जाने गुलाब के फूल के बारे में , क्या कुछ खास है गुलाब के फूल में

Publish 19-02-2019 17:45:19


जाने गुलाब के फूल  के बारे में , क्या  कुछ खास है गुलाब के फूल  में

लखनऊ/ उत्तर प्रदेश (रघुनाथ प्रसाद शास्त्री): गुलाब पुष्प पूरे भारत वर्ष में पाया जाने वाला पुष्प है।गुलाब का वैज्ञानिक नाम रोज़ा  है किन्तु अलग-अलग प्रजातियों के अनुसार नाम भिन्न-भिन्न हैं। गुलाब एक झाड़ीदार, कंटीला, पुष्पीय पौधा है जिसमें बहुत अच्छे सुगंधदार फूल होते हैं। गुलाब की एक सैकड़ा से भी अधिक जातियां हैं, जिसमें सबसे अच्छे गुलाब एशिया के माने जाते हैं। जबकि कुछ जातियों के मूल प्रदेश यूरोप, उत्तरी अमेरिका तथा उत्तरी पश्चिमी अफ्रीका भी हैं। गुलाब के फूल कई रंगों के होते हैं, लाल (कई तरह के हल्के एवं गहरे) पीले, सफेद इत्यादि। सफेद फूल के गुलाब को 'सेवती' कहते हैं। कहीं कहीं हरे और काले रंग के भी गुलाब के फूल पाये जाते हैं।
ऋतु के अनुसार गुलाब के दो भेद भारतवर्ष में माने जाते हैं- सदागुलाब और चैती। सदागुलाब प्रत्येक ऋतु में फूलता है और चैती गुलाब केवल बसंत ऋतु में। चैती गुलाब में विशेष सुगंध होती है और वही इत्र और दवा के काम  आता है।  गुलाब का फूल कोमलता और सुंदरता के लिये प्रसिद्ध है, इसी से लोग छोटे बच्चों की उपमा गुलाब के फूल से देते हैं। गुलाब के इत्र का आविष्कार नूरजहाँ ने किया था। ऐसा कहा जाता है कि गुलाब का इत्र नूरजहाँ ने 1612 ईसवी में अपने विवाह के अवसर पर निकाला था। भारत के राजस्थान प्रदेश की राजधानी जयपुर को 'गुलाबी नगर' कहा जाता है।


पौधों की बनावट, ऊँचाई, फूलों के आकार आदि के आधार पर गुलाब को निम्नलिखित पाँच वर्गों में बाँटा गया है:- हाइब्रिड टी, फ्लोरीबण्डा, पॉलिएन्था, मिनीएचर, लता गुलाब। भारत में उत्तर प्रदेश के एटा, कानपुर, गाजीपुर, बलिया और राजस्थान के उदयपुर और चित्तौड़ और जम्मू कश्मीर में हिमाचल और अन्य राज्यों में भी गुलाब की खेती होती है।  दक्षिण भारत में गुलाब के उत्पादन के उद्योग चलाये जाते हैं, दक्षिण भारत में फूलों का व्यापार जोर-शोर से चलता है।
 गुलाब के बहुत सारे औषधीय गुण हैं। गुलाब का फूल कई प्रकार की दवाओं में इस्तेमाल किया जाता है। गुलाब की पंखुडियों और शक्कर से गुलकन्द बनाया जाता है।  गुलाब जल और गुलाब इत्र के कुटीर उद्योग चलते है। चिकित्सको के अनुसार गुलाब जल  आंखों में डालने से  आंखों की थकावट दूर हो जाती है । गुलाब के फूल मंदिरों, मंडपों एवं पूजा स्थलों में ज्यादा प्रयोग होते हैं और ये आर्थिक लाभ का साधन माना जाता है।  भारतीय साहित्य में गुलाब के अनेक संस्कृत पर्याय हैं जैसे 'गुलाब पाटल', 'तरूणी', ‘शतपत्री’, ‘कार्णिका’, ‘चारुकेशर’, ‘लाक्षा’ और 'गन्धाढ्य' आदि। गुलाब के फूल को फारसी में 'गुलाब' कहा जाता है और अंग्रेजी में 'रोज़', बंगला में 'गोलाप', तमिल में 'इराशा' और तेलुगु में 'गुलाबि' है। अरबी में गुलाब ‘वर्दे’ अहमर है।


ज्योतिष के जानकार रघुनाथ प्रसाद शास्त्री ने बताया कि शिव पुराण में गुलाब को 'देव पुष्प' कहा गया है। ये रंग बिरंगे नाम गुलाब के वैविध्य गुणों को इंगित करते हैं।  हिन्दी के श्रृंगारी कवि ने गुलाब को 'रसिक पुष्प' के रूप में चित्रित किया है। कवि देव ने अपनी कविता में बालक बसन्त का स्वागत गुलाब द्वारा किए जाने का चित्रण किया है। कवि श्री निराला ने गुलाब को पूंजीवादी और शोषक के रूप में अंकित किया है। रामवृक्ष बेनीपुरी ने इसे संस्कृति का प्रतीक कहा है।  प्रत्येक वर्ष 7 फरवरी को 'गुलाब दिवस' मनाया जाता है। विश्व के  कुछ देशो ने गुलाब को अपना 'राष्ट्रीय पुष्प' घोषित किया है। 

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