ईवीएम और बैलेट यूनिट मशीनों में एड्रेस टैगिंग और कंडीडेट सेटिंग शुरू

Publish 02-04-2019 20:04:10


ईवीएम और बैलेट यूनिट मशीनों में एड्रेस टैगिंग और कंडीडेट सेटिंग शुरू

फतेहपुर चौरासी उन्नाव (रघुनाथ)| सोमवार  17 सितंबर को विश्वकर्मा जयन्ती क्षेत्र में धूमधाम से मनाई जा रही है। क्षेत्र के गांव दोस्तपुर शिवली में प्रति वर्ष की तरह ग्राम पंचायत के लोग मिलकर विश्वकर्मा जयन्ती के अवसर पर विश्वकर्मा पूजा  व नौटंकी का कार्यक्रम करते आ रहे  है। इसी क्षेत्र में जगह- जगह विश्वकर्मा पूजा कार्यक्रम हो रहे हैं। भारत त्‍योहारों का देश है। जीवन एक उत्‍सव है और इसी धारणा के साथ यहां साल भर अनेक त्‍योहार मनाए जाते हैं ।  इन्‍हीं में से एक त्‍योहार है विश्‍वकर्मा पूजा यह पर्व हर साल 17 सितंबर को मनाया जाता है।मान्‍यता है । ज्योतिष के जानकार रघुनाथ प्रसाद शास्त्री ने बताया कि इसी दिन  विश्व निर्माण के देवता विश्‍वकर्मा का जन्‍म हुआ था विश्‍वकर्मा को देवशिल्‍पी यानी कि देवताओं के वास्‍तुकार के रूप में पूजा जाता है। मान्‍यता है कि उन्‍होंने देवताओं के लिए महलों, हथियारों और भवनों का निर्माण किया था विश्‍वकर्मा पूजा के मौके पर ज्‍यादातर दफ्तरों में छुट्टी होती है और कई तरह के कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इस दौरान औजारों, मशीनों और दुकानों की पूजा करने का विधान है।
विश्‍वकर्मा पूजा का महत्‍व
भगवान विश्‍वकर्मा के जन्‍मदिन को विश्‍वकर्मा पूजा, विश्‍वकर्मा दिवस या विश्‍वकर्मा जयंती के नाम से जाना जाता है । इस पर्व का हिन्‍दू धर्म में विशेष महत्‍व है। मान्‍यता है कि इस दिन भगवान विश्‍वकर्मा ने सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा के सातवें धर्मपुत्र के रूप में जन्‍म लिया था।भगवान विश्‍वकर्मा को 'देवताओं का शिल्‍पकार', 'वास्‍तुशास्‍त्र का देवता', 'प्रथम इंजीनियर', 'देवताओं का इंजीनियर' और 'मशीन का देवता' कहा जाता है। विष्‍णु पुराण में विश्‍वकर्मा को 'देव बढ़ई' कहा गया है। यही वजह है कि हिन्‍दू समाज में विश्‍वकर्मा पूजा का विशेष महत्‍व है। हो भी क्‍यों न? अगर मनुष्‍य को शिल्‍प ज्ञान न हो तो वह निर्माण कार्य नहीं कर पाएगा। निर्माण नहीं होगा तो भवन और इमारतें नहीं बनेंगी, जिससे मानव सभ्‍यता का विकास रुक जाएगा। मशीनें और औज़ार न हो तो दुनिया तरक्‍की नहीं कर पाएगी कहने का मतलब है कि सामाजिक, आर्थिक और सांस्‍कृतिक विकास के लिए श‍िल्‍प ज्ञान का होना बेहद जरूरी है।अगर शिल्‍प ज्ञान जरूरी है तो शिल्‍प के देवता विश्‍वकर्मा की पूजा का महत्‍व भी बढ़ जाता है। श्री शास्त्री ने बताया विश्‍वकर्मा की पूजा करने से व्‍यापार में दिन-दूनी रात चौगुनी वृद्धि होती है।

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