहुत दूषित हो चुका है। जिससे कई प्रकार की बीमारियां पैदा हो रही है। समय पर बारिश का ना होना ,जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग आदि जैसी समस्याएं हम महसूस कर रहे हैं । जो संपूर्ण विश्व के लिए एक समस्या बन चुकी है। इन सबसे बचने के लिए अधिकाधिक वृक्षारोपण करना होगा।
उन्होंने कहा समळौंण आन्दोलन एक सुंदर पहल है जिसमें समळौंण पौधारोपण हर संस्कारों की स्मृति दिलाती हैं। उन्होंने क्षेत्रवासियों से हर संस्कारों में समळौंण पौधारोपण करवाने की अपील की। उक्त अवसर पर बारात में आए समळौंण आन्दोलन से जुड़े दिनेश चंद्र खंकरियाल ने पौधारोपण कार्यक्रम में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया और कहा यह एक अदभुत आंदोलन है जिसे हम जनमानस स्वीकार कर रहा है और समळौंण एक जन आंदोलन बन चुका है। उक्त अवसर पर जगदीश प्रसाद खंकरियाल, अमरीश प्रसाद खंकरियाल, गिरीश चंद्र, आनंद मणि, गोकुल कृष्णा, रामेश्वर प्रसाद ढोन्डियाल, मनोज पंत, शेखर, विकास, कमलेश, कुलभूषण, भारत भूषण, पीयूष, आशीष, रजत, किरण देवी, पीतांबरी देवी, आशा देवी,रोशनी देवी, कृष्ण बल्लभ गोदियाल, आशीष गोदियाल, कैलाश चंद्र थपलियाल आदि बाराती एवं घर के अन्य सदस्य उपस्थित थे।




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