मनुष्य को अभिमान त्याग कर सदगुरू की शरण लेनी चाहिएः कथावाचक

Publish 14-03-2019 16:03:59


 मनुष्य को अभिमान त्याग कर सदगुरू की शरण लेनी चाहिएः कथावाचक

गोपेश्वर/चमोली (जगदीश पोखरियाल)। चमोली जिले के नारायणबगड़ ब्लाॅक के मानूर गांव में चल रही श्री राम कथा के पांचवें दिन गुरूवार को कथावाचक श्रीकृष्ण चमोला ने कहा कि भगवान को यदि देखता है तो सदगुरु की दृष्टि से देखना चाहिए। मनुष्य को अभिमान का त्याग कर सदगुरु की शरण में आना चाहिए। जिससे जीवन में सदमार्ग की प्राप्ति हो सके। संत हनुमान जब पहली बार जंगल में भगवान श्रीराम से मिले तो भगवान ने अपनी माया को छिपा दिया, लेकिन हनुमान ने अंतरआत्मा से भगवान को पहचान दिया और उनके चरण पकड़ लिए। सार यह है कि भगवान को पहचानने के लिए अंतरआत्मा की आंखों में तेज और मधुर भाव होना चाहिए। नारायणबगड के मानूर गांव में  कथा का आयोजन श्री श्री 108 आनंद गिरी जी महाराज की ओर से किया जा रहा है। इस मौके पर आयोजन समिति के अध्यक्ष श्याम सिंह नेगी, कमला देवी, विक्रम सिंह नेगी आदि मौजूद थे।

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