ग्रामीणों ने चकबंदी का किया विरोध, चकबंदी प्रक्रिया को निरस्त करने की मांग

Publish 11-01-2019 19:14:43


ग्रामीणों ने चकबंदी का किया विरोध, चकबंदी प्रक्रिया को निरस्त करने की मांग

उन्नाव /उत्तर प्रदेश( रघुनाथ प्रसाद शास्त्री):  बांगरमऊ तहसील क्षेत्र के ग्राम केशवापुर के मजरा गुलाब खेड़ा के किसानों ने गांव में चकबंदी प्रक्रिया को निरस्त करने के लिए बांगरमऊ चकबंदी कार्यालय पर प्रदर्शन किया। किसानों का आरोप है कि मामला उच्च न्यायालय में विचाराधीन होने के बावजूद भी प्रधान और कुछ चकबंदी अधिकारी जबरिया गांव वालों के हस्ताक्षर कराकर जबरिया रूप से चकबंदी प्रक्रिया करना चाहते हैं ।जिसको लेकर अधिकांश गांव के किसानों में रोष है और यह रोष किसी भी दिन आंदोलन और प्रदर्शन के रूप में सड़कों पर नजर आ सकता है ।


   तहसील क्षेत्र व विकास खंड बांगरमऊ के ग्राम गुलाब खेड़ा मजरा केशवापुर निवासी किसान नरेश, दिनेश, मुन्सी लाल, मनसा राम, देवी प्रसाद, गोबिंद, भगौती,पृथ्वी राज, कप्तान, सत्यराम, भैया लाल, ठाकुर, ओमप्रकाश ,पप्पू यादव, रामसहाय, रामविकास, बूटा, राजेश, कल्लू, रामबिलास, बिनोद, राजा, रामदास गजराज, श्यामलाल, मोहना, शांति, जयराम, रामभजन, मनोज, विजयपाल, सि्‍धनाथ, बासुदेव, मोहित, मुन्नीलाल, नंन्हा, शिव देवी, शिवकली, अजय, रामपाल, संकर, प्रकाश प्रजापति आदि नें शनिवार को बांगरमऊ स्थित चकबंदी कार्यालय पर प्रदर्शन किया और कहा कि उनके गांव में चकबंदी अधिकारी और प्रधान  जबरिया चकबंदी प्रक्रिया पूर्ण करना चाहते हैं। जबकि आधे से अधिक गांव के किसान चकबंदी प्रक्रिया नहीं चाहते हैं और इस मामले में उच्च न्यायालय में एक वाद भी विचाराधीन है।

किसानों ने इसके पूर्व प्रदेश के मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी को अलग-अलग भेजे गए प्रार्थना पत्रों के जरिए बताया है कि चकबंदी अधिकारियों और प्रधान द्वारा जबरिया फार्म संख्या 5 व 23 बांटे गए हैं और उनसे वसूली भी की गई है। ग्राम वासियों का कहना है पंचायत चुनाव से गांव में गुटबन्दी है और बिना किसानों को पूर्व सूचना दिए  या सहमति लिए जबरिया रूप से चकबंदी प्रक्रिया शुरू की जा रही है। जिसको न्याय हित में निरस्त करना आवश्यक है। किसानों का कहना था यदि चकबंदी प्रक्रिया निरस्त नहीं की जाती है तो गांव  के किसानों में व्याप्त रोष किसी भी दिन आंदोलन का रूप ले सकता है और सड़कों पर उतर कर प्रदर्शन करने को बाध्य होगा। मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी को भेजे गए इन्हीं पत्रों के बाद किसानों के यह पहला कदम प्रदर्शन के रूप में सामने आया है और यदि इस पर कोई कार्यवाही अमल में नहीं होती है तो यह प्रदर्शन कार्यक्रम और भी बृहद रूप ले सकता है।

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