श्रद्धालुओं ने 9 कन्याओ को भोजन कराकर अपना व्रत पूरा किया

Publish 13-04-2019 19:05:04


श्रद्धालुओं ने 9 कन्याओ को भोजन कराकर अपना व्रत पूरा किया

लखनऊ /उत्तर प्रदेश( रघुनाथ प्रसाद शास्त्री):  आज नवरात्र के आठवें दिन पूरे क्षेत्र में सभी शक्तिपीठों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और श्रद्धालुओं ने पूजा पाठ किया साथ में श्रद्धालुओं ने कन्या भोज भी शक्तिपीठों में कराया साथ ही अपने घरों में भी श्रद्धालुओं ने 9 कन्याएं खिलाकर अपना व्रत पूरा किया बताते चलें क्षेत्र के पंडा खेड़ा गांव स्थित मनसा देवी मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और श्रद्धालुओं ने विधि पूर्वक माताजी का पूजन किया और कन्या भोजन करवाकर व्रत पूरा किया वहीं नगर पंचायत ऊगू में माता काली देवी मंदिर में भागवत कथा का समापन हुआ और श्रद्धालुओं ने कन्या भोजन कराकर अपना व्रत पूरा किया इसी तरह लोनारपुर भुनेश्वरी देवी मंदिर में विशेष पूजा अर्चना की गई और श्रद्धालुओं ने विधिपूर्वक कन्याओं को भोजन कराया इसी तरह क्षेत्र के झूलूमऊ में फूलमती माता के मंदिर में श्रद्धालुओं ने कन्या भोजन कराया और पूरा दिन भीड़ भाड़ मंदिर में बनी रही और क्षेत्र के कस्बा फतेहपुर चौरासी में स्थित शीतला देवी मंदिर प्रांगण में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी गई जहां दो शिवजी के बड़े शिवालय भी हैं इस देवी मंदिर प्रांगण में श्रद्धालुओं की पूरे वर्ष भारी भीड़ रहती है आज नवरात्र का आठवां दिन है इसलिए प्रत्येक दिन से ज्यादा यहां भीड़ रही सुबह से शाम तक बराबर यहां भीड़ रहती है श्रद्धालुओं का ताता लगा रहता है इस मंदिर पर कई जनपदों के लोग श्रद्धा पूर्वक आकर डाली बधाइयां करते हैं और बच्चों का मुंडन कराते हैं कथा भागवत इत्यादि कराते हैं नवरात्रों में अखंड पाठ भागवत कथा जागरण आदि भी हुआ करता है

कुछ श्रद्धालु बताते है मंदिर की मूर्ति के संदर्भ में
कुछ श्रद्धालु इस मंदिर की मूर्ति के संदर्भ में बताते है आज के करीब 200 वर्ष पहले यहां पर घना जंगल हुआ करता था फतेहपुर चौरासी दोस्तपुर शिवली के मध्य एक कच्चा रास्ता था घने जंगल के बीच उस रास्ते के बगल में खेतों में एक वृद्ध महिला शीतला नाम की घास खोदने नित्य प्रति आती थी एक  दिन वाह महिला काफी देर से घास खोदने पहुंची जिसे यह लगा आज मेरे पशु भूखे रह जाएंगे क्योंकि मैं ज्यादा देर में यहां पहुंची हूं पूजा पाठ के कार्य में लगी थी क्योंकि उस समय नवरात्र चल रहे थे तो नवरात्र के पूजा पाठ पूरे करने के पश्चात वह महिला घास खोदने पहुंची तो वहां जल्दी जल्दी से घास खोद रही थी अचानक उसकी खुरपी किसी पत्थर में टकराई जो उसे लगा किए कोई पत्थर नहीं बल्कि कहीं गड़ा हुआ धन तो नहीं है कोई गगरा तो नहीं  है महिला ने घास खोदना बंद कर दिया और उस पत्थर को खोजने लगी कुछ खोदने पर पता चला कि वह कोई मूर्ति है उसने श्रद्धा पूर्वक उस मूर्ति को उस मिट्टी से बाहर निकाला देखा किसी देवी की मूर्ति है उसने सोचा कि अब क्या किया जाए कहां रखा जाए वही जंगल में कुछ जगह खुले मैदान में उसे खाली दिखी खाली जगह में उसको रख दिया और घास खोदने लगी उस दिन उसको कम समय में ज्यादा घास मिल गई ।और वह महिला वापस घर गई दूसरे दिन उसके दिमाग में आया इस प्रतिमा की आराधना करने के उपरांत घास खोदना शुरू करें तो ज्यादा उत्तम होगा उसने ऐसा ही किया पहले उस मूर्ति की पूजा आराधना की उसके बाद उसने घास खोदना शुरू किया कम समय में उसके पशुओं को खाने भर के लिए खास मिल गई वापस घर चली गई इसी तरह क्रम से वह महिला अपना कार्य करती रही। उसने यह प्रण कर रखा था जब तक मैं जीवित रहूंगी मैं प्रतिदिन आपकी पूजा करूंगी उसकी श्रद्धा देख ग्रामीणों ने एक चबूतरा वहां बनवा दिया जहां उस मूर्ति को स्थापित करा दिया गया समय बीतता गया कुछ समय बाद क्षेत्र के श्रद्धालुओं ने चंदा इकट्ठा करके वहां एक मंदिर का निर्माण करवा दिया मंदिर का निर्माण जो कराया गया वह बहुत टिकाऊ नहीं था इसलिए वह मंदिर ज्यादा समय तक नहीं चल सका कुछ समय बाद वाह टूटने लगा तो आज के करीब 30 से 35 वर्ष पहले क्षेत्रवासियों ने उस मंदिर का नवीनीकरण कराने का प्रयास किया धीरे-धीरे कुछ समय में उस मंदिर का निर्माण नवीनीकरण  हो गया तो इस मंदिर का नाम शीतला देवी मंदिर पड़ गया


यहां श्रद्धालुओं ने एक कुए का भी निर्माण करवाया था जिससे पूजा पाठ किया जा सके और पानी भी पिया जा सके
उसके बाद नगर पंचायत के चुनाव प्रारंभ हुए सबसे पहले फतेहपुर चौरासी नगर पंचायत के नगर अध्यक्ष शंकर दयाल दीक्षित हुए उन्होंने इस मंदिर के बगल में एक बरामदा नुमा एक हाल बनवा दिया पूजा पाठ करने वाले व्यक्तियों को बैठने की व्यवस्था कर दी जिसको आज के समय में आसपास के कुछ लोगों ने अपने उपयोग में ले लिया है उसमें भूसा घास रखें हैं और अपनी दुकान चला रहे हैं जिससे श्रद्धालुओं को बैठने की जगह उपलब्ध नहीं है जो श्रद्धालु वहाँ बैठ जाता उसे डांट फटकार कर भगाया जाता है मंदिर में प्रतिदिन शाम को आरती करने वाले कुछ श्रद्धालु बताते हैं कि कई वर्षों से हम लोग नित्य प्रति यहां शाम को आरती करते हैं उसके संयोजक राजेंद्र सैनी बताते हैं अंग्रेजों ने इस मूर्ति को उखड़वाने का प्रयास किया था लेकिन वह सफल नहीं हो सके  क्योंकि वहां मधुमक्खी और ततैया जैसे बिषैले जीव उत्पन हो गए थे फिर भी उन्होंने मंदिर के बाहर बने चबूतरे पर शिवलिंग के बगल में नंदी महाराज का सर काट दिया था जिसे बाद में श्रद्धालुओं ने जोड़ा और मंदिर में बहुत सी मूर्तियों का स्थापना करवाई।


इस मदिंर के बगल में दो विशाल शिवालय हैं जिन्हें श्रद्धालु बताते हैं  दो सौ वर्षों से अधिक यह वाले बने हुए हैं इनका कुछ भी अता-पता किसी को सही नहीं मालूम नहीं है कुछ श्रद्धालुओं ने बताया इन मंदिरों को एक क्षेत्रीय राजा ने बनवाया था एक को राजा ने और दूसरे को मंत्री ने क्षेत्रीय राजा ने इस उद्देश्य से बनाया था कि उसके कोई संतान नहीं थी उसे स्वप्न में किसी साधु ने आदेश दिया था कि शिव मंदिर बनवाए और पुजारी बिठाये जिससे आपको  संतान की प्राप्ति होगी ऐसा करने पर वाह राजा स्वप्न की जानकारी अपने राज्य सभा में सभी को दी राज सभा के मंत्रियों ने कहा महाराज यह उचित है मंदिर बनवाना चाहिए। ऐसा सभा में सुनकर राजा ने दूसरे दिन से मंदिर का निर्माण शुरू करा दिया कुछ समय बाद मंदिर का निर्माण पूरा हो गया और वहां पर शिवलिंग की स्थापना करवा दी नित्य पूजा पाठ करने की व्यवस्था शुरू हो गई कुछ समय बाद मंत्री ने सोचा एक मंदिर मैं भी इनके बगल में बनवा दूं जिससे मेरा भी नाम उनके साथ अमर रहेगा तब से यहां दोनों मंदिरों की पूजा बराबर हुआ करती है 10 साल पहले यहां के कुछ विशिष्ट व्यक्तियों ने इस मंदिर की नवीनीकरण कराया चंदा इकट्ठा करके जिससे आज के समय में मंदिरों के पास श्रद्धालुओं को बैठने की व्यवस्था भी है इस मंदिर में जो शिवलिंग है उसे कोई भी मनुष्य पहले नहीं पूजा कर पाता है जब कभी सुबह कोई देखता है तो मंदिर मूर्ति  शिवलिंग पूजित मिलता है

श्रद्धालु बताते हैं जिस राजा ने इस मंदिर का निर्माण कराया था वह राजा प्रति दिन पूजा करने यहां आता रहता है ।इस मंदिर की खास विशेषता है कोई भी व्यक्ति अनैतिक कार्य करने के लिए रात भर या ज्यादा समय तक इस मंदिर के अंदर नहीं रुक सकता है उसे परेशान होना पड़ेगा मंदिर के ऊपर बना हुआ है वह सूर्य की तरह अपना रूप बदलता रहता है। इस शिवलिंग के रूप भी सुबह दोपहर शाम 3 समय तीन तरह के हुआ करते हैं और शीतला माता की पूजा करने वाले श्रद्धालुओं  की सभी कामनाएं पूर्ण  होती है इसलिए पूरे क्षेत्र के लोग यहां इकट्ठा होते रहते हैं यहां कोई ना कोई कार्यक्रम हुआ करते हैं और कुछ नागरिको ने बताया इन मूर्तियों की  जो अवहेलना करता है या यहां रहकर कुछ गलत कार्य करता है उसका सत्यानाश हो जाता है या उसके साथ कोई बहुत बड़ी दिक्कत पैदा होती है जिससे वह समझ नहीं पाता है आने वाले श्रद्धालु इस प्रकार हैं पवन कुमार पांडे, पंकज वर्मा, विपिन पांडे ,राकेश पांडे ,रमाकांत शुक्ल, रमेश कुमार, बबलू ,छुन्नी बाजपेई, कल्लू द्विवेदी, राधेश्याम बाजपेयी, बालकृष्ण पांडे ,रघुनाथ प्रसाद शास्त्री आदि कस्बे के ही नहीं क्षेत्र से भी बहुत सारे लोग नित्य प्रति आते हैं माता के दर्शन करने के लिए और वह बताते हैं हमें बहुत शांति मिलती है दर्शन करने से।

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