जाने होली के बारे में , होली और भगवन का क्या है सम्बन्ध पढ़े

Publish 18-03-2019 18:57:06


जाने होली के बारे में , होली और भगवन का क्या है सम्बन्ध पढ़े

लखनऊ /उत्तर प्रदेश( रघुनाथ प्रसाद शास्त्री): देश व प्रदेश में इन दिनों होली की तैयारियां तेजी से चल रही हैं। बाजारों में भारी भीड़ देखने को मिल रही है होलिका दहन के दूसरे दिन फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को रंगवाली होली के नाम से जाना जाता है। इस दिन गुलाल और पानी के रंगों से उत्सव मनाया जाता है। रंगवाली होली को धुलण्डी के नाम से भी जाना जाता है। इस वर्ष ये पर्व 21 मार्च गुरुवार को मनाया जायेगा। इस अवसर पर भांग की ठंडार्इ का महत्व होता है जो कि भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। परंतु ज्योतिष के जानकार रघुनाथ प्रसाद शास्त्री बता रहे हैं इसके अतिरिक्त एक आैर रिश्ता है शंकर जी और होली के मध्य।

क्‍या है शिव और होली का संबंध
होली और भगवान भोलेनाथ के संबंध को लेकर एक रोचक कहानी है। ये कहानी विरक्‍ति में निहित आसक्‍ति के बारे में बताती है। इस पौराणिक कथा के अनुसार देवी पार्वती, भगवान शिव से विवाह करना चाहती थीं, लेकिन तपस्या में लीन शिव का ध्यान उनकी ओर गया ही नहीं। इसके बाद देवी ने कामदेव से सहायता मांगी। इस कहानी के अनुसार होली और शिव का संबंध वैसा ही है जैसा भूल और क्षमा का, पार्वती के बाद कामदेव और उसके बाद शिव की भूल पर क्षमा कर देने का भाव ही इस कथा का सार है।

होली की कथा
पार्वती के अनुरोध पर प्रेम के देवता माने जाने वाले कामदेव आगे आए और उन्होंने शिव पर पुष्पबाण चला दिया। तपस्या भंग होने से शिव को इतना ग़ुस्सा आया कि उन्होंने अपनी तीसरी आंख खोल दी और उनके क्रोध की अग्नि में कामदेव भस्म हो गए। इसके बाद शिवजी ने पार्वती को देखा तो एक अलग ही प्रभाव दिखा। तब कुछ कामदेव के बाण का असर और कुछ पार्वती की आराधना का फल जिसके चलते, शिव ने उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार कर लिया। कामदेव के भस्म हो जाने पर उनकी पत्नी रति रोने लगीं और शिव से कामदेव को जीवित करने की गुहार लगाई। तब तक शिव का क्रोध शांत हो चुका था, उन्होंने कामदेव को पुनर्जीवित कर दिया। तभी से कामदेव के भस्म होने के दिन होलिका जलाई जाती है और उनके जीवित होने की खुशी में रंगों का त्योहार होली मनाया जाता है। यानि ये सिद्ध हुआ कि भूल के लिए क्षमा कर देने से दूसरे के जीवन में बहार आ सकती है।


इसके अलावा हिरणाकश्प और प्रहलाद होलिका की कथा भी आती है  हिरणाकश्प के  पुत्र प्रहलाद भगवान के विशेष भक्त हुये एक कुम्भरीन को देख कर उन्हे भगवान से विशेष लगाव हो गया और विश्वास हो गया कि आवें में कुम्भरीन ने गलती से कुत्ते के कुछ कुछ बच्चे बंद कर दिए थे जो आंवा पकने के बाद खुलने पर वह बच्चे जीवित निकले कुम्भरीन ने बताया कि मैंने भगवान विष्णु का 24 घंटे बराबर जप किया है जिसकी वजह से यह बच्चे जीवित निकले हैं । इससे प्रहलाद को भगवान पर अटूट विश्वास हो गया वह अपने पिता के विरोध में आकर भगवान विष्णु का अनन्य भक्त बन गए जिन्हें मारने के लिए उनके पिता ने सैकड़ों तरीके अपनाएं किंतु वह उन्हें मार नहीं पाए फिर हिरणाकश्प ने अपनी बहन होलिका को गोद में लेकर आग में बैठने को कहा क्योंकि होलका के पास एक ऐसा दुपट्टा था जिसे अग्नि देव ने दिया था जो वह दुपट्टा ओढ  कर आग में बैठ जाए तो वह नहीं जलता इसलिए होलिका ने अपने भतीजे प्रहलाद को गोद में लेकर आग में बैठ गई और आग लगा दी गई जिससे कि  प्रहलाद जल जाए लेकिन ऐसा नहीं हुआ वह दुपट्टा उड़ कर प्रहलाद के ऊपर आ गया और होलिका जल गई जिससे   हिरणाकश्प के राज्य के लोग शोक मनाने लगे और कीचड़ गंदी वस्तुएं उछालने लगे शराब के नशे में धुत हो गए लेकिन जो धार्मिक कार्य करने वाले लोग थे उन लोगों ने खुशियां मनाई अधर्म पर धर्म की जीत का उत्सव मनाया इसलिए होली का पर्व मनाया जाता है।

To Top