एटीएम लौटाकर दिया ईमानदारी का परिचय

Publish 11-01-2019 18:14:49


एटीएम लौटाकर दिया ईमानदारी का परिचय

 डॉ. विनोद जोशी जी ने निर्मल मन को बताया प्रभु मिलन का सुगम पथ

आध्यात्म के रंग में रगां चिटगल

चिटगल/गंगोलीहाट,  पिथौरागढ़ (रमाकान्त पन्त)। सैम देवता व मातेश्वरी गुसाणी की पावन भूमि चिटगल के उखराणी आंगन में आयाेजित श्रीमद्भागवत कथा में आज छठे दिन चिटगल के अलावा  पाली,पोखरी,अग्रौन,बिरगोली,गंगोलीहाट,उबराड़ा,जजुट,पीपलेत,सुनारगांव,फुरसिल आदि तमाम क्षेत्रों से भक्तों का अपार जनसमूहं कथा श्रवण को उमड़ा।जिससे क्षेत्रं का आध्यात्मिक वातावरण निखर उठा।भक्तजनो ने संगीतमय सुमधुर कथा का श्रवण कर पुण्य अर्जित किया आज की पावन कथा का वाचन करते हुए प्रसिद्व कथावाचक डा० श्री विनोद जोशी ने भगवान के विभिन्न अवतारों का सुन्दर वर्णन करते हुए योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की सुन्दर कथा,बाल लीलाओं का वर्णन,पूतना बध,बकासुर बध भगवान शिव द्वारा कृष्ण दर्शन की अभिलाषा,कालिय नाग मर्दन सहित अनेक कथाओं का सुधामय वाणी से बखान किया।जिससे श्रद्वालुजन भक्ति की धारा  में आनन्द से झूम उठे इस अवसर पर उन्होने कहा श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन करानें वाले व्यक्ति को पानी से भी पतला,और श्रोता को उससे भी पतला अर्थात् अंहकार रहित होना चाहिए*। भागवत कथा मे भगवान ने कहा कि जब मनुष्य में अहम हो जाएं तो वह मुझे नहीं पा सकता है।उसे मेरा दर्शन नहीं हो सकता। आज छठे दिन की  कथा में  पूरा पंडाल खचाखच श्रद्धालूओं से भरा रहा। श्री जोशी ने विनम्र भाव से कहा कि लोभ मोह त्याग कर ईश्वर पर ध्यान लगाओ वहीं सब कुछ है। धन का लालच लोगों को अंधा बना देती है इससे सबसे उपर उठकर ईश्वर की कृपा पात्र बनों।

        श्रीमद्भागवत करने से पित्रों का उद्धार हो जाता है। भागवत पुराण करवाने वाला अपना उद्धार तो करता ही है अपितु अपने सात पीढि़यों का उद्धार कर देता है। पापी से पापी व्यक्ति भी यदि सच्चे मन से श्रीमद्भागवत की कथा सुन ले तो उसके भी समस्त पाप दूर हो जाते है उन्होंने कहा मानव जीवन सबसे उत्तम और अत्यन्त दुर्लभ है। श्रीभगवान की विशेष कृपा से हम मानव-योनि में आये हैं भगवान के भजन करने के लिये ही हमें यह जीवन मिला है और श्रीमद्भागवत कथा सुनने से या करने से हम अपना मानव जीवन में जन्म लेना सार्थक बना सकते हैं। श्रीमद्भागवत कथा सुनने के फलों का वर्णन अवर्णनीय है। इस अवसर पर पण्डित नवीन चन्द्र पंत,प० गंगा प्रसाद पंत,प० गंगा प्रसाद जोशी,प० त्रिलोक चन्द्र,प० भास्कर जोशी,प० केवलानन्द, प० देवेन्द्र बिष्ट ने सनातन परम्परा से जुड़ी वैदिक पूजन कर वातावरण को मन्त्रोंच्चार की ध्वनि से आध्यात्म के रगं में रंग डाला।