सीबीएसई परिणाम में बेटियों ने मारी बाजी

Publish 03-05-2019 17:52:52


सीबीएसई परिणाम में बेटियों ने मारी बाजी

लखनऊ/ उत्तर प्रदेश (रघुनाथ प्रसाद शास्त्री)| सीबीएसई (सेंट्रल बोर्ड आफ सेकेंड्री एजूकेशन) इंटरमीडिएट परीक्षा के गुरुवार को घोषित हुए नतीजों में जिले में बेटियों ने सफलता का आसमान छुआ है। जिले के टॉप थ्री में छात्राओं ने अपनी जगह बनाई है। केंद्रीय विद्यालय की छात्रा श्रेया सेंगर ने विज्ञान वर्ग में 98 फीसदी अंक हासिल कर जिला टॉप किया है। आदर्श विद्या मंदिर गीतापुरम की प्रियंका यादव, कला वर्ग में 96.8 फीसदी अंक हासिल कर दूसरे स्थान पर रहीं। जबकि केंद्रीय विद्यालय में कला वर्ग की छात्रा मीनाक्षी दीक्षित 96.2 फीसदी अंक हासिल कर जिले में तीसरे स्थान पर अपनी जगह बनाई है। आईएएस और न्यायिक सेवा में जाना मेधावियों का सपना है। वह कहतीं हैं अपना सपना हर हाल में साकार करेंगी।

विज्ञान वर्ग में 98 फीसदी अंक हासिल कर जिले में टॉप करने वाली श्रेया सेंगर की मां श्रुति सिंह की आंखों से बेटी की सफलता पर खुशी के आंसू छलक पड़े। मां श्रुति ने कहा कि बेटी ने जो शोहरत व समाज में सम्मान दिलाया है। बताया कि श्रेया को उन्होंने कभी बेटे से कम नहीं समझा। श्रुति शुक्लापुर प्राथमिक स्कूल में प्रधान शिक्षिका हैं। छात्रा श्रेया ने बताया कि उसने जो भी हासिल किया है वह केवल अपनी मां की वजह से। कोचिंग से भी उसे पढ़ाई में सहयोग मिला। अब उसने जॉगर्फी ऑनर्स के साथ सिविल सेवा की तैयारी करने का संकल्प लिया है। श्रेया को लिखने पढ़ने के साथ डांसिंग व स्कैचिंग पसंद है। वह आईएफएस (इंडियन फॉरेन सर्विस) बनकर देश सेवा करना चाहतीं हैं। बताया कि वह मोबाइल को केवल अपनी पढ़ाई के लिए ही प्रयोग करती हैं। वह व्हाट्सएप और फेसबुक भी चलाती हैं लेकिन परीक्षा के दौरान उन्होंने इससे दूरी बनाए रखी। श्रेया ने सफलता का मूल मंत्र छह घंटे मन लगाकर पढ़ाई करना बताया।

कला वर्ग में 96.8 फीसदी अंक हासिल कर जिले में दूसरा स्थान हांसिल करने वाली प्रियंका यादव के पिता दूध का कारोबार करते हैं। अचलगंज कस्बे की निवासी पिता सुरेंद्र यादव ने बेटी की पढ़ाई के लिए खुद भी कड़ी मेहनत की और उनकी बेटी ने पढ़ाई में कड़ा परिश्रम कर बिना कोचिंग और ट्यूशन के ही सफलता का शीर्ष छुआ है। मां सावित्री देवी गृहणी हैं। प्रियंका सफलता का श्रेय अपने माता-पिता व शिक्षकों को देती है। बताया कि पढ़ाई के दौरान कई बार धन की कमी का भा सामना करना पड़ा। इसी कारण वह कोचिंग नहीं जा पाई लेकिन उसने सफलता हासिल करने की ठानी और पंद्रह घंटे पढ़ाई की। वह बताती हैं कि घर में स्मार्ट फोन ही नहीं है तो सोशल मीडिया से जुड़तीं कैसे। प्रियंका आईएएस बनकर वह देश की सेवा करना चाहती है। वह स्वामी विवेकानंद को अपना आदर्श मानती है। गाने सुनने के साथ कबड्डी खेलना पसंद है।

96.2 फीसदी अंक हासिल कर जिले में तीसरा स्थान हासिल करने वाली छात्रा मीनाक्षी दीक्षित ने स्कूल के बाद घर में कम से कम पांच घंटे पढ़ाई करके यह मुकाम हासिल किया है। पिता विनय शंकर दीक्षित पेशे से वकील हैं उनकी साहित्य में भी रुचि है। जबकि मां शालिनी गृहणी हैं। बेटी की सफलता पर माता-पिता की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। पिता विनय शंकर ने बताया कि बेटी उनका अभिमान है। मीनाक्षी ने अंग्रेजी विषय के लिए कोचिंग की है। बताया कि इसके अलावा  घर में पढाई की। सोशल मीडिया से उनका जुड़ाव तो है लेकिन केवल जरूरत भर का। अपने परिवार, रिश्तेदार और खास सहेलियों से वह वाट्सएप और फेसबुक के जरिए संपर्क में रहती हैं। पिता वकील हैं इसीलिए उनकी न्याय विभाग में काफी रुचि है। इसकी तैयारी में पिता से भी मदद मिलेगी। उन्हें साहित्य पढ़ना पसंद हैं।जवाहर नवोदय विद्यालय काली मिट्टी, फतेहपुर चौरासी- 89 फीसद रहा।

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