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    चारधाम यात्रा को सुखद पूर्व संपन्न कराने के लिए मांगा तिमुंडिया वीर से आशीर्वाद

    04-05-2019 20:33:36

    गोपेश्वर (जगदीश पोखरियाल)।  चारधाम यात्रा को सकुशल संपन्न करवाने के लिए हर वर्ष की भांति होने वाला तिमुंडिया मेला इस वर्ष भी नृसिंह मंदिर जोशीमठ शनिवार को आयोजित हुआ। मेला प्रत्येक वर्ष बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने पहले सप्ताह के शनिवार अथवा मंगलवार को आयोजित होता है। मेले में तिमुंडया वीर से यात्रा की सुख, शांति पूर्ण संपन्न होने का आशीर्वाद मांगा। शनिवार को नृसिंह मंदिर में देव पूजाई समिति के कार्यालय से देव पूजाई समिति के पदाधिकारियों और पस्वाओं (अवतारी पुरूष) को ढोल दमाऊं के साथ नृसिंह मंदिर परिसर लाया गया। मां नवदुर्गा के मंदिर से मां नवदुर्गा का आवाम लाठ लाया गया है। जिस पर मां नवदुर्गा की शक्ति रहती है, उसको भी नृसिंह मंदिर में लाया गया है। उसके बाद तिमुंडिया वीर रौद्र रूप धारण कर एक बकरी, 40 किलो कच्चा चावल, 10 किलो गुड़, दो घड़े पानी सबके सामने पीये, और सभी को अपना आशीर्वाद दिया।

    ये है मान्यताः
    माना जाता है तिमुंडिया तीन सिर वाला वीर था। एक सिर से दिशा का अवलोकन, एक सिर से मांस खाना और एक सिर से वेदों का अध्ययन करता था। ह्यूना गांव के जगलों में इस राक्षस ने बड़ा आतंक मचा रखा था। हर दिन मनुष्य को खाता था। एक दिन मां दुर्गा देवयात्रा पर थीं। गांव वाले मां के स्वागत के लिए नहीं आए। पूछने पर पता चला की लोग तिमुंडिया राक्षस के डर से घर से बाहर नहीं निकल रहें हैं। मां दुर्गा के कहने पर उस दिन कोई नहीं जाता है। क्रोधित तिमुंडिया गर्जना करते हुए गांव में पहुंचता है। मां नवदुर्गा और तिमुंडिया के बीच युद्ध होता है। मां नवदुर्गा उसके तीन में से दो सिर काट देती है। ज्यों ही नवदुर्गा तीसरा सिर काटने लगती हैं तो तिमुंडिया राक्षस मां के शरणागत हो जाता है। मां उसकी वीरता से प्रसन्न होकर उसे अपना वीर बना देती है।