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धार्मिक शीर्ष संतों, विश्व स्तरीय नामचीन नेताओं से लेकर अनेक स्थापित हस्ताक्षरों ने शांतिकुंज के कार्यों का सराहा

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posted on : जून 29, 2025 4:35 अपराह्न
  • आध्यात्मिक उपचार का विश्वस्तरीय केन्द्र है शांतिकुंज
हरिद्वार (चंद्रप्रकाश बहुगुणा): उत्तराखण्ड के मुहाने पर बसा है विश्व प्रसिद्ध हरिद्वार शहर। इसी शहर से करीब छः किमी दूरी पर स्थित शांतिकुंज आज भारत ही नहीं,विश्वभर में एक आध्यात्मिक सेनेटोरियम के रूप में प्रतिष्ठित हो चुका है। गायत्री तीर्थ शांतिकुंज की स्थापना युगऋषि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य एवं वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा द्वारा वर्ष १९७१ में की गई थी। इसका उद्देश्य था- अध्यात्म आधारित नवसृजन और युग निर्माण।
शांतिकुंज आज एक जीवंत प्रयोगशाला बन चुका है जहाँ साधना, सेवा और संस्कार के त्रिवेणी संगम के माध्यम से करोड़ों लोगों का जीवन रूपांतरित हो रहा है। यहाँ आने वाले साधक आत्मिक बल प्राप्त करते हैं और  समाज में नैतिक जागरूकता के लिए भी प्रेरित होते हैं। शांतिकुंज में गायत्री साधना, यज्ञोपासना, संस्कार विधि, युवा निर्माण, महिला जागरण, वृक्षारोपण, नशा मुक्ति और समाज सुधार के लिए विशेष शिविरों का आयोजन होता है। देवसंस्कृति विश्वविद्यालय और ब्रह्मवर्चस शोध संस्थान इसके शैक्षणिक और अनुसंधान पक्ष को सशक्त करते हैं।
वर्तमान में शांतिकुंज का कार्य भारत से निकलकर विश्व के सौ से अधिक देशों तक पहुँच चुका है। अमेरिका, इंग्लैण्ड, ऑस्ट्रेलिया, लिथुआनिया, कनाडा, नेपाल, फिजी, दक्षिण अफ्रीका सहित अनेक देशों में इसके सेंटर स्थापित हैं, जहाँ नियमित रूप से साधना, संस्कार और सेवा से संबंधित गतिविधियाँ संचालित होती हैं। यहाँ आए अनेक साधकों का मानना है कि शांतिकुंज का वातावरण आत्मिक ऊर्जा से भरपूर है। यहाँ आकर जीवन के उद्देश्य को स्पष्टता मिलती है। यह स्थान केवल ध्यान या प्रवचन का केंद्र नहीं है, बल्कि यह जीवनशैली को बदलने वाली ऊर्जा का स्रोत है।
वर्ष २००३ में देसंविवि पहुंचे तात्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम देसंविवि व गायत्री परिवार के कार्यों की सराहना की और इनके विचारधाराओं को अपनाने के लिए प्रेरित किया है। सन् २०१२ में पूर्व राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखजी का देसंविवि,शांतिकुंज में आगमन हुआ। इस दौरान उन्होंने कहा कि पंडित आचार्यजी ने आध्यात्मिक पुनर्जागरण के द्वारा लोगों में उच्च सामाजिक तथा नैतिक मूल्यों का समावेश करने का प्रयास किया और जनता के मस्तिष्क में एक अमिट छाप छोड़ी। नवंबर २०२१ में तात्कालीन राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविन्द जी अपने परिवार सहित शांतिकुंज पहुँचे और यहाँ की दिव्य और नव्य वातावरण की भूरि-भूरि प्रशंसा की।
कुछ वर्ष पूर्व एक कार्यक्रम में शांतिकुंज पहुुंचे नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि यह स्थान ऐसा है जहाँ आने का मन करता है और जाने की इच्छा नहीं होती है। शांतिकुंज से मानवता के लिए उत्तम कार्य हो रहा है। गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि शांतिकुंज के हम बदलेंगे युग बदलेगा के सूत्र संकल्प के साथ अपनाये और राष्ट्र निर्माण में कार्य करें। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि यहाँ का वातावरण सामान्य नहीं है, बल्कि दिव्य है।
स्वामी कल्याणदेव जी महाराज सहित अनेक सिद्ध संतों, मनीषियों ने शांतिकुंज को विश्व के लिए प्रेरणास्रोत कहा है। अनेक देशों के राष्ट्राध्यक्षों, राजदूतों, देश के कई राज्यपालों, मुख्यमंत्रियों, स्थापित हस्ताक्षरों, फिल्मी कलाकारों, प्रख्यात शिक्षाविदों, राजनैतिक शीर्ष नेताओं ने भी अखिल विश्व गायत्री परिवार और देवसंस्कृति विश्वविद्यालय की रचनात्मक एवं सुधारात्मक कार्यों की प्रशंसा की है।
शांतिकुंज आज के तनावग्रस्त, मूल्यविहीन और दिशाहीन समय में एक रोशनी की किरण बनकर उभरा है। यह वह स्थान है जहाँ आध्यात्मिकता केवल साधना तक सीमित नहीं, बल्कि व्यवहार और कर्मयोग में उतरती है। हरिद्वार आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए यह स्थान अवश्य दर्शन योग्य है। यहाँ स्थापित १९२६ से सतत प्रज्वलित अखण्ड दीप, गायत्री मंदिर, सप्तऋषियों की मंदिर, देवात्मा हिमालय मंदिर आदि ऐसे दिव्य व भव्य मंदिर स्थान हैं, जहाँ जाने मात्र से मन को शांति सुकुन मिलती है।
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