नई तकनीक से काट रहे है फसल, किसानो को हो रहा है तकनीक का लाभ

Publish 10-04-2019 20:48:54


नई तकनीक से काट रहे है फसल, किसानो को हो रहा है तकनीक का लाभ

लखनऊ/ उत्तर प्रदेश (रघुनाथ प्रसाद शास्त्री): इस समय किसानों की गेहूं की फसलें पक चुकी हैं और किसान बहुत तेजी से अपनी फसलों को काटने में लगे हुए हैं क्योंकि उन्हें भय सता रहा है कहीं बारिश ना हो जाए ओले ना गिर जाए जिससे कि उनकी तैयार की हुई फसल नष्ट हो जाए इसलिए सभी किसान बहुत तेजी से अपनी फसल को काटकर घर लाने की तैयारी में लगे हुए हैं और इस समय किसानों को रवी की फसल कटाई के लिए लेबर नहीं मिल पा रहे हैं जिससे बेहद परेशान हैं लेकिन इस समय क्षेत्र में कुछ रीपर मशीन  आ गई हैं जिनकी मदद से किसान अपनी गेहूं की फसल आसानी से काट पा रहे


इस स्थिति में ऐसी मशीन उपयुक्त होगी जो फसल को काटकर खेत में बंडल बनाकर डाल दें और उससे मड़ाई करके फसल के दाने को निकला जा सके। रीपर बाइंडर एक ऐसी मशीन है जो फसल को काटकर बंडल बनाकर खेत में छोड़ देती है। कटाई के बाद इन बंडल को उठाकर थ्रेशर से मड़ाई की जाती है। रीपर बाइंडर की सहायता से समतल खेत में जमीन से 5 सेमी ऊपर फसल की कटाई आसानी से की जा सकती है जिससे भूसे का नुकसान नहीं होता है। रीपर बाइंडर के कटरबार की चौड़ाई    1. 2 मीटर होती है और आगे बढऩे की गति 1. 1 से 2. 2 मीटर/सेकंड तक होती है। इसकी कार्य क्षमता 0. 4 हेक्टेयर/घंटा होती है तथा इसका 5. 6 किलोवाट का इंजन एक घंटे में करीब 1. 2 लीटर डीजल खपत करता है। इस मशीन के ऊपर एक सीट लगी होती है तथा उस सीट के नीचे एक नुमेटिक पहिया लगा होता है जिसकी सहायता से मशीन को मोड़ा जाता है। रीपर बाइंडर से प्रति बंडल फसल का वजन करीब 4 से 6 किलोग्राम तक होता है।


रबी की सबसे महत्वपूर्ण फसलों में गेहूं एक महत्वपूर्ण फसल है। गेहूं की फसल जब तैयार होती है उस समय मौसम बदल जाता है एवं तेज हवाएं एवं बारिश होने की सम्भावना भी बनी रहती है, ऐसे में किसान चिंतित होने लगता है कि खेत में खड़ी पकी हुई फसल को जल्द से जल्द काटकर घर लाया जाए। गेहूं को खेत में काटकर वहीं पर मड़ाई करने के लिए कम्बाइन हार्वेस्टर का उपयोग बढ़ता जा रहा है। थ्रेशिंग से निकले भूसे को खेत में छोड़ देती है, जिसकी मात्रा 4 से 5 टन/हेक्टेयर होती है। साथ ही कम्बाइन हार्वेस्टर जमीन से करीब 30 सेमी ऊपर से फसल की कटाई करता है तथा कटाई के बाद फसल का ठूंठ खेत में ही खड़ा रह जाता है। जिसका नुकसान किसान को उठाना पड़ता है। एक तो फसल से निकलने वाले अवशेष अर्थात् भूसे का नुकसान होता है जो जानवरों के खाने में प्रयोग होता है जो कीमती भी होता है और दूसरा किसान खेत को अगली फसल लगाने के लिए खेत को खलीकरने के लिए आग लगा देता है जिससे पर्यावरण सहित अन्य कई नुकसान होते हैं।


रीपर बाइंडर से फसल को काटने में काफी कम समय लगता है। कटाई के समय मजदूरों की कमी होने से प्रति एकड़ कटाई का व्यय कम से कम 3000 रूपए आता है। उन्नाव जनपद के  फतेहपुर चौरासी क्षेत्र में इस मशीन से कटाई करने वाले व्यक्ति 700 रुपये  प्रति घंटा के हिसाब से लेते हैं  वह भी यहां पर वह मशीन  अभी तक नहीं पहुंची है जिससे काटकर बंडल बनाया जा सके यहां पर सिर्फ उस मशीन का प्रयोग किया जा रहा है जिससे केवल कटाई की जा सकती इस मशीन के प्रयोग से कम से कम प्रति एकड़ 1750 रूपए की बचत होती है और कटाई का काम भी शीघ्र हो जाता है।

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