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खबर का असर : विलुप्त हो रही कल्याणी नदी का रखरखाव के संदर्भ में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लिया संज्ञान

10-07-2019 22:04:15

उन्नाव / उत्तर प्रदेश( रघुनाथ प्रसाद शास्त्री):  यूपी की नदियों में गंगा के बाद कल्याणी नदी का नाम आता है। सदियों पूर्व कल्याणी नदी का हरदोई से उन्नाव के मध्य कटरी के इलाका में उद्गम हुआ तो कृषकों में मानो खुशहाली बरसी। किंवदंतियों के अनुसार इसी से नदी का नाम कल्याणी नदी पड़ा।  जीवनदायिनी कल्याणी नदी की विलुप्त हो जाने के समाचार को  www.liveskgnews.com वेब न्यूज़ पोर्टल ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था . खबरे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यालय तक पहुंच गई प्रधानमंत्री कार्यालय ने गंगा की सहायक नदी के पुनर्जीवन को हरी झंडी देकर एक उप सचिव स्तर के अधिकारी को देखरेख का जिम्मा सौंपा।

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कल्याणी नदी अन्नदाता कृषकों में फसल उत्पादन के लिए सींच का अक्षय स्त्रोत रही है लेकिन प्रकृति के हो रहे दोहन ने कल्याणी नदी के स्वरूप को ही बिगाड़ रखा है। वर्षा ऋतु में नदी के जल के उफान से जहां ग्रामीणों को बाढ़ की स्थिति का सामना करना पड़ता है वह ग्रीष्म ऋतु में यह नदी लगभग पूरी तरह सूख जाती है। पिछले कई दशकों से जो स्थिति है उससे कल्याणी नदी के अस्तित्व को लेकर ही खतरा बढ़ता जा रहा है। नदी में जल प्रवाह का स्थान जंगली घासफूस और पेड़ लिये हुए हैं।


जिला हरदोई से निकली यह नदी तहसील बांगरमऊ के ब्लाक गंजमुरादाबाद के ग्राम लोनारी से प्रवेश करती है। यहां से यह बांगरमऊ के मदार नगर, कमलापुर मंगूपुर ,मथुरा नगरी, शेरपुर अछिरछा, फतेहपुर चौरासी, बबूरिहा, कछियन खेड़ा रायपुर नेवादा, सुसुमऊ,देवरिया, दलदलहा आदि ग्रामों से होते हुए उन्नाव तहसील के ग्राम देवीपुरवा मरौंदा बिठूर के पास गंगा नदी में मिल जाती है। लगभग 80 किमी की इस परिधि में सफीपुर तहसील और, बांगरमऊ,तहसील के गंज मुरादाबाद फतेहपुर चौरासी सहित एक सैकड़ा से अधिक ग्रामों के लोग बाढ़ के समय में इससे प्रभावित होते हैं। वर्षा के दिनों में यदि गंगा नदी में बाढ़ आ गई तो कल्याणी इस क्षेत्र के लोगों में कल्याणी न होकर चंडी बन कर बहने लगती है। क्षेत्र के हफीजाबाद, दौलतपुर, शाहपुर खुर्द, गोरीमऊ, फतेहपुर चौरासी, जमुरुद्दीनपुर, सूसूमऊ, ददलहा, कंसाखेड़ा, करीमाबाद, शेरपुर, सेवापुरवा, रूपपुर, जमुनिहा, पाल्हेपुर आदि ग्रामों में इसका प्रकोप रहता है लेकिन जब बाढ़ नहीं होती और गर्मी के दिन होते हैं तो पूर्व में कभी इसकी धार के पानी से निकटवर्ती ग्रामों के किसानों को खेत सींचने का लाभ मिलता था जानवरों को भी पीने का पानी उपलब्ध रहता है। क्षेत्रीय लोग कहते हैं कि कल्याणी वैसे तो क्षेत्र का कल्याण करती रही है लेकिन अब यह स्थिति नहीं है।


 इसी क्षेत्र के रघुनाथ प्रसाद शास्त्री बताते हैं बताते हैं कि बाढ़ आती है तो यही नदी विनाशकारी साबित होती है।लेकिन इस समय  कही भी नहीं नजर आती पानी की धारा ,सत्तर के दशक के पहले कल्याणी नदी में शुरू से अंत तक पानी की धारा नजर आती थी तब इसके निकटवर्ती ग्रामों के किसान इस धारा के पानी से अपने खेतों की सिंचाई किया करते थे तथा जानवरों को भी पीने का पानी मिलता रहता था। इस समय गर्मी के दिनों में फतेहपुर चौरासी दबौली पुल के जलकुंभी नजर आती है। गोरीमऊ के प्रधान रामगोपाल पांडेय बताते हैं कि अब तो इस नदी में गर्मी में इतना भी पानी नहीं रहता है जिससे किसान अपने खेतों की सिंचाई कर सके। वह कहते हैं कि धारा की जगह अब सिल्ट एवं जंगल नजर आता है। यहां यह गौरतलब है कि शुरू से अंत तक धारा के बजाए बांगरमऊ बिल्हौर मार्ग के पुल के नीचे, काली मिट्टी दबौली मार्ग के पुल के नीचे, बाबा हजारी देव स्थान के  पास सिर्फ तालाबों की तरह पानी भरा नजर आता है। बाकी धारा के स्थान पर झाड़ी, नरकुल, बेसरम, पेटार व जलकुंभी ही नजर आ रही है जगह-जगह किसानों ने कब्जा करके अपनी फसलें नदी की धारा में बो रखी है और उन फसलों में यदि किसी का कोई पशु पहुंच जाता है उसके साथ मारपीट भी हो जाती है। लेकिन इसकी धारा की सफाई कराने के बारे में न तो अब तक किसी जनप्रतिनिधि ने ही अगुवाई की और न शासन-प्रशासन ने ही इस ओर कोई पहल की। क्षेत्र के प्रधान वीरेंद्र कुमार अशोक कुमार, कौशल कुमार, रामगोपाल पांडे सहित  तमाम क्षेत्रीय लोग यह मांग की  इस नदी की सिल्ट साफ की जाए और इसका सही रखरखाव किया जाए जिससे कि इस नदी का अस्तित्व बना रहे. प्रधानमंत्री कार्यालय के उपसचिव अंबुज शर्मा को इस मामले को देखने की जिम्मेदारी सौंपी गई प्रधानमंत्री कार्यालय की इस पहल पर कटरी क्षेत्र के लोगों ने खुशी जताई है लोगों को उम्मीद जागी है कि  अब लाखों लोगों की जीवन रच्छक रही कल्याणी नदी का प्रवाह जल्दी अपने पुराने स्वरूप में आ जाएगा