सूबे को 847 करोड़ रुपये का नुकसान दिया भाजपा सरकार ने - सुरेन्द्र

Publish 07-03-2019 13:10:56


सूबे को 847 करोड़ रुपये का नुकसान दिया भाजपा सरकार ने - सुरेन्द्र
  • 60 वर्ष से अधिक उम्र वाले लोगों की बढ़ती आबादी के कारण भारत में स्वास्थ्य सेवाओं की मांग भी तेजी से बढ़ने की उम्मीद है। 
  •  राष्ट्रीय स्तर पर सरकार की ई-स्वास्थ्य जैसी पहल, उद्योग के प्रति उसकी मजबूत प्रतिबद्धता का संकेत है।
  • ऑनलाइन फार्मा के अधिग्रहण, उनमें साझेदारी या निवेश करने के लिए बडी और विशाल ई-कॉमर्स कंपनियां शुरुआती दौर की वार्ता में जुटीं।

भारत, 16 अगस्त, 2018 | युनाइटेड नेशंस पॉपुलेशन फंड की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 60 साल से अधिक की आयु वर्ग के लोगों की संख्या 2011 में 100 मिलियन से बढ़कर 2050 तक 300 मिलियन हो जाएगी।बढती उम्र के साथ बिगडता स्वास्थ्य बडी उम्र के ज्यादातर लोगांे के लिए प्रमुख चिंताओ में से एक है और लोगों की सेहत में यह परिवर्तन ही भारत में स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं की मांग को और आगे बढ़ा सकता है।
राजस्थान स्थित एमहेल्थ सेवा प्रदाता, मेरापैशेंट ऐप के संस्थापक और अध्यक्ष श्री मनीष मेहता कहते हैं, ‘‘फिलहाल भारत में हेल्थकेयर सेक्टर ठीक है। सरकार बड़ा सोच रही है और फिलहाल इस क्षेत्र का समग्र दृष्टिकोण हासिल करने में जुटी है। इधर, निवेशकों की और से ई-फार्मा कंपनियों  मे रूझान बढता जा रहा है। ई-हेल्थकेयर में ऑनलाइन चिकित्सा परामर्श, ऑनलाइन चिकित्सा रिकॉर्ड, दवाओं की ऑनलाइन आपूर्ति और देशभर में रोगीयों की जानकारी को साझा करना प्रमुख रूप से, ई-हेल्थकेयर उद्योग को लंबे समय तक कायम रख सकते है।‘‘
प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली को मजबूत करने के लिए केंद्रीय स्तर पर सरकार की तरफ से उठाए गए कदमों के साथ सरकार ने प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को ग्रामीण इलाकों तक पहुंचाने के लिए कई योजनाएं और कार्यक्रम शुरू किए हैं। भारत में दवाओं की बिक्री के लिए ऑनलाइन मार्केट (‘‘ई-फार्मेसी‘‘) ने स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय का काफी ध्यान आकर्षित किया है। मंत्रालय ने इस क्षेत्र को विनियमित करने के लिए एक मसौदा नीति जारी की है, जिससे ऑनलाइन दवा-वितरण के क्षेत्र में बेहतर पारदर्शिता बनी रहने की उम्मीद कि जा रही है।
आईएनसी42 डेटालैब्स के अनुसार, वर्ष 2017 में भारतीय हेल्थटेक स्टार्टअप कंपनियों ने 111 सौदों से 346 डॉलर की राशि जुटाई, जिससे साबित होता है कि निवेशक इस सेक्टर में निवेश करने के

कितने इच्छुक हैं। ऑनलाइन फार्मा के अधिग्रहण, उनमें साझेदारी या निवेश करने के लिए बडी और विशाल ई-कॉमर्स कंपनियां भी शुरुआती दौर की वार्ता में जुटीं हैं। इस उद्योग से संबंधित फिक्की के आंकडों पर गौर करें, तो पता चलता है कि इंडियन फार्मा रिटेल मार्केट कुल 1000 बिलियन रुपए का है, जिसमें ई-फार्मेसी के पास 5-15 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी हासिल करने की संभावनाएं हैं।
मेडिकल प्रेक्टीशनर्स और तकनीशियन आज लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ बना रहे हैं। ये स्टार्टअप न केवल डॉक्टरों और मरीजों के बीच कायम अंतराल को दूर कर रहे हैं, बल्कि एक बेहतर और तेज स्वास्थ्य देखभाल वातावरण की सुविधा के लिए एक ईकोसिस्टम भी बना रहे हैं।

 

 

To Top