यूपी की सियासी तस्वीर कुछ बदली बदली सी दिखेगी, चुनावी जंग के बाद चुनाव का असर भारी पड़ेगा बड़े अफसरों पर

Publish 12-05-2019 19:34:16


यूपी की सियासी तस्वीर कुछ बदली बदली सी दिखेगी, चुनावी जंग के बाद चुनाव का असर भारी पड़ेगा  बड़े अफसरों पर

लखनऊ/ उत्तर प्रदेश( लखनऊ प्रसाद शास्त्री): लोकसभा चुनाव में कई दलों, उनके नेताओं, गठबंधन की प्रतिष्ठा दांव पर है और चुनाव नतीजे किसी न किसी रूप में उनकी सियासत पर कहीं न कहीं असर जरूर डालेंगे। सत्ता पक्ष की बात करें तो चुनाव लड़ने वाले मंत्रियों में जो जीतेगा वह मंत्रिमंडल में स्थान खाली करेगा। विधायकों के चुनाव जीतने पर  विधानसभा में भी दोनों तरफ कुछ चेहरे संभव हो न दिखाई दें।  यही नहीं चुनाव बाद भारी पैमाने पर प्रशासनिक फेरबदल की तैयारी है। इसके तहत कई जिलों के पुलिस प्रमुख और जिलाधिकारियों के तबादले होना तय है। इसके अलावा शासन में कई विभागों के प्रमुख सचिव और अपर मुख्य सचिव की तैनाती में भी फेरबदल होना है।

सपा- बसपा की दोस्ती पर असर
अगर सपा-बसपा रालोद गठबंधन के लिए अनुकूल नतीजे आए तो की केंद्र सरकार के गठन में उनकी अहम भूमिका होगी। विपरीत नतीजे सपा-बसपा के आगे के रिश्तों को तय करेंगे।  सपा व बसपा करीब-करीब बराबर सीटों पर लड़ रही हैं। सीटों व वोट के लिहाज से परफार्मेंस क्या बराबर रहेगी या बसपा , सपा से ज्यादा सीटें जीतेगी। इसका जवाब भी आगे आएगा। सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव के परिवार के ही छह  सदस्य चुनाव लड़ रहे हैं। इनकी जीत भी अहम होगी। सपा मुखिया अखिलेश यादव का सियासती कौशल भी इसी से पता चलेगा।

तय होगी शिवपाल और ओमप्रकाश राजभर की सियासी हैसियत
चुनाव नतीजों से जाहिर होगा कि शिवपाल यादव की प्रसपा (लोहिया) ने किसको कितना नुकसान पहुंचाया और खुद की परफार्मेंस भी जाहिर होगी। इससे बड़ा सवाल यह भी है कि क्या उनकी पार्टी इतने वोट पा सकेगी जिससे उससे राज्य स्तरीय पार्टी का दर्जा मिल सके। यह भी देखना होगा कि प्रसपा व सपा के रिश्ते आगे किस तरह राह पर जाएंगे। प्रदेश सरकार में मंत्री ओमप्रकाश राजभर चुनाव में अपनी कितनी ताकत दिखा पाएंगे, उसी आधार पर उनके सरकार व पार्टी में रिश्ते तय होंगे। राजभर वोटों पर उनकी पकड़ से साफ होगा कि वह भाजप के लिए जरूरी है या नहीं ।

मंत्रिमंडल का होगा पुनर्गठन
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को वैसे तो पिछले साल ही मंत्रिमंडल विस्तार करना था लेकिन लोकसभा चुनाव के कारण यह टलता गया। चुनाव लड़ रहे मंत्रियों की जीत की सूरत में कुछ स्थान रिक्त होंगे। उनकी जगह तो  भरी जाएगी ही कुछ मंत्रियों पर गाज भी गिर सकती है। जिन सीटों पर सत्ताधारी भाजपा को अगर प्रतिकूल नतीजे मिले तो उस संसदीय क्षेत्रों  से आने वाले मंत्रियों को उनके विधानसभा क्षेत्रों में खराब परफार्मेंस के आधार पर  हटाया जा सकता है।

नौकरशाही में बदलाव
आचार संहिता हटने के बाद  कई जिलों में जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक बदले जाने की तैयारी है। चुनाव के कारण पिछले तीन महीनों से इनके तबादले पर सामान्यता: रोक लगी     थी। शासन में बड़े पदों पर बदलाव के आसार हैं। कृषि उत्पादन आयुक्त के लिए भी नए अधिकारी की तलाश जारी है।

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