कार्तिक पूर्णिमा को स्नान दान करने से क्या-क्या लाभ होते हैं या जाने

Publish 22-11-2018 17:39:10


कार्तिक पूर्णिमा को स्नान दान करने से क्या-क्या लाभ होते हैं या जाने

उत्तर प्रदेश (रघुनाथ):   हिंदू धर्म में कार्तिक पूर्णिमा के दिन को बेहद पवित्र माना जाता है, इस दिन सभी देवी-देवताओं को एकसाथ प्रसन्न कर सकते हैं। इस बार यह तिथि 23 नवंबर दिन शुक्रवार को है। इस दिन हवन, दान, गंगा स्नान, उपासना आदि का विशेष महत्व है। माना जाता है ज्योतिष के जानकार रघुनाथ प्रसाद शास्त्री ने बताया  कि इस दिन भगवान नारायण ने मत्स्यावतार धारण किया था। मान्यता है कि इस दिन गंगा में स्नान और दीप दान करने से कई यज्ञों के बराबर पुण्य मिलता है। यह दिन बेहद पवित्र माना जाता है
इस दिन करें यह काम
 कार्तिक पूर्णिमा के दिन चावल का दान करना शुभ माना गया है। चावल का संबंध चंद्रमा से है इसलिए वह शुभ फल देता है।
इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने की परंपरा है। अगर आप किसी कारण वश जा नहीं सकते तो पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान कर लें। पहले खाली बर्तन में कुछ मात्रा में गंगाजल डाले उसके बाद उसमें और पानी मिलाए कर बढ़ा ले तभी स्नान करें। इस दिन दीपदान, पूजा और दान करने का विशेष महत्व है। साथ ही आप सुबह भगवान सत्यनारायण की कथा भी सुनें। कार्तिक पूर्णिमा के दिन घर के मुख्यद्वार पर आम के पत्तों का तोरण बांधे और द्वार पर रंगोली भी बना सकते हैं। इस दिन विशेष समृद्धि योग बन रहा है इसलिए शिवलिंग पर जल अवश्य चढ़ाएं और 108 बार ओम नम: शिवाय मंत्र का जप करें। माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए इस दिन पीपल की पूजा करें और उसके चारो तरफ दीपक जलाएं। पीपल में लक्ष्मी का वास माना गया है। ऐसा करने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन चावल का दान करने से अविवाहित कन्याओं के विवाह में हो रही दिक्कतें दूर हो जाएंगी और उनका विवाह अति शीघ्र सुयोग्य वर के साथ होगा
ना करें यह काम
 पुराणों में इस दिन को बहुत पवित्र माना गया है इसलिए भूलकर भी प्याज, लहसुन, मांस, अंडा जैसे तामसिक भोजन से बचना चाहिए। पूर्णिमा के दिन भूलकर भी शारीरिक संबंध नहीं बनाने चाहिए। इस दौरान ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। मान्यता है कि इस दिन शारीरिक संबंध बनाने से चंद्रमा का दुष्प्रभाव आपको व्यथित करता है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन आप सभी देवी-देवताओं को प्रसन्न कर सकते हैं। यह आध्यात्मिक दिन है इसलिए घर में इस दिन शांति और सद्भाव बनाकर पूर्वजों को याद करना चाहिए। भूलकर भी घर का माहौल लड़ाई-झगड़े से खराब नहीं करना चाहिए।  पूर्णिमा के दिन मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए। मदिरा मनुष्य को हमेशा अहंकार की ओर ले जाती है और ईश्वर से भी नाता तोड़ती है। भगवान कब और किस रूप में आ जाएं, कहा नहीं जा सकता है । इसलिए ना केवल कार्तिक पूर्णिमा के दिन बल्कि कभी भी गरीब और असहाय लोगों का अपमान नहीं करना चाहिए। हमेशा अतिथि और भिखारी को खाना-पानी दिए बिना जाने नहीं देना चाहिए।

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