राशिफल व पञ्चांग 27 दिसम्बर 2018

Publish 26-12-2018 18:47:38


राशिफल व पञ्चांग 27  दिसम्बर 2018

जयहरीखाल ब्लॉक  के डबरगड़, तिमलाखोली वखल्याणधार के बच्चे बीस किमी दूर जाते हैं शिक्षा ग्रहण करने
पेयजल और संचार की डगर भी कठिन
जंगली जानवरो से रोजना होता है आमना-सामना
कोटद्वार।
रिखणीखाल ब्लॉक  की सीमा से लगा जयहरीखाल ब्लॉक  का एक क्षेत्र आजादी के 70 वर्षो बाद भी आज तक तक भी गुमनामी के अंधेरों में जी रहा है। इसी के चलते इसे गुम प्रदेश की संज्ञा भी दी गई है। यहां पेयजल किल्लत के साथ ही संचार की डगर भी भारी कठिन सी है। इस गुम प्रदेश में प्रमुख रूप से तीन ग्राम सभायें शामिल हैं, घेटुलगांव ग्रामसभा के अंतर्गत बाटाधार, सांदणधार तोक आते हैं, जहां एक प्राथमिक स्कूल व एक हाईस्कूल है वही दूसरी ग्रामसभा पैनलगांव के अंतर्गत तिमलाखोली, खल्याणधार, कंदराणा ,मलैयीधार तोक हैं। जहां एक प्राइमरी व एक जूनियर हाईस्कूल है, तीसरी ग्रामसभा बुद्धगांव में रिखेड़ा ,पिपलकर व बुधगांव आते हैं। घेटुलगांव के लोगों का बाजार दस किमी दूर ढाबखाल है जबकि बुधगांव व पैनलगांव के लोगों का बाजार पीपलचैड़ है। यहां के लिये सड़क मार्ग बुधगांव तक बनी लेकिन सड़क के मलबे में पेयजल योजना व ग्रामीणों के मूल स्रोत भी ध्वस्त होकर दब गए हैं पैनल गांव के लोग डबरगड़, तिमलाखोली व खल्याणधार की प्यास की आस अब मात्र घेड़ीगाड़ पंपिंग योजना के सहारे है, जिसका पंप आये दिन खराब ही रहता है। ग्राम प्रधान कमला देवी का कहना है कि फोन के लिये भी उनको पांच छ किमी दूर जाना पडता है या ढाबखाल या कुंडू डांडा जहां भालू का भय रहता है जाना पड़ता है। यही गुम प्रदेश भालू कि लिये भी चर्चित है, कई बार लोगों की आते जाते भालू से भिडंत होती है, प्राथमिक, उच्च प्राथमिक के बाद यहां पैनलगांव के तोक डबरगड़, तिमलाखोली वखल्याणधार के बीस बच्चे वर्तमान में भी राइंका डाबरी पढ़ने दस किमी आना व दस किमी. जाना यानि कि रोज बीस किमी दूरी तय करते हैं.। यद्यपि बुधगांव के लिये पेयजल का मूल स्रोत जिंदा है वहीं पिपलकर भी स्रोत के नजदीक है पैनलगाव ग्रामसभा के लोगों को गाड़ी पकड़ने हेतु जालीखांद दस किमी दूर आना पड़ता है। बुधगांव पैनलगांव ,घेटुलगांव से इतर यहां शिक्षा का केंद्र सन् 1970 -80  के दशक में खोला गया हाईस्कूल लयड़सैंण है जिसकी बुनियाद यहां के सामाजिक कार्यकर्ता स्व.मनोहर लाल भारद्वाज ने रखी थी जब स्व. हेमवती नंदन बहुगुणा पर्वतीय विकास मंत्री थे। यहां बुधगांव, पिपलकर ,ल्वींठा तोक, खुबाणी मल्ला ,बीणा खुबाणी के लगभग सब मिलाकर अस्सी बच्चे पढ़ रहे हैं। कुल मिलाकर आगे की शिक्षा व किसी भी सुख दुख में इनका सहारा कौन हो यह सोचनीय है व आधुनिकता के दौर में भी सरकारी दावों को यहां की स्थितियां सटीक नहीं है। यहां के प्रसिद्ध भाषाविद् डॉ. जेपी कोटनाला का कहना है कि लाचारी व तंत्र की बेकारी के अलावा इस उत्तराखंड की परिकल्पना जो जनमानस ने की थी वह गुल सरै खाक बनकर चकनाचूर होते दिख रहे है। यहां की हरियाली भरे खेतों को देख सहसा हर व्यक्ति का मन जाने को आतुर रहता है। प्रकृति ने इस जगह को जहां सुंदरता दी वहीं नीति नियामकों ने इसे गुमनामी में धकेलने के अलावा क्या शिगूफा दिया .यह रहस्यमयी जैसा हो गया है।

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