सुखरो क्षेत्र में लगी थी आग , कड़ी मशक्कत के बाद वन विभाग ने बुझाई आग

Publish 05-04-2019 17:38:33


सुखरो क्षेत्र में लगी थी आग , कड़ी मशक्कत के बाद वन विभाग ने बुझाई आग

कोटद्वार । लैंसडाउन वन प्रभाग के कोटद्वार रेन्ज के सुखरो के वनों में लगी आग. आधा हेक्टयर वन सम्पदा जलकर हुई खाक. वन विभाग द्वारा त्वरित कार्यवाही कर बुझाई आग.  उत्तराखंड के जंगलों में आग कुदरत की बजाय इंसानी हरकतें ज्यादा है। पिछले दस सालों में हर साल औसतन तीन हजार हेक्टेयर वन जले हैं। उत्तराखंड में जंगलों का बदस्तूर जलना कई तरह के संकटों को निमंत्रण देना है। जंगलों के जलने से उपजाऊ मिट्टी का कटाव तेजी से होता है। साथ ही जल संभरण का काम भी प्रभावित होता है। वन विभाग के मनमानेपन ने आम लोगों को उनके हक हकूकों से दूर करके इस संकट को और बढ़ा लिया है। वनाग्नि का बढ़ता संकट जंगली जानवरों के लिए अस्तित्व पर सवाल बन पड़ा है। वनाग्नि सरकारी तंत्र का सारी कमियां छिपा लेती हैं और जंगल की सभी अनमोल खूबियां लील जाती है । रविवार को  लैंसडाउन वन प्रभाग के कोटद्वार रेन्ज के सुखरो वन क्षेत्र में आग लग गयी थी जिसके बाद वन विभाग के सुखरो क्रू स्टेशन द्वारा त्वरित कार्यवाही करते हुए आग पर काबू पाया और आग बुझा दी गयी थी जिसमे आधा हेक्टेयर वन सम्पदा जल गयी.


जंगलों में आग अधिकतर गर्मियों के समय ही लगती है । इतिहास टटोलें तो पता चलता है कि हर साल गर्मियों में उत्तराखंड के जंगल धू.धू कर जलते रहे हैं। वन्य संपदा के लिए भी यह भयानक नुकसान का सबब बनती है। इतिहास से सबक लेने की बात कही जाती हैए लेकिन आज भी स्थिति यह है कि यहां मार्च से लेकर जून के आखिरी हफ्ते तक का समयए जिसे वनाग्नि काल भी कहा जाता है.  आग लगने के कारणों बुझाने के उपायों और जिम्मेदारी तय करने के आरोप. प्रत्यारोपों में बीत जाता है। राज्य की राजधानी देहरादून में देश का वन अनुसंधान संस्थान है। इसके बावजूद वन विभाग के पास वनों में लगने वाली आग से संबंधित सवालों के न तो तर्कसम्मत जवाब हैं और न ही वनाग्नि की रोकथाम की कोई ठोस कार्ययोजना। पेशेवर तरीकों से आग से निपटना तो दूर की बात हैए विभाग उपलब्ध सूचनाओं का भी फायदा नहीं ले पा रहा। नतीजा यह होता है कि हर साल जंगलों की आग तभी शांत होती है जब उत्तराखंड में मानसून पूर्व बरसात की फुहार पड़ती है। उत्तराखंड के 65 फीसदी हिस्से में वन हैं। हर साल राज्य में हजारों हेक्टेयर जंगल राख होता है।


क्या कहते है अधिकारी
लैंसडाउन वन प्रभाग के कोटद्वार रेन्ज के सुखरो वन क्षेत्र में आग लगी थी जिससे वन्य सम्पदा जली है पर त्वरित आग पर काबू पा लिया गया था जिससे ज्यादा नुकसान नही हो पाया. वर्तमान में लैंसडाउन वन प्रभाग के ३२ क्रू स्टेशन है जो आग की सूचना पर हर समय तैयार रहते है.
वैभव सिंह , डीएफओ लैंसडाउन वन प्रभाग

सुखरो क्षेत्र में आग लगी थी जिसके तुरंत सूचना पर सुखरो क्रू स्टेशन द्वारा वहां पर पहुँच कर आग को बुझाया गया .
  याकूब अली , डिप्टी रेंजर , सुखरो ।

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