कहीं 2013 की पुनर्रावृत्ति न हो हैं पर्यावरण विद चिंतित

Publish 04-05-2019 17:28:14


कहीं 2013 की पुनर्रावृत्ति न हो हैं पर्यावरण विद चिंतित

गोपेश्वर (जगदीश पोखरियाल)। ऑल वेदर रोड निर्माण में हो रहे अंधाधूंध पेड़ों के कटान से पर्यावरण विदों के माथे पर चिंता की लंकीरें साफ झलकने लगी हैं और उनकी यह चिंता सार्वजनिक मंचों पर भी देखी जा रही है। शनिवार को पर्यावरण कार्यकर्ता आलम सिंह बिष्ट की स्मृति में आयोजित कार्यक्रम में प्रसिद्ध पर्यावरण विद चंडी प्रसाद भट्ट ने कहा कि आल वेदर रोड़ के नाम पर जो अंधा धूंध पेड़ काटे जा रहे है यह स्थिति सही नहीं है कहीं अनियंत्रित पेड़ों का कटान 2013 जैसी आपदा का कारण बन सकती है। कहा कि मानव विकास भी जरुरी है, लेकिन पर्यावरण का संरक्षण भी जरुरी है।
चंडीप्रसाद भट्ट पर्यावरण एवं विकास केंद्र की ओर से शनिवार को संस्कृत महाविधालय मण्डल में आलम सिंह बिष्ट स्मृति व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन पर्यावरणविद् चंडी प्रसाद भट्ट व बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी बीडी सिंह ने संयुक्त रुप से किया। कार्यक्रम में चंडी प्रसाद भट्ट ने चिपको आंदोलन में सहयोगी रहे आलम सिंह बिष्ट व चक्रधर तिवारी को श्रद्धांजली दी। कहा कि आलम सिंह बिष्ट की चिपको आंदोलन में सक्रियता के चलते ही आज भी मंडल घाटी में वन संरक्षित हैं। साथ उन्होंने पहाडों में किये जा रहे विकास कार्यों में पर्यावरण समन्वय की जरुरत पर जोर दिया। कहा कि ऑल वेदर रोड को जहां समय की मांग बताया। वहीं योजना में बेतरतीब तरीके से काटे गये पेडों से हो रहे पर्यावरणीय नुकसान से आपदाओं को न्यौता देने की बात कही। कहा कि वनों के संरक्षण को लेकर वन विभाग और सरकारों स्थानीय लोगों की भूमिका निर्धारित करते हुए योजनाएं बनाने की बात कही। कहा कि वनों के संरक्षण के लिये लोगों के सीधे जुडाव का जीता जागता उदाहरण चिपको आंदोलन है। कार्यक्रम में आलम सिंह बिष्ट की पुत्रवधू उमा देवी को शाल देकर सम्मानित किया गया। इस मौके पर प्रधानाचार्य जगदीश सेमवाल, केंद्र के न्यासी ओम प्रकाश भगत सिंह बिष्ट, वीरेंद्र सिंह बिष्ट, महावीर सिंह बिष्ट, धर्मेन्द्र तिवाडी आदि मौजूद थे।

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