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भागवत कथा में ही जीवन का सार मौजूदः आचार्य भुवन चंद्र उप्रेती

04-06-2019 19:41:06

थराली/गोपेश्वर (रमेश थपलियाल/जगदीश पोखरियाल)।  चमोली जिले के थराली ब्लाॅक के सुनाऊ मल्ला गांव में मंगलवार के आयोजित श्रीमद् भागवत ज्ञान सप्ताह के प्रथम दिवस कथा व्यास आचार्य पंडित आचार्य भुवन चंद्र उप्रेती ने कहा कि भागवत कथा में ही सारे जीवन का रहस्य छुपा हुआ है। कहा कि भागवत कथा के प्रथम श्लोक का प्रथम शब्द है सच्चिदानंदरूपाय से भागवत आरंभ हो रहा है जिसमें सत, चित और आनंद की बात की गई है। भगवान के तीन रूप हैं सच्चिदानंद रूपाय सत, चित और आनंद। और भगवान तक पहुंचने के भी तीन मार्ग है सत, चित और आनंद। इन तीन रास्तों से आप भगवान तक पहुंच सकते हैं।
कथा व्यास ने कथा पढ़ते हुए कहा कि भगवान का पहला स्वरूप है सत्य। जिस दिन आपके जीवन में सत्य घटने लगे आप समझ लीजिए आपकी परमात्मा से निकटता हो गई। सत भगवान का पहला स्वरूप है फिर कहते हैं चित स्वयं के भीतर के प्रकाश को आत्मप्रबोध को प्राप्त करिए। फिर है आनंद। सत और चित तो सब में होता है। वैसे आनंद हमारा मूल स्वभाव है पर हमको आनंद निकालना पड़ता है। कहा कि आनंद  मनुष्य का मूल स्वभाव होने पर भी इसके लिए प्रयास करना पड़ता है।
भागवत कथा कहती है मेरे लिए कुछ छोडने की जरूरत नहीं है। संसार छोडऩे की जरूरत नहीं है। कई लोग घरबार छोड़कर, दुनियादारी छोड़कर पहाड़ पर चले गए, तीर्थ पर चले गए, एकांत में चले गए तो भागवत कथा कहती है उससे कुछ होना नहीं है। मामला प्रवृत्ति का है। प्रवृत्ति अगर भीतर बैठी हुई है तो भीतर रहे या जंगल में रहें बराबर परिणाम मिलना है। कथा से पूर्व कथा व्यास के आगमन पर गांव की महिलाओं ने कलश यात्रा, शोभा यात्रा निकाल आचार्य व्यास का स्वागत किया और कलश यात्रा के साथ कथा व्यास को कथा स्थल तक पहुंचाया। आचार्य ने विधि विधान के साथ वैदिक मंत्रों के साथ वैदिक स्थल, व्यास गद्दी आदि का पूजन किया और कथा आरंभ की।