64वी राष्ट्रीय विद्यालय हॉकी प्रतियोगिता में अन्डर 19 बालक/बालिका वर्ग में उत्तराखण्ड राज्य की और से राइका कुम्भीचौड के दीपक रावत, का चयन

Publish 04-04-2019 19:01:46


64वी राष्ट्रीय विद्यालय हॉकी प्रतियोगिता में अन्डर 19 बालक/बालिका वर्ग में उत्तराखण्ड राज्य की और से राइका कुम्भीचौड के दीपक रावत, का चयन

कोटद्वार/गढ़वाल (हिमांशु बडोनी)| इसे इस देश का दुर्भाग्य नही तो और क्या कहेंगे जिस देश के वीर क्रांतिकारियों ने जंगे आजादी की लड़ाई के लिए अपना सब कुछ न्यौछावर कर दिया उसी आजाद देश के हुक्मरानों ने जंगे आजादी के इन परवानों को क्रांतिकारी से अतिक्रमणकारी घोषित कर दिया.मामला पेशावर कांड के महानायक वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली के परिजनों से जुडा है जिनको उत्तरप्रदेश वन विभाग ने अतिक्रमणकारी घोषित कर पूरे देश का सिर शर्म से झुका दिया है.
वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली एक ऐसा नाम जिसने जंगे आजादी की लड़ाई के दौरान 30 अप्रैल 1930 के पेशावर में ब्रिाटिश हुकुमत के खिलाफ खुला सैनिक विद्रोह कर अग्रेजों की चुलें हिला दी थी.लेकिन अफसोस उसी वीर चन्द्र सिह गढ़वाली की वीरता को आजादी के बाद हुकमरानों ने ऐसा सम्मान दिया कि उनके परिजनों को अतिक्रमणकारी ही घोषित कर दिया गया.दरअसल जंगे आजादी की लड़ाई के दौरान वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली की पुस्तैनी जमीनों को अंग्रेजों ने कुर्की कर दी थी.लेकिन देश की आजादी में अहम् योगदान को देखते हुए अभिभाजित उत्तरप्रदेश सरकार ने वीर गढ़वाली को कोटद्वार के निकट हल्दूखाता में कृषि से आजीविका चलाने के लिए 1975 में 10 एकड़ वनभूमि 90 सालों के लिए लीज पर दी थी. लेकिन 1 अक्टूबर 1979 को वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली के देहांत के बाद यह लीज का बिषय उलझ कर रह गया.हालांकि इस दौरान वीर गढ़वाली के परिजनों ने शासन से लेकर प्रशासन तक के हजारों चक्कर काटें लेकिन उनकी एक नही सुनी गई.


क्या कहते है वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली के पौत्र देशबंधु गढ़वाली    
पेशावरकांड के महानायक वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली के परिजनों के साथ किया गया यह भद्दा मजाक और किसी ने नही बल्कि यूपी के वन विभाग ने किया है.जिसने जंगे आजादी के महानायक के परिजनों को अतिक्रमणकारियों की श्रेणी में खड़ा करते हुए उनसे वह भूमि खाली करने का फरमान जारी किया है जिसे ब्रिाटिश हुकुमत के खिलाफ जंगे आजादी की लड़ाई में उनकी वीरता को देखते हुए आजादी के बाद उत्तरप्रदेश सरकार ने लीज पर दी थी..
क्या कहते है वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली की पुत्र वधु विमला गढ़वाली    
वीर गढ़वाली के परिजनों को लज्जित करने वालें इस फरमान के बाद उन्होंने अब खुद को प्रधानमंत्री से पाकिस्तान भेजें जाने की मांग की है.वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली को क्रांतिकारी से अतिक्रमणकारी की श्रेणी से रखने से आह्त उनके परिजनों का कहना है कि जब पूरे हिन्दुस्तान में उनके लिए कहीं पर जगह नही है तो कम से कम पेशावर कांड के नायक के परिजनों को वहां तो सिर ढकने की जगह मिलेगी.| पेशावर कांड के महानायक के परिजनों का यह दुख किसी और की वजह से नही बल्कि उस तंत्र की वजह से ही जिसकों कायम करने के लिए वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली को कालापानी जैसी सजा भुगतने के लिए मजबूर होना पड़ा था.