जोशीमठ / चमोली । चमोली जिले के जोशीमठ विकास खंड स्थित विश्व प्रसिद्ध हिमक्रीडा स्थली औली के लिए जोशीमठ से जाने वाला रोपवे का संचालन गुरूवार से शुरू हो गया है। कोरोना संक्रमण के चलते हुए लाॅक डाउन के बाद इसका संचालन भी बंद कर दिया गया था। अनलाॅक डाउन-5 के शुरू होने के बाद इसका फिर से संचालन शुरू हो गया है। जिससे बदरीनाथ धाम आने वाले यात्रियों के साथ ही पर्यटकों में भी इसको लेकर काफी उत्साह देखा जा रहा है।
एशिया की सबसे लम्बी और ऊंची जोशीमठ-औली रोपवे का संचालन फिर से शुरू हो गया है। अनलॉक डाउन-5 में चारधाम यात्रा को मिली छूट और बढ़ती यात्रियों तादाद को देखते हुए गढ़वाल मंडल विकास निगम और प्रदेश सरकार ने रोपवे संचालन शुरू करने का फैसला लिया है। 4.1 किलोमीटर लम्बी जोशीमठ औली रोप वे से पर्यटक औली आ जा सकते है। गढ़वाल हिमालय की सबसे ऊंची और भारत की दूसरी सबसे ऊंची हिमशिखर नंदादेवी सहित 14 अन्य हिम शिखरों का नजारा इस रोपवे से देखा जा सकता है। कोरोना संकट के चलते पिछले कई माह से बंद पड़ी थी जोशीमठ औली रोपवे की नीव वर्ष 1982 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने रखी थी। और वर्ष 1994 में यह बन कर तैयार हुई थी। देवदार के घने जंगलों के बीच से यह रोपवे दस टॉवरों से होकर गुज़रता है। इस रोपवे में आठ नंबर टॉवर से उतरने-चढऩेे की व्यवस्था है। प्रभारी ऑपरेशन रोपवे दिनेश डिमरी ने बताया की प्रशासन से अनुमति के बाद ही बुधवार से रोपवे संचालन शुरू किया गया है।




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