उपेक्षा का शिकार होता शहीद स्मारक

Publish 11-06-2019 20:14:29


 उपेक्षा का शिकार होता शहीद स्मारक

 लखनऊ/ उत्तर प्रदेश( रघुनाथ प्रसाद शास्त्री) : यूपी के  रायबरेली में जिन आवाज़ो से कभी बिजली के कड़कने का होता था भरम, उन होठों पर भी मजबूर चुप्पियों का ताला लगा देखा है। जी हा, हम बात कर रहे है स्वतंत्रता आंदोलन के ऐतिहासिक स्थल सई नदी के तट पर स्थित शहीद स्मृति स्थल यानी शहीद स्मारक की। आज़ादी के मतवालो और देशभक्तो के लिये तीर्थस्थल और भारत माँ के अमर शहीदों के रक्त से सिंचित स्थल आज प्रशासनिक उपेक्षा का जीता जागता खंडहर गन्दगी का स्मारक बन गया है। जिस स्थल से आजादी के रणबांकुरों ने भारत माँ को गुलामी की बेडिय़ों से मुक्त कराने के लिये सर्वश्व न्योछावर किया, शिलापट्ट पर अंकित जनपद के शहीदों के नाम पढ़कर भावी पीढियां देशभक्ति की प्रेरणा लेती थी, वह आज अपनी दुर्दशा के  गीत गुनगुना रहा है।
 रायबरेली विकास प्राधिकरण के तत्कालीन सचिव दीनदयाल ने यहां रहते हुए शहीदों के स्मृति स्थल को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के लिये अथक प्रयास के साथ सौंदर्यीकरण कराया था, जनता भी उत्साहित हुई , यहां लोगो का शाम को तांता लगने लगा, बाहर से आने वाले लोग भी स्मारक को देखकर कृतार्थ समझते थे, वह धीरे धीरे सरकारी उपेक्षा का शिकार होकर जीर्ण-शीर्ण हो गया। शहीद स्मारक में भव्य भारत माँ मंदिर भी स्थापित किया गया। जनपद में धार्मिक, पौराणिक मान्यताओं के साथ स्वतंत्रता आंदोलन में मील के पत्थर साबित हुए अनेक स्थल है, लेकिन साई नदी के तट पर स्थित  किसान आंदोलन का प्रतीक यह शहीद स्थल अपने ह्रदय में स्वतंत्रता का अमर इतिहास सँजोये आज अपने भाग्य पर नही, बल्कि आजादी के बाद देश के रखवालो के बौद्धिक दिवालियेपन पर आंसू बहा रहा और कह रहा कि जो समाज अपने इतिहास को विस्मृत करता है, उसका भविष्य अंधकार के मार्ग पर भटकते हुए अपने स्वर्णिम इतिहास से अपरिचित हो जाता है। यही कुछ हाल है, हमारे शहीद स्थलों का, न जाने कब प्रशासनिक अमले को आजादी के तीर्थ स्थल के रखरखाव की चिंता होगी। वर्तमान के अंधकार को चीरकर शहीदों की शहादत से प्रेरण लेकर हम भविष्य के निर्माण पथ पर बढेंगे। शहीद स्थल की दुर्दशा इतनी व्यापक हो गयी है कि वहां हर तरफ  गन्दगी का अंबार है, बच्चों के खेलने के लिए बने झूले घोड़े अपना अस्तित्व समाप्त कर चुके है, इसलिये अब यहां कोई नही आना चाहता, यह हमारे लिये बड़ी चिंता का विषय है, आगे आने वाली पीढिय़ों को हम कौन सा इतिहास या अपनी गौरवगाथा बताएंगे जिसे सुनकर वह गौरवपूर्ण महसूस कर सके।
  एक बार ही होता गुलजार
शहीद स्मारक स्थल पर शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले वाले लाइनें लागू होती हैं। केवल सात जनवरी को शहीदों की याद में एक बार मेला लगता है। शहीदों के परिजनों के सम्मान की औपचारिकताएं निभाई जाती है। इसके बाद पूरे साल यह वीरानी छायी रहती है।

 सौंदर्यीकरण व साफ सफाई की जरूरत
मुंसीगंज स्थिति शाहिद स्मारक स्थल के सौंदर्यीकरण व साफ सफाई की ओर तत्काल ध्यान देकर शहीद स्मारक को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने की दिशा में कदम उठाए जिससे भविष्य में स्वतंत्रता आंदोलन की अनमोल धरोहर की रक्षा का मार्ग प्रसस्त हो सके। पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने के साथ वहां एक पुस्तकालय व संग्रहालय स्थापित किया जाए जिसमे स्वतंत्रता आंदोलन के महानायको के जीवन परिचय आदि के साथ इतिहास व अन्य प्रेरणादायक साहित्य को भविष्य की पीढिय़ों के लिये उपलब्ध कराया जा सके।

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