राशिफल व पञ्चांग 15 दिसम्बर 2018

Publish 14-12-2018 18:09:52


राशिफल व पञ्चांग 15 दिसम्बर 2018

कोटद्वार। विकास की राह में तेजी से दौड़ रहा है, वो विकास जो सबकी चाह है, जिसकी कीमत हर किसी को चुकानी पड़ती है। आम जनता को सरकार को टैक्स के रूप में कीमत चुकाना पड़ता है, लेकिन कुछ चीजें जीवन में अमूल्य होती है, जिसकी कीमत समय वसूलता है। जी हां हम बात कर रहे हैं, विकास के नाम पर सबसे ज्यादा कीमत देने वाली प्रकृति की, जिसकी कीमत वृक्षों को चुकानी पड़ती है। एनएच पर वर्षो से खड़े हरे पेड़ों को चौड़ीकरण के नाम पर बलि का बकरा बनाया जा रहा है।
एनएच पर वर्षो से खड़े ये वृक्ष बेजुबान है जो जब तक जीवित खड़े रहे, तब तक छाया, फल और हवा देते रहे और जिनकी कीमत कोई मनुष्य नहीं समझता है। पिछले कई वर्षो से कोटद्वार में सड़क चौड़ीकरण के नाम पर किसी ने अपनी कुर्बानी दी है तो वो है हमारे पर्यावरण मित्र वृक्ष, जिनकी कोई नहीं सुनता। कौड़िया से लेकर सिद्धबली मंदिर के समीप स्थित वन विभाग चैकी तक राष्ट्रीय राजमार्ग के दोनों ओर खड़े इन वृक्षों ने वर्षो तक राहगीरों के साथ ही पशु पक्षी सभी को अपनी छाया में पनाह दी, लेकिन प्रशासनिक अमला अपनी पूरी ताक दिखाकर उन्हें मौत के मुंह में धकेल देता है, वहीं दूसरी ओर कोटद्वार बाजार में विकास के नाम पर खड़े होते जा रहे हैं कंकरीट के जंगल, जो कि आम आदमी की सड़क को अतिक्रमण कर शान से खड़े होते हैं, उनकी एक ईट तक नहीं हिला पा रहा है प्रशासन। हिले भी तो कैसे, वुक्ष अपनी जान बचाने को लोनिवि दुगड्डा में बैठे लोगों को जीवन चलाने हेतु गुलाबी चूर्ण जो नहीं दे सकता। इस मार्ग पर कट रहे इन पेड़ों की तो कोई नहीं सुन रहा, लेकिन इस मार्ग से गुजरने वाले राहगीरों और वाहन चालकों की भी कोई सुनवाई होती नजर नहीं आ रही। आलम यह है कि वक्त बेवक्त पेड़ों का कटान किया जा रहा है, जिससे इस मार्ग पर गुजरने वाले वाहन चालक और राहगीर अपनी जान हथेली पर लेकर इस मार्ग से गुजर रहे है। इन दिनों जहां पेड कटान हो रहा है, वहां कई चिकित्सालय, मेडिकल स्टोर, स्कूल डाकखाना, तहसील सभी कुछ है, लेकिन बावजूद इसके वक्त बेवक्त हो रहे कटाने से लोग अपनी जान हथेली में लेकर चल रहे है। कहने के लिए पुलिस द्वारा यहां थाने के सामने बैरिकेट लगाए गए है, लेकिन तब भी इस मार्ग पर वाहनों का गुजरना प्रशासन की नाकामी को दर्शा रहा है। और यदि इस मार्ग पर गुजरते वक्त कोई हादसा होता है तो इसका जिम्मेदार कौन होगा। क्या प्रशासन और लोनिवि दुगड्डा इसकी जिम्मेदारी ले सकेगा। आखिकार पेड़ कटान का समय क्यों निर्धारित नहीं किया जा रहा है और जिस वक्त सड़कों पर ट्रैफिक अधिक होता है, तभी संबंधित ठेकेदार द्वारा क्यों पेड़ों का कटान किया जा रहा है।

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