ग्रामीण इलाकों में भी अब टैंकर बने पानी का सहारा

Publish 11-06-2019 19:46:43


ग्रामीण इलाकों में भी अब टैंकर बने पानी का सहारा

थराली/गोपेश्वर/ चमोली (रमेश थपलियाल/जगदीश पोखरियाल)।  जल ही जीवन है, अकसर ये टैग लाइन अकसर जल निगम व जल संस्थान के कार्यालयों पर लिखी दिखायी देती है। परंतु जैसे ही गर्मी का सीजन शुरू होता है। जल संस्थान पानी पिलाने में असमर्थ हो जाता है। शहर तो शहर अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी उपभोक्ता टैंकर के सहारे नजर आ रहे है।
 चमोली जिले के नारायणबगड़ ब्लाॅक के हरमनी (बामण गांव) आजकल पीने के पानी की समस्याओं से जूझ रहा है।  15 से 20 परिवार वाले इस बामण गांव में पिछले दो सप्ताह से पानी की किल्लत बनी हुई है। ग्रामीण  दो से चार किमी दूरी से पीठ पर व कुछ लोग किराये के वाहनों से पानी ढोह कर पीने को मजबूर है। गांव के मोहन भारद्वाज, सुनील भारद्वाज, जगमोहन आदि का कहना है कि एक माह स ेजल संस्थान के कर्मचारियों से पानी की लाइन को ठीक करने की मांग करते आ रहे है लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। ऐसे में ग्रामीणों स्वयं के लिए व अपने मवेशियों को पानी की किल्लत बनी हुई है। कहा कि अब जल संस्थान ने मंगलवार को एक टैंकर पानी का भेजा है। कहा कि नियमित पानी के लिए पाइप लाइन को ठीक किया जाना आवश्यक है। इधर सहायक अभियंता जलसंस्थानयशपाल सिंह बिष्ट ने बताया कि गांव को पानी सप्लाई करने वाला स्त्रोत सूख गया है। ग्रामीणों की शिकायत पर मंगलवार को पेयजल आपूर्ति के लिए टैंकर भेजा गया है। साथ ही उन्होंने कहा कि जल संस्थान की टीम स्रोत के निरीक्षण के लिए भेजी गई है। जब तक कोई स्थायी समाधान नही निकल जाता तब तक ग्रामीणों की आवश्यकता अनुसार टैंकर से ही पेयजलापूर्ति की जाएगी

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