चक्रवर्ती सम्राट राजा भरत की जन्मस्थली कण्वाश्रम में पहुंचे मुख्यमंत्री

Publish 10-02-2019 16:27:11


चक्रवर्ती सम्राट राजा भरत की जन्मस्थली कण्वाश्रम में पहुंचे मुख्यमंत्री

कोटद्वार । चक्रवर्ती सम्राट राजा भरत की जन्मस्थली कण्वाश्रम में आयोजित पाँच दिवसीय कण्वाश्रम वसंतोत्सव मेले के पांचवे व अन्तिम दिन गढ़वाली कवियों व सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रही ।प्रथम दिवस ग्यारह सौ महिलाओं द्वारा भव्य कलश यात्रा निकाली गयी । द्वितीय दिवस पर मार्चपास्ट की सलामी वन एवं पर्यावरण मंत्री हरक सिंह रावत द्वारा ली गयी । तृतीय दिवस में मैराथन दौड करवाई गयी ।वही चौथे दिन विभिन्न खेल व सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं की धूम रही । इस दौरान हरक सिंह रावत  ने कण्वाश्रम के बेहतर विकास के लिए स्थानीय लोगों से एकजुट होने की अपील की।


रविवार को मेले का शुभारंभ मुख्य अतिथि उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत व वन एवं पर्यावरण मंत्री हरक सिंह रावत ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर शुभारंभ किया। वन एवं पर्यावरण मंत्री ने अपने उदबोधन में कहा  कि कण्वाश्रम कण्व ऋषि का वही आश्रम है जहां हस्तिनापुर के राजा दुश्यंत व शकुंतला के प्रणय के पश्चात भरत का जन्म हुआ था। कालांतर में इसी शकुंतला पुत्र भरत के नाम पर हमारे देश का नाम भारत पड़ा।उन्होंने कहा कि हमारी सरकार की कथनी और करनी में अंतर नहीं है । लालढांग चिलरखाल के बीच तीन पुलो में एक पुल का निर्माण पूरा हो गया है और बरसात से पहले दोनों पुलों का भी निर्माण कर दिया जाएगा ।भारत सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्री द्वारा पाखरो से कार्बेट पार्क का दरवाजा खोलने की स्वीकृति भी दे दी गई है ।उन्होंने अपनी विधायक निधि से मेला संयोजन के लिए दस लाख रुपये की घोषणा भी की ।
मेले के संयोजक व भाजपा जिलाध्यक्ष शैलेन्द्र बिष्ट ने अपने स्वागत भाषण में सर्वप्रथम प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत व वन एवं पर्यावरण मंत्री हरक सिंह रावत का आभार जताते हुए कहा कि इस समिति द्वारा पंचमी कण्वाश्रम की ऐतिहासिक व प्राचीन गौरव का बोध कराने के उपलक्ष में प्रतिवर्ष बसन्त पंचमी के पर्व के अवसर पर एक मेला का आयोजन किया जाता है । यह समिति अब "कण्वाश्रम मेला व विकास समिति " के नाम से जानी जाती है व पर्यटन विभाग के सहयोग से प्रतिवर्ष बसन्त पंचमी जैसे शुभ पर्व पर यहॉ पर विशाल मेले का आयोजन होता आ रहा है, जिसमें सांस्कृतिक, कार्यक्रमों, खेलकूद प्रतियोगिता का आयोजन स्थानीय शिक्षण संस्थाओं व सांस्कृतिक दलों के माध्यम से सम्पन्न होता है। विकास प्रदर्शनी आदि का भी इस अवसर पर आयोजन किया जाता है। यह समिति इस स्थान के प्राचीनतम गौरव पूर्ण इतिहास का जन सामान्य को बोध कराती है व इस क्षेत्र के विकास हेतु शासन व पर्यटन विभाग का ध्यान आकर्षित करती है।


त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अपने उद्बोधन में कहा कि कण्वआश्रम को माननीय प्रधानमंत्री द्वारा 32 आइकनों में चुना गया है उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री जी का आभार व धन्यवाद प्रकट किया ।उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री जी द्वारा आयुष्मान योजना में परिवार के प्रत्येक सदस्यों को पांच लाख रुपये छत्र के रूप में दिया व जिनका नाम उसमें नहीं आ पाया उसको उत्तराखंड सरकार द्वारा अटल आयुष्मान योजना के द्वारा पांच लाख रुपये परिवार के हर सदस्य को क्या जा रहा है यह योजना दिसंबर में लागू कर दी गई थी इसमें 1300 से अधिक रोग शामिल हैं ।अभी तक हम तीन लाख किसानों को किसान ऋण योजना के तहत लाभ दे चुके हैं यह ऋण हम शून्य प्रतिशत पर दे रहे है । समूहों को भी पांच लाख रुपये तक का निशुल्क ऋण दिया जा रहा है।केंद्र सरकार द्वारा कृषि पर आधारित तीन हजार चार सौ करोड़ की योजना को भी आगामी चौदह फरवरी को माननीय प्रधानमंत्री रुद्रपुर में इसका शुभारंभ करने जा रहे हैं उन्होंने कहा कि किसान अपने के लिए नहीं बल्कि अपनों के लिए कार्य करते हैं ।हमारे द्वारा पिरूल से बिजली ,डीजल ,तारकोल, तारपीन का तेल आदि बनाया जा रहा है वहीं लीसा से भी बहु उपयोगी सामान बनाकर बेरोजगारी को कम किया जा रहा है । मेले के दौरान आयोजित प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट खेल व सास्कृतिक कार्यक्रमों के लिए पुरस्कार वितरण भी किया गया । इस मौके पर वीरेंद्र सिंह रावत, मनीष शर्मा ,मंजुल डबराल,पौड़ी जिला उपाध्यक्ष सुमन कोटनाला, अभिलाषा भारद्वाज ,मानेश्वरी बिष्ट,कण्वआश्रम के योगीराज ,चाँदमोला वख्स व सभी विभागों के कर्मचारी आदि लोग मौजूद रहे ।

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