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जाने रक्तदान के बारे में , कौन कर सकता हैं रक्तदान

14-06-2019 21:08:56

कोटद्वार (गौरव गोदियाल) :  14 जून को विश्व रक्तदान दिवस मनाया जाता है । शरीर विज्ञान में नोबल पुरस्कार प्राप्त प्रसिद्ध वैज्ञानिक कार्ल लैंडस्टाईन की याद में पूरे विश्व में यह दिवस मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य रक्तदान को प्रोत्साहन देना एवं उससे जुड़ी भ्रांतियों को दूर करना है। 14 जून 1868 को ही महान वैज्ञानिक कार्ल लैंडस्टाईन का जन्म हुआ था, उन्होंने मानव रक्त में उपस्थित एग्ल्युटिनिन की मौजूदगी के आधार पर रक्तकणों का ए, बी और ओ समूह में वर्गीकरण किया। इस वर्गीकरण ने चिकित्सा विज्ञान में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इस महत्वपूर्ण खोज के लिए ही कार्ल लैंडस्टाईन को सन 1930 में नोबल पुरस्कार दिया गया था । सन 1997 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सौ फीसदी स्वैच्छिक रक्तदान की शुरूआत की, जिसमें 124 प्रमुख देशों को शामिल कर सभी देशों से स्वैच्छिक रक्तदान को बढ़ावा देने की अपील की गई। इस पहल का मुख्य उद्देश्य था, कि किसी भी नागरिक को रक्त की आवश्यकता पड़ने पर उसे पैसे देकर रक्त न खरीदना पड़े। और इसी उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए अब तक 49 देशों ने स्वैच्छिक रक्तदान को अमलीजामा पहनाया है। हालांकि कई देशों में अब भी रक्तदान के लिए पैसों का लेनदेन होता है,जिसमें भारत भी शामिल है। लेकिन फिर भी रक्तदान को लेकर विभिन्न संस्थाओं व व्यक्तिगत स्तर पर उठाए गए कदम भारत में स्वैच्छिक रक्तदान को बढ़ावा देने में कारगर साबित हुए हैं।रिसर्च के मुताबिक भारत में रक्त की आवश्यकता का केवल 75 प्रतिशत ही उपलब्ध हो पाता है, जबकि विश्व के अन्य देशों में ये आंकड़े कई अधिक है ।
क्या कहते है चिकित्सक
रक्तदान करने को लेकर आज भी समाज में तरह तरह की भ्रांतियां व्याप्त है, जैसे रक्तदान करने से शरीर कमजोर हो जाता है या बीमार हो जाता है।इसके अलावा ये भी माना जाता है कि जितना रक्त दान किया जाता है, शरीर में उसकी आपूर्ति महीनों में होती है, और लगातार रक्तदान से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर भी विपरीत प्रभाव पड़ता है।जबकि ऐसा नहीं है नियमित रूप से रक्तदान करने पर दिल से जुड़ी बीमारी से बचाव होता है और सुगर इत्यादि का खतरा भी कम होता है । चिकित्सक  अजय प्रताप (पैथालॉजिस्ट) बताते है कि 16 वर्ष की आयु से लेकर 60 वर्ष की आयुवर्ग का व्यक्ति,जिसका वजन 45 किलो से अधिक हो,और जो हेपेटाइटिस बी, सी या, एचआईवी पॉजिटिव न हो और जब आप पूरी तरह स्वस्थ हों तो 3 माह में 1 बार रक्तदान कर सकते हैं। क्योंकि लाल रक्त कणिकाएं हर तीन माह में बनती है।लेकिन ध्यान रखने वाली बात यह भी है, कि आवश्यकता से अधिक रक्तदान भी शरीर के लिए बेहद हानिकारक हो सकता है। इसके अलावा रक्तदान के पहले रक्त की जांच होना चाहिए, यदि आप धूम्रपान करने के आदि हैं, तो अपने रक्त की जांच अवश्य कराएं।