मीन संक्रान्ति जनित खरमास दोष में रहेगे शुभ कार्य बन्द, जानने के लिए पढ़े पूरा समाचार

Publish 06-03-2019 20:29:36


 मीन संक्रान्ति जनित खरमास दोष में रहेगे शुभ कार्य बन्द, जानने के लिए पढ़े पूरा समाचार

१५ मार्च २०१ ९ से १४ अप्रैल २०१ ९ तक मीन संक्रान्ति जनित खरमास दोष रहेगा, सभी शुभ कार्य रहेगें बंद
लखनऊ/ उत्तर प्रदेश( रघुनाथ प्रसाद शास्त्री):
धनु और मीन राशि वृहस्पति ग्रह की राशियां हैं, इन ग्रहों के राजा सूर्य के प्रवेश करते ही खरमास दोष लग जाता है। अतः समस्त शुभ कर्म वर्जित हो जाते हैं। जो इस माह शुक्रवार 15 मार्च को दिन में 8 बजकर 10 मिनट पर सूर्य मीन राशि में प्रवेश कर रहे हैं। अतः १५ मार्च २०१ ९ से १४ अप्रैल २०१ ९ तक मीन संक्रान्तिजनित खरमास दोष रहेगा।

जीवन दाता सूर्य हैं
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस दुनिया में प्राणिमात्रा को जीवनदायिनी शक्ति का अक्षय स्रोत सम्पूर्ण जन्मजात के परम प्रकाशक भगवान सूर्य। अखिल काल गणना इन्ही से होता है। दिन और रात्रि के प्रवर्तक ये ही हैं। प्राणिमात्र के जीवनदाता होने के कारण इन्हे विश्व की आत्मा कहा गया है। "सूर्य आत्मा जगतस्तथुषश्च"।
चाहे नास्तिक हो या आस्तिक, भारतीय हो या अन्य देशीय, स्थावर जंगम इन सभी की सत्ता स्वीकार करते हैं और इनकी ऊर्जा से ऊर्जावंग हो अपने दैनन्दिन कृत्य में प्रवृत्त होते हैं। भगवान सूर्य की महिमा का वर्णन वेद (संहिता, ब्राह्मण, आरण्यक, उपनिषद) आर्ष ग्रन्थ (रामायण, महाभारत, पुराण आदि) सभी करते हैं। सूर्य देवता की उपासना प्राणिमात्र को करनी चाहिए क्योंकि आराधना के आराध्यस्थान दिव्य गुणों का संकमण आराधक में भी अवश्य होता है। आस्तिकों में लोक कल्याण की भावना रूप दैवी गुण सर्वाधिक होती है। सूर्य से ही दिन, रात, लग्न, ऋतु, अयन, वर्ष और युगादि दोषीत होते हैं। ज्योतिष के जानकार रघुनाथ प्रसाद शास्त्री ने बताया की ऐसे में होता है क्षेत्रीयवाद अवधि, सभी कार्य होते हैं वर्जित  


इसी प्रकार के गुरु को भी ज्योतिष शास्त्र में मंत्री, पुरोहित और ज्ञान और सुख का कारक माना गया है। गुरु पुत्र, पति, पत्नी, धन, धान्य का भी कारक है। सूर्य की राशि में गुरु हो और गुरु की राशि में सूर्य संक्रमण कर रहे हो तो उस काल को 'गुर्वादत्व' नाम से जाना जाता है, जो सभी कार्यों के लिए वर्जित माना गया है।

यथा- रविक्षेत्र गते जीवे जीवक्षेत्र गते रवौ।
नागवादवाद: स विज्ञेयः गर्हितः सर्वकर्मसु ।।  
वर्जयेत्सर्वकार्याणि व्रतस्वत्यनादिकम् ।।

शुभ कार्य का फल नहीं मिलता
इसी प्रकार सिंह राशि में गुरु के होने पर सिंहस्थ दोष माना जाता है, जो कि विवाह आदि कार्यों मे वर्जित है। अतएव जब सूर्य गुरु की राशियों मे होता है तब सूर्य के प्रताप से गुरु की राशि धनु और मीन निर्बल हो जाती है। इस स्थिति में किया गया शुभ कार्य तटस्थफल हो जाता है या अधूरा रह जाता है।

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