विश्व गौरैया दिवस मनाया गया

Publish 20-03-2019 16:55:30


विश्व गौरैया दिवस मनाया गया

कोटद्वार (गौरव गोदियाल)। गौरैया की विलुप्त होती प्रजाति को बचाने के लिए विश्व गौरेया दिवस मनाया जाता है 'विश्व गौरैया दिवस' पहली बार वर्ष 2010 में मनाया गया था। यह दिवस प्रत्येक वर्ष 20 मार्च को पूरी दुनिया में गौरैया पक्षी के संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए मनाया जाता है ऐसे ही प्रकृतिवादी दिनेश चंद्र कुकरेती शिक्षक गौरैया पक्षी के संरक्षण में निरंतर कार्य कर रहे हैं उनके लिए एक आवास (बॉक्स) बनाकर 8000 परिवारों को निशुल्क बाट चुके हैं एवं निरंतर विलुप्त पक्षियों के शोध में लगे हुए हैं..


यह दिवस दुनिया में गौरैया पक्षी के संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए मनाया जाता है ।गौरैया की घटती संख्या को लेकर साल 2010 में पहली बार गौरैया दिवस मनाया गया था । एक समय में यह घर के आंगन में चहकती करती दिखाई दे जाती थी, लेकिन अब इसकी आवाज कानों तक नहीं पड़ती है । रिपोर्ट्स के अनुसार गौरैया की संख्या में करीब 60 फीसदी तक कमी आ गई है ।इस दिवस का उद्देश्य गौरैया का चिड़िया का संरक्षण करना है  कुछ वर्षों पहले आसानी से दिख जाने वाला यह पक्षी अब तेजी से विलुप्त हो रहा है । दिल्ली में तो गौरैया इस कदर दुर्लभ हो गई है कि ढूंढे से भी ये पक्षी नहीं मिलता, इसलिए साल 2012 में दिल्ली सरकार ने इसे राज्य-पक्षी घोषित कर दिया था ।


बता दें कि ब्रिटेन की 'रॉयल सोसायटी ऑफ प्रोटेक्शन ऑफ बर्डस' ने भारत से लेकर विश्व के विभिन्न हिस्सों में अनुसंधानकर्ताओं द्वारा किए गए अध्ययनों के आधार पर गौरैया को 'रेड लिस्ट' में डाला है ।खास बात यह है यह कमी शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में देखी गई है । पश्चिमी देशों में हुए अध्ययनों के अनुसार गौरैया की आबादी घटकर खतरनाक स्तर तक पहुंच गई है । गौरतलब है कि गौरेया 'पासेराडेई' परिवार की सदस्य है, लेकिन कुछ लोग इसे 'वीवर फिंच' परिवार की सदस्य मानते हैं. इनकी लम्बाई 14 से 16 सेंटीमीटर होती है तथा इनका वजन 25 से 32 ग्राम तक होता है । एक समय में इसके कम से कम तीन बच्चे होते हैं ।गौरेया अधिकतर झुंड में ही रहती है । भोजन तलाशने के लिए गौरेया का एक झुंड अधिकतर दो मील की दूरी तय करता है ।

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