ब्रेकिंग न्यूज़ !
    *** लाइव एसकेजी न्यूज़ पर आप अपने लेख, कविताएँ भेज सकते है सम्पर्क करें 9410553400 हमारी ईमेल है liveskgnews@gmail.com *** *** सेमन्या कण्वघाटी समाचार पत्र, www.liveskgnews.com वेब न्यूज़ पोर्टल व liveskgnews मोबाइल एप्प को उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश राजस्थान, दिल्ली सहित पुरे भारत में जिला प्रतिनिधियों, ब्यूरो चीफ व विज्ञापन प्रतिनिधियों की आवश्यकता है. सम्पर्क 9410553400 *** *** सभी प्रकाशित समाचारों एवं लेखो के लिए सम्पादक की सहमती जरुरी नही है, किसी भी वाद विवाद की स्थिति में न्याय क्षेत्र हरिद्वार न्यायालय में ही मान्य होगा . *** *** लाइव एसकेजी न्यूज़ के मोबाइल एप्प को डाउनलोड करने के लिए गूगल प्ले स्टोर से सर्च करे liveskgnews ***

    कुंवर विक्रमादित्य सिंह द्वारा रचित कविता "वृक्ष" मैं खड़ा हूँ पत्तियों संग शाखा यु फैलाये जाता ..........................

    15-06-2019 10:04:05

    कुंवर विक्रमादित्य सिंह द्वारा रचित कविता  "वृक्ष"           

                        वृक्ष

    मैं खड़ा हूँ पत्तियों संग शाखा यु फैलाये जाता
    देखता हूँ उसी पल से जब से तू इतराये जाता

    है न तुझको ज्ञात पर सम्बन्ध मेरा है पुराना
    कितने ही बरसो से हमने सीखा संग बढ़ते जाना
    पौध था जब कुल में तेरे मेरे चक्कर था लगाता
    खेलता तू किलकारी कर संग मेरे झूमे जाता

    दोनों ने सालों में देखा धीरे धीरे बढ़ता जाना
    झांकता हूँ उन पलो से आज तक का यह फ़साना

    कितने ही मौसम जो बीते हम कभी भी क्या अलग थे
    मेरे भीतर छाँव पाकर कितने तेरे पल थे बीते
    मेरी शाखाओं पे चढ़कर ज़ोर तूने थे लगाए
    कभी लटके कभी धरकर मुझको तू देता झुमाये

    बात हमने शब्दों में न करी होगी यह पता है
    पर हमारे रिश्तों की अनुपम लिखी यह कथा है

    आज मैं इतना बड़ा हूँ वैसे ही निहारता हूँ
    तुझको देखूं यूँ खड़ा उन यादों को बधारता हूँ
    हाथ में तेरे कुल्हाड़ी भाव चेहरे पर नहीं हैं
    वार करके पूर्ण करले इच्छा अगर तेरी यहीं है

    मैं अगर बाधा बना हूँ आज तेरे सामने तो
    मेरी हर शाखा निभाएगी हमारी मित्रता को

    मैं खड़ा हूँ पत्तियों संग शाखा यूँ फैलाये जाता
    तू चाहता जो भी हो मेरा सदा आशीष पाता

                                                          - विक्रमादित्य