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सिलावन में जयगुरुदेव सत्संग समारोह का आयोजन

12-01-2020 17:24:58 By: एडमिन

महरौनी / ललितपुर (राजीव सिंघई ) :  मण्डी हाट सिलावन में जयगुरुदेव सत्संग समारोह का आयोजन हुआ। जिसमें जयगुरुदेव धर्म प्रचारक संस्था मथुरा के अध्यक्ष पंकज जी महाराज ने प्रवचन करते हुये मानव शरीर की अनमोलता, गुरु की महिमा, आत्मा-परमात्मा के गूढ़ रहस्यों, शाकाहार-सदाचार, मद्यनिषेध, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण आदि विषयों पर प्रेरक संदेष सुनाया। वह यहां अपनी 40 दिवसीय बुन्देलखण्ड जनजागरण धर्म यात्रा के साथ कल यहाँ आये थे।

 

 

उन्होंने कहा कि मानव शरीर के समान कोई शरीर नहीं इसे पाने के लिये देवता भी कामना करते हैं। यह साधना का धाम है इसमें प्रभु के पास जाने का रास्ता है। कलियुग में सन्तों का अवतरण हुआ। उन्होंने प्रभु प्राप्ति की सरल साधना के लिये नाम योग (सुरत-शब्द योग) साधना का मार्ग जारी किया और बताया सारी आत्मायें शब्द (नाम) पर प्रभु के देष से उतार कर लाई गई अब उससे हमारी आत्मा (सुरत) का सम्बन्ध टूट गया। जब आत्मा अजर-अमर देष से आने वाले शब्द को पकड़ लेगी तो अपने सच्चे घर सतलोक पहुंच जायेगी। यही जीवन का असली लक्ष्य है। जो लोग प्रभु की साधना में लग जाते हैं, वही वास्तव में सुखी हैं। सहजो बाई ने कहा- ‘‘ धनवन्ते सबही दुःखी, निर्धन दुःख स्वरूप। साध सुखी सहजो कहै पायो भेद अनूप’’।। यह काल माया का देष है। ‘जग में पड़ा काल का घेरा। जीव फिरै चैरासी फेरा।। महात्मा जब साधना करके ऊपर के मण्डलों में जाते हैं तो खोटे-बुरे कर्म करने वाले जीवों को इसी शरीर से मिलती-जुलती लिंग शरीर में मिल रही भयानक यातनाओं का दृष्य देखते हैं तो जीवों को सचेत करते हैं। महात्माओं ने कहा मौत के वक्त काल जीवों को जब काल दाढ़ में दबाता है नैनो से पानी बहता है। नर्कों में तपकर लाल हो रहे लोहे के खम्भे में जीव चिपटाये जाते हैं। जीव हाय-हाय कर चिल्लाता है। उसकी पुकार कोई सुनने वाला नहीं। इसलिये मानव शरीर में रहकर अपने आत्म कल्याण की चिन्ता करें।


पंकज जी महाराज ने कहा हमारे गुरु महाराज बाबा जयगुरुदेव जी महाराज ने अच्छे समाज के निर्माण, आत्म कल्याण के लिये अथक परिश्रम किया और अपनी आध्यात्मिक शक्ति का सहारा देकर करोड़ों लोगों को भगवान के भजन में लगाया। उन्होंने संदेष दिया ऐ इन्सानों! तुम अपने दीन-ईमान पर आकर उस खुदा की सच्ची इबादत, भगवान की सच्ची पूजा करो। अपने गुनाहों की माफी मांगों और अपने जीवन को सफल बनाओ।  


बाबा जयगुरुदेव जी के उत्तराधिकारी ने कहा चरित्र जैसे धन को जमा करना चाहिये जो वास्तव में मानव की सबसे बड़ी पूंजी है। बिना चरित्र के मानव की कोई कीमत नहीं। भगवान की भक्ति, खुदा की इबादत के लिये शाकाहारी-सदाचारी व नशा मुक्त होना जरूरी है इसलिये सबसे पहले मानवतावादी बनें, मानव धर्म-कर्म का पालन करें। सत्य, दया, प्रेम आदि गुणों को अपनायें। एक-दूसरे के काम आयें। परमात्मा ने तो एक जाति इन्सान बनाया। जाति-पांति के झगड़े मन की खुराफात है। आज वक्त जाति, बिरादरी, धर्म-मजहब के नाम पर लड़ने-झगड़ने का नहीं है। अब तक हमने बहुत लड़ाईयां लड़ ली। इससे नफरत के सिवाय क्या मिला। इससे इन्सान की जिन्दगी पाने का असली मकसद छूट गया।


महाराज जी ने गृहस्थ आश्रम में रहने पर जोर दिया तथा थोड़ा सा समय मालिक की याद, भजन में लगाने की प्रेरणा दिया। प्रभु प्राप्ति की साधना का रास्ता भी बताया तथा उसकी क्रिया समझाया। अपने दो घण्टे से अधिक तक चले प्रवचन में उन्होंने आत्मा-परमात्मा के गूढ़ रहस्यों तथा परलौकिक रचना पर प्रेरक प्रकाश डाला। सिलावन के प्रधान प्रकाश नारायण त्रिपाठी व जनता द्वारा दिये गये सद्भाव व सहयोग के लिये आभार व्यक्त किया। आगामी 9 से 11 मार्च तक जयगुरुदेव आश्रम मथुरा में आयोजित होने वाले होली सत्संग समारोह में आने का निमंत्रण दिया।


इस अवसर पर प्रकाष नारायण त्रिपाठी प्रधान सिलावन, गब्बर सिंह परमार, कैलाष लोधी, आनंद स्वरूप दुबे, जगदीष यादव, रामदास यादव, नारायण अहिरवार, प्रान सिंह, पंकज श्रीवास्तव, शंकर लाल प्रधान चिरौल, राजा भैया, डा. नरेन्द्र सिंह, राकेष कुमार दुबे ‘नीटू’, महेन्द्र कुमार, रामचरन यादव आदि सहित हजारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। सत्संग के बाद जनजागरण यात्रा पलेरा (टीकमगढ़) के लिये प्रस्थान कर गई।