बाल श्रम व भिक्षावृत्ति को रोकने के लिए उठाने होंगे प्रभावी कदमः मयूर दीक्षित

Publish 06-12-2018 18:30:27


 बाल श्रम व भिक्षावृत्ति को रोकने के लिए उठाने होंगे प्रभावी कदमः मयूर दीक्षित


कोटद्वार। नगर क्षेत्र के अन्तर्गत गोविन्दनगर स्थित गुरूद्वार में बैसाखी का पर्व बडे धूमधाम से मनाया गया खालासा पंथ सिरजना दिवस बडे धूमधाम से मनाया गया गुरूद्वारे में भजन किर्तन कर आयोजन किया गया व विषाल लंगर का आयोजन किया गया। बताते चले कि गुरूद्वारे के ग्राथी कमलजीत सिंह ने बताया किबैसाखी पंजाब, हरियाणा और आसपास के इलाकों का प्रमुख त्योहार है इस दिन गोबिंद जी ने खालसा पंथ की स्थापना की थी बैसाखी पर्व का बड़ा महत्व है. यह पंजाब, हरियाणा और आसपास के प्रदेशों का प्रमुख त्योहार है. इस दौरान रबी की फसल पककर तैयार हो जाती है. फसल काटने के बाद किसान नए साल का जश्न मनाते हैं.सिखों के दसवें और अंतिम गुरु गोबिंद सिंह ने खालसा पंथ की स्थापना की थी. बैसाखी सिखों के नए साल का पहला दिन है.इसके अलावा बैसाखी के दिन सूर्य मेष राशि में प्रवेश करता है इसलिए भी इसे त्योहार के रूप में मनाया जाता है. अंगरेजी कैलेंडर के अनुसार हर साल अप्रैल में बैसाखी मनाई जाती है. पंजाब और हरियाणा के अलावा उत्तर भारत में भी बैसाखी के पर्व की बड़ी मान्यता है. देश के दूसरे हिस्सों में भी बैसाखी को अलग-अलग नामों से मनाया जाता है. बैसाखी एक कृषि पर्व है. पंजाब में जब रबी की फसल पककर तैयार हो जाती है जब बैसाखी मनाई जाती है. वहीं, असम में भी इस दौरान किसान फसल काटकर निश्चिंत हो जाते हैं और त्योहान मनाते हैं. असम में इस त्योहार को बिहू कहा जाता है. वहीं, बंगाल में भी इसे पोइला बैसाख कहते हैं. पोइला बैसाख बंगालियों का नया साल है. केरल में यह त्योहार विशु कहलाता है. बैसाखी के दिन ही सूर्य मेष राशि में संक्रमण करता है इसलिए इसे मेष संक्रांति भी कहते हैं. खालसा पंथ की स्थाना सिखों के दसवें गुरु गोबिंद सिंह ने बैसाखी के दिन ही आनंदपुर साहिब में साल 1699 में खालसा पंथ की नींव रखी थी. खालसा पंथ की स्थापना का मकसद लोगों को तत्कालीन मुगल शासकों के अत्याचारों से मुक्त कर उनके जीवन को श्रेष्ठ बनाना था.इस मौके पर गुरूद्वारा प्रबन्धक कमेटी व समस्त सेवादार मौजुद रहे।