राशिफल व पञ्चांग 31 जनवरी 2019

Publish 30-01-2019 22:44:00


राशिफल व पञ्चांग 31 जनवरी 2019

फतेहपुर चौरासी/ उन्नाव(रघुनाथ)| विकासखंड के दोस्तपुर शिवली ग्राम पंचायत में एक बहुत पुराना आश्रम बना हुआ है । उस आश्रम में तीन मंदिर बने हुए हैं एक मां दुर्गा का मंदिर है जिसे ग्राम पंचायत के लोगों ने मिलकर के उसकी स्थापना 2014 में करवाई है थीऔर एक शिव मंदिर है जिसकी स्थापना लगभग 30 साल पहले स्वामी सर्वेवानंद ने कराई थी और एक मंदिर बहुत पुराना लगभग सौ साल का होगा जिसकी स्थापना रामशरण दास (त्यागी बाबा)  ने कराई थी वहीं पर इस समय महान संत त्यागी बाबा रामशरण दास जी की समाधि बनी हुई है जिसका कोई रखरखाव नहीं हो रहा है समाधि और आश्रम टूट-फूट कर लगभग जीर्णं -शीर्ण हो चुका है जिसकी कोई भी मरम्मत अब तक कभी नहीं हुई । जबकि वहां पर ग्राम पंचायत के लोग कथा भागवत मुंडन आदि कराते रहते हैं सार्वजनिक मीटिंग भी इसी आश्रम के पेड़ की छाया में हुआ करती है टूटे-फूटे आश्रम के संदर्भ में ग्राम प्रधान मुलई से बात की संवाददाता रघुनाथ प्रसाद शास्त्री ने ग्राम प्रधान ने बताया इस आश्रम में लगे हुए यू के लिप्टिस के पेड़ों को बेचा गया है जिसमें पूरी रकम अभी तक नहीं मिल सकी है। उसकी रकम मिलते ही  इस भवन का निर्माण कराया जाएगा इस संदर्भ में पूर्व प्रधान पवन पाल से भी बात की गई तो उन्होंने बताया की  मैंने अपने कार्यकाल में इसको ज्यादा पैसे में बेचा था जिसका  20 हजार रुपये बयाना के तौर पर मुझे मिले थे खरीदने वाला ठेकेदार पेड लेने ही नहीं आया मिले रुपये को मैंने ग्राम पंचायत के बैंक खाते में डाल दिये थे यदि उस समय यह बिक जाता और पूरे पैसे मिल जाते तो इसका निर्माण उसी समय हो जाता ग्रामीण लोग बताते हैं यदि इस भवन का निर्माण हो जाए तो त्यागी बाबा का नाम हमेशा बना रहेगा वह विशेष संत थे जिन्होंने एक समय में 40 दिन की भूमि समाधि भी लिखी उसके बाद आश्रम में एक बजरंगबली का मंदिर बनवाया था अधिक बाढ में जल समाधि ले कर तपस्या करते थे जब तक वह कम ना हो जाए या सूखा की स्थिति में वह पंच्चाग्नि तापते थे जब तक बारिश ना हो जाए ऐसा करने से सूखा और बाढ़ दोनो दिक्कतो से क्षेत्र के लोगों को राहत मिल जाती थी वह मूल निवासी फैजाबाद के थे महात्मा जी जिनका नाम रामशरण दास जी था उनके गुरु भाई रामचरन ( रामचरण) इसी गांव के निवासी थे जो अयोध्या जी से इन संत जी को यहां लाए थे महात्मा जी का ने सन उन्नीस सौ 92 में जून के माह में अपने शरीर को त्याग दिया था


उनके प्रिय शिष्य रामसेवक दास ने बताया कि मैं आश्रम से 2 किलोमीटर दूर काफी समय से रहता हूँ उस आश्रम पर होली दीवाली की जाता हूं कई बार उस आश्रम को बनवाने की कोशिश की लेकिन ग्रामीणो ने मेरी कोई मदद नहीं की इस लिये आश्रम का यह हाल है।

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