कवयत्री उषा राजे सक्सेना की कविता "साँप और फरिश्ता"

Publish 27-10-2018 13:25:49


कवयत्री उषा राजे सक्सेना  की कविता  "साँप और फरिश्ता"

साँप और फरिश्ता
                  कवयत्री उषा राजे सक्सेना लन्दन

जब उसने सच को अपने जीवन में
सच सच अपना लिया तो
सारा का सारा सच, उसे सर्प सा डस गया
और वह सर्प बन गया यहाँ तक कि लोग उसे
आस्तीन का साँप समझने लगे

और जब उसने झूठ को अपने जीवन में
सच सच अपना लिया तो सारा का सारा झूठ उसे
बुलंदियों तक ले गया यहाँ तक कि वह इच्छाधारी सितारा बन गया
और लोग उससे मन्नतें माँगने लगें और वह इंसान से फरिश्ता बन गया

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