जाने शिव भक्त रविवार को ही से बेलपत्र ,दूर्वा ,गन्ना आदि क्यों कर रहे है एकत्र , पढ़े पूरा समाचार

Publish 03-03-2019 19:35:03


जाने शिव भक्त रविवार को ही से बेलपत्र ,दूर्वा ,गन्ना आदि क्यों कर रहे है एकत्र , पढ़े पूरा समाचार
 
श्री केदारनाथ: श्री बदरीनाथ - केदारनाथ मंदिर समिति द्वारा कल 3 अगस्त से श्री केदारनाथ धाम में 11 दिवसीय महाशिव पुराण कथा दिल्ली के दानीदाता महेन्द्र शर्मा के सहयोग से यह कथा आयोजित हो रही है। 2013 की केदारनाथ आपदा में दिवंगत आत्माओं की शांति हेतु एवं सम्पूर्ण विश्व की सुखः समृद्धि हेतु 4 वर्षों से  निरंतर सावन माह में महाशिव पुराण का आयोजन हो रहा है।अष्ठम दिवस की शुभ बेला पर ज्योतिर्पीठ से अलंकृत व्यास श्री दीपक नौटियाल जी द्वारा कहा गया 
भैरव शिव के पांचवे रूद्र अवतार है | इनका अवतरण मार्गशीर्ष मास की कृष्णपक्ष अष्टमी को एक दिव्य ज्योतिर्लिंग से हुआ है |
कथा के अनुसार एक बार साधुओ ने सभी त्रिदेव और देवताओं से पूछा की आपमें सबसे महान और सबसे श्रेष्ठ कौन है | देवताओं ने सभी वेदों से पूछा तो सभी ने एक सुर में कहा की महादेव शिव के समान कोई नहीं है वे ही सर्व शक्तिशाली है पूजनीय है |
वेद शास्त्रों से शिव के बारे में यह सब सुनकर ब्रह्मा ने पांचवें मुख से शिव के बारे में भला-बुरा कहा। उस शीश ने इतना तक कह दिया की जो शिव अपने शरीर पर भस्म लगाते है , नग्न रहते है और जिनके पास ना ही महल है ना ही धन वैभव वो कैसे श्रेष्ठ हो सकते है | यह सुनकर सभी वेदों और देवी देवताओ को बहुत दुःख हुआ | इसी समय एक दिव्यज्योति शिवलिंग से एक बालक उत्पन्न हुए। वह बालक जोर जोर से रुद्रं करने लगा | ब्रह्मा को अज्ञानवस लगा की उनके तेज से ही यह बालक उत्पन्न हुआ है |
अधिक रुदन करने के कारण मैंने ही तुम्हारा नाम ‘रूद्र’ रखा है और तुम मेरे द्वारा जन्मे हो अत: तुम भरण पोषण करने वाले होगे अत: तुम्हे भैरव के नाम से भी जाना जायेगा ।
भैरव को बह्र्माजी ने वरदान प्रदान कर दिए थे पर उनके पांचवे शीश से शिव के लिए गलत शब्द निकलना बंद नही हो रहे थे | सहन शक्ति ख़त्म होने पर भैरव ने अपने बाएं हाथ की सबसे छोटी अंगुली के नाख़ून से वाले ब्रह्मा के पांचवे सर को काट दिया ब्रह्मा का सिर काटने से भैरव पर ब्रह्महत्या लग गयी तब भगवान शिव ने भैरव से कहा ये ब्रह्मा विष्णु तुम्हारे मान्य है तुम ब्रह्मा के कटे सिर को धारण करो और ब्रह्महत्या पाप से मुक्ति के लिये व्रत करो तव शिव ने ब्रह्महत्या नामक कन्या उतपन्न की और उस से कहा तुम उग्र रूप धारण कर कालभैरव के पीछे चलो वाराणसी जाते ही तुम मुक्त हो जाओगी 
यह करना बह्र्म हत्या के समान था | शिव ने उन्हें आदेश दिया की तुम जब तक इस पाप से मुक्त ना हो जाओ तब तक त्रिलोक में भ्रमण ही करते रहो और तब तक किसी भी स्थान पर स्थाई और शांति से मत बैठो | भैरव ने शिव आदेशानुसार वैसा ही किया तब अंत में काशी जगह पर उन्हें हाथ से बह्रमा का शीश स्वतः ही छुट गया और तब से वह तीर्थ कपाललोचन नाम से प्रसिद्ध हो गया तब वे इस पाप से मुक्त हो पाए | शिवजी ने उन्हें काशी का कोतवाल बना दिया |
‌आज भी ये काशी के कोतवाल के रूप में पूजे जाते हैं। इनका दर्शन किये वगैर विश्वनाथ बाबा के दर्शन पूर्ण नही माने जाते , इसी तरह उज्जैन के काल भैरव के दर्शन के बिना महाकाल के दर्शन का पूर्ण लाभ नही मिल पाता । और बाबा केदार के दर्शन तभी सफल होते है जब तीर्थ यात्री बाबा भूखण्ड भैरव के दर्शन करे  इस अवसर पर  आचार्य आनन्द प्रकाश नौटियाल ,मुख्यकार्याधिकारी बी०डी०सिंह, प्रशासनिक अधिकारी  राजकुमार नौटियाल,,पुजारी टी गंगाधर लिंग, आनन्द सूरज तिवारी, वेदपाठी रविन्द्र भट्ट,डा.लोकेन्द्र रिवाड़ी,प्रबंधक अरविन्द शुक्ला, प्रदीप सेमवाल,सुभाष सेमवाल, कैलाश जमलोकी,नवीन मैठाणी,महावीर तिवारी,केदारसभा अध्यक्ष विनोद शुक्ला,एस आई  विपिन पाठक एवं समस्त मन्दिर कर्मचारी मौजूद ऱहे। मंदिर समिति के कार्याधिकारी एन.पी.जमलोकी ने कहा  कि 13 अगस्त को महाशिव पुराण कथा का समापन है।
समिति के मीडिया प्रभारी डा.हरीश गौड़ ने बताया कि  आठवें दिन गुप्त काशी स्थित विश्वनाथ मंदिर में आयोजित   महाशिव पुराण कथा में डा.दुर्गेश आचार्य ने कथा का श्रवण कराया। वहीं आचार्य हिमांशु सेमवाल ने देवी भागवत कथा के माध्यम से देवी के विभिन्न रुपों की चर्चा की।
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