गढ़वाल : थैलिसैण क्षेत्र में हुई बर्फबारी , लोगो के चेहरे खिले

Publish 07-01-2019 17:11:52


गढ़वाल : थैलिसैण क्षेत्र में हुई बर्फबारी , लोगो के चेहरे खिले

कोटद्वार । केन्द्र सरकार एंव प्रदेश सरकार आम जनता के स्वास्थ्य को गम्भीरता से देखते हुए अरबो रुपये का बजट स्वास्थ्य विभाग को आवंटित करती है।जिससे आम जनता को सही इलाज मिल सके।लेकिन धरातल कि स्थिती देखी जाए तो कुछ और ही बंया कर रही है,जो शासन प्रशासन के कार्यप्रणाली के उपर सवालीय निशान खडे करते है।आखिर ये अरबो रुपये का बजट जा कंहा रहा है।जो एक सोचनीय विषय है। प्रदेश के आयुष एंव परिवार कल्याण मंत्री डा0 हरक सिंह रावत के विधान सभा क्षेत्र कोटद्वार में सिमलचौड स्थित राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय एंव पंचकर्म केन्द्र में मरीजो कि जिंदगी से सरकार और विभाग खेल रहे है।इस चिकित्सालय में पंजीकरण शुल्क भले ही दो रुपये रखा गया है लेकिन सरकार के द्वारा इन दो रुपयो को लेकर मरीजो को दवाईया तक नही दी जा रही है । यंहा आ रहे मरीजो कि जिदंगी मात्र दो रुपये देने तक ही सीमित रह गई है । जिस कारण मरीजो को अन्य अस्पतालो में जाने के लिए बाध्य होना पड रहा है।मरीज अस्पताल में आकर अपने स्वास्थ्य कि जांच तो डाक्टर से करा रहे है,लेकिन उस बीमारी कि दवा अस्पताल मे उपलब्ध नही है।जिस कारण मरीजो को मजबूरन मेडिकल स्टोर से दवाईया लेनी पड रही है जो कि उनके बजट से बाहर है । जिसमें मरीजो का कहना है कि यह अस्पताल मात्र एक डाक्टर के भरोषे चल रहा है और मरीजो ना के बराबर इस यंहा आते है। इस समय भरी गर्मी में मरीजो को पानी और हवा तक अस्पताल में नही मिल पा रही है।लाइट चले जाने के बाद यंहा पर जनरेटर और इनवर्टर तक नही है।जिससे मरीजो को राहत मिल सके ।हम एक घण्टे से अस्पताल में गर्मी से मर रहे है।वंही कुछ मरीजो का कहना है कि यंहा पर अस्पताल तो बहुत अच्छा बना हुआ है और डाक्टर भी अच्छे है लेकिन जो डाक्टर के द्वारा दवाई बाहर के लिए लिखी जा रही है वंह बहुत मंहगी है । जो हमारे दायरे बाहर है। इस चार मंजिला अस्पताल में एक मटके के सहारे मरीजो कि प्यास बुझाई जा रही है।अस्पताल के प्रभारी डाक्टर जयदीप बिष्ट ने बताया कि हमने मरीजो से सम्बंधित व्यवस्थाए हमने पुरी कर रखी है लेकिन कुछ भोतिक चीजो कि कमी है लाईट चले जाने पर जनरेटर,इनवर्टर कि कमी के कारण मरीजो को भर्ती करने में दिक्कत होती है।दवाईयां पुर्व कि भांति नही है लेकिन कुछ औषधिया है लेकिन कुछ दवाईयां अस्पताल में नही होने के कारण मरीजो को बाहर लेने के लिए कहा जाता है।माननीय मंत्री जी द्वारा इस चिकित्सालय का उच्चीकरण कर इसको कालेज या परिसर बनाया गया है।एक वर्ष के भीतर स्टाफ की कमी भी दूर हो जायेगी । वर्ष2015 में 21 फरवरी को तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री एंव क्षेत्रीय विधायक सुरेन्द्र सिंह नेगी के द्वारा 181.47 लाख रुपये कि लागत से बने इस अस्पताल का लोकापर्ण किया गया था। वर्ष 2017 में सत्ता परिवर्तन के बाद इस अस्पताल कि स्थिती बदहाल हो चुकी है।देखने वाली बात यह है कि केन्द्र सरकार और प्रदेश सरकार के द्वारा जो अरबो रुपये का बजट स्वास्थ्य महकमा दिया जाता है।आखिर वह बजट जा कंहा रहा है, बिना दवाईयो के धरातल में करोडो रुपये कि लागत से बने अस्पतालो कि इमारते सफेद हाथी साबित हो रही है।जिससे साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि सरकारे हमारे स्वास्थ्य के प्रति कितनी संवेदनशील है।

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