जाने भगवान शिव को क्यों चढ़ाते हैं बेल पत्र

Publish 02-03-2019 11:07:32


जाने भगवान शिव को क्यों चढ़ाते हैं बेल पत्र

लखनऊ/ उत्तर प्रदेश (रघुनाथ प्रसाद शास्त्री ): महाशिवरात्रि   पर्व इस बार 4 मार्च  सोमवार को मनाया जा रहा है। इस दिन शिव भक्त भगवान शकंर या भोलेनाथ की पूजा-अर्चना करते हैं। मंदिर जाकर दूध से अभिषेक करते हैं, पूरे दिन भूखे रहकर उपवास करते हैं, शिवलिंग पर फल और फूल चढ़ाते हैं। दीपक जलाकर भगवान की अराधना करते हैं। लेकिन सबसे खास महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर बेल पत्र चढ़ाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव की पूजा बेल पत्र के बिना पूरी नहीं होती  


हिंदु पुराणों में एक बेहद प्रचलित कथा के अनुसार सागर मंथन के दौरान जब अमृत के लिए देवताओं और राक्षसों के बीच युद्ध चल रहा था, तब अमृत से पहले सागर से कालकूट नाम का विष निकला ये विष इतना खतरनाक था कि इससे पूरा ब्रह्मांड नष्ट किया जा सकता था लेकिन इसे सिर्फ भगवान शिव ही नष्ट कर सकते थे तब भगवान शिव ने कालकूट नामक विष को अपने कंठ में रख लिया था इससे उनका कंठ (गला) नीला हो गया इस घटना के बाद से भगवान शिव का नाम नीलकंठ पड़ा लेकिन इस विष के प्रभाव से भगवान शिव का मस्तिष्क गर्म हो उठा और उनके कंठ में जलन होने लगी. उनके इस कष्ट को देख सभी देवता चिंतित हो गए। उनके कंठ की जलन को कम करने के लिए सभी देवताओं ने उन्हें बेल पत्र खिलाया, जिससे विष का प्रभाव कम हो गया। तभी से शिव जी की पूजा में बेल पत्र का विशेष महत्व है।ज्योतिष के जानकार रघुनाथ प्रसाद शास्त्री ने बताया की भगवान भोलेनाथ पर एक रुद्री से कम बेलपत्र नहीं चढ़ाने चाहिए एक रुद्री 11 बेलपत्र की होती है एक रुद्री बेलपत्र चढ़ाने से श्रद्धालुओं के 3 जन्मों के पाप नष्ट होते हैं और शिव की महान कृपा प्राप्त होती हैं।


इतना ही नहीं मान्यता यह भी है कि भगवान शिव द्वारा विष पीकर पूरे संसार को इससे बचाने की इस घटना के उपलक्ष में ही महाशिवरात्रि मनाई जाती है। इससे अलग बेल पत्र को लेकर माना जाता है कि जो भी भक्त बेल पत्र के साथ भगवान शिव की पूजा करता है उसे तीर्थों में स्नान जितना फल प्राप्त होता है। लेकिन इस विष के प्रभाव से भगवान शिव का मस्तिष्क गर्म हो उठा और उनके कंठ में जलन होने लगी उनके इस कष्ट को देख सभी देवता चिंतित हो गए उनके कंठ की जलन को कम करने के लिए सभी देवताओं ने उन्हें बेल पत्र खिलाया, जिससे विष का प्रभाव कम हो गया तभी से शिव जी की पूजा में बेल पत्र का विशेष महत्व है। इतना ही नहीं मान्यता यह भी है कि भगवान शिव द्वारा विष पीकर पूरे संसार को इससे बचाने की इस घटना के उपलक्ष में ही महाशिवरात्रि मनाई जाती है। इससे अलग बेल पत्र को लेकर माना जाता है कि जो भी भक्त बेल पत्र के साथ भगवान शिव की पूजा करता है उसे तीर्थों में स्नान जितना फल प्राप्त होता है।

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