जाने देवभूमि उत्तराखण्ड के पंचप्रयाग के बारे में , पढ़े पूरा समाचार

Publish 20-01-2019 22:22:27


जाने देवभूमि उत्तराखण्ड के पंचप्रयाग के बारे में , पढ़े पूरा समाचार

गढ़वाल/उत्तराखंड : जहाँ पर दो नदियों का संगम होता है उसे प्रयाग कहते है . जहाँ उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में कुम्भ का आयोजन हो रहा है तो वहीं देवभूमि उत्तराखंड में पांच प्रयाग प्रमुख रूप से जाने जाते है . देवभूमि उत्तराखंड के प्रसिद्ध पंच प्रयाग देवप्रयाग,  रुद्रप्रयाग,  कर्णप्रयाग,  नन्दप्रयाग तथा विष्णुप्रयाग मुख्य नदियों के संगम पर स्थित हैं । नदियों का संगम भारत में बहुत ही माना पवित्र जाता है विशेषत: इसलिए कि नदियां देवी का रूप मानी जाती हैं । जहाँ प्रयागराज में गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम के बाद गढ़वाल - हिमालय के के क्षेत्र संगमों को सबसे पवित्र माना जाता है, क्योंकि गंगा, यमुना और उनकी सहायक नदियों का यही उद्गम स्थल है । जिन जगहों पर इनका संगम होता है उन्हें प्रमुख तीर्थ माना जाता है यहीं पर श्राद्ध के संस्कार होते हैं ।
 देवप्रयाग
देवभूमि उत्तराखण्ड के जनपद टिहरी में अलकनंदा और भागीरथी नदी के संगम पर बसे स्थान को आज देवप्रयाग के नाम से जाना जाता है . अलकनंदा तथा भगीरथी नदियों के संगम पर देवप्रयाग नामक स्थान स्थित है। इसी संगम स्थल के बाद इस नदी को गंगा के नाम से जाना जाता है । देवप्रयाग से ही दो नदियाँ अलकनंदा और भागीरथी अपना अस्तित्व समाप्त कर भारत की संस्कृति को बचाने के लिए गंगा का रूप धारण कर लेती है.
 रुद्रप्रयाग
देवभूमि उत्तराखण्ड के जनपद रुद्रप्रयाग में मन्दाकिनी तथा अलकनंदा नदियों के संगम पर रुद्रप्रयाग स्थित है ।संगम स्थल के समीप चामुंडा देवी व रुद्रनाथ मंदिर दर्शनीय है संगम से कुछ ऊपर भगवान शंकर का `रुद्रेश्वर 'नामक लिंग है, जिसके दर्शन अतीव पुण्यदायी बताये गये हैं यहीं से यात्रा मार्ग केदारनाथ के लिए जाता है, जो ऊखीमठ, चोपता, मंडल, गोपेश्वर होकर चमोली में बदरीनाथजी के मुख्य यात्रा मार्ग में मिल जाता है ।


 कर्णप्रयाग
देवभूमि उत्तराखंड के जनपद चमोली के कर्णप्रयाग स्थित है. अलकनंदा तथा पिण्डर नदियों के संगम पर कर्णप्रयाग स्थित है । पिण्डर का एक नाम कर्ण गंगा भी है, जिसके कारण ही इस तीर्थ संगम का नाम कर्ण प्रयाग पडा । यहां पर उमा मंदिर और कर्ण मंदिर दर्शनीय है । यहां पर भगवती उमा का अत्यंत प्राचीन मन्दिर है ।संगम से पश्चिम की ओर शिलाखंड के रुप में दानवीर कर्ण की तपस्थली और मन्दिर हैं । यहीं पर महादानी कर्ण द्वारा भगवान सूर्य की आराधना और अभेद्य कवच कुंडलों का प्राप्त किया जाना प्रसिद्ध है। कर्ण की तपस्थली होने के कारण ही इस स्थान का नाम कर्णप्रयाग पड़ा ।
 नन्दप्रयाग
देवभूमि उत्तराखण्ड के जनपद चमोली में नंदप्रयाग स्थित है. नन्दाकिनी तथा अलकनंदा नदियों के संगम पर नन्दप्रयाग स्थित है पौराणिक कथा के अनुसार यहां पर नंद महाराज ने भगवान नारायण की प्रसन्नता और उन्हें पुत्र रूप में प्राप्त करने के लिए तप किया था यहां पर नंदादेवी का भी बड़ा सुंदर मन्दिर है । नन्दा का मंदिर, नंद की तपस्थली एवं नंदाकिनी का संगम आदि योगों से इस स्थान का नाम नंदप्रयाग पड़ा. संगम पर भगवान शंकर का दिव्य मंदिर है । यहां पर लक्ष्मीनारायण और गोपालजी के मंदिर दर्शनीय हैं ।
 विष्णुप्रयाग
देवभूमि उत्तराखण्ड के जनपद चमोली में विष्णुप्रयाग स्थित है. धौली गंगा तथा अलकनंदा नदियों के संगम पर विष्णुप्रयाग स्थित है । संगम पर भगवान विष्णु जी प्रतिमा से सुशोभित प्राचीन मंदिर और विष्णु कुण्ड दर्शनीय हैं ।इसी स्थल पर दायें - बायें दो पर्वत हैं, जिन्हें भगवान के द्वारपालों के रूप में जाना जाता है । दायें जय और बायें विजय हैं ।

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