होम्योपैथिक इलाज में बढती आम जनमानस की लोकप्रियता

Publish 26-03-2019 17:05:05


होम्योपैथिक इलाज में बढती आम जनमानस की लोकप्रियता

कोटद्वार (गौरव गोदियाल)।  दुनियाभर में अलग-अलग जगहों पर तमाम प्रकार की चिकित्सा पद्धतियां मौजूद हैं। अगर भारत की ही बात करें तो यहां भी ऐसी कई चिकित्सा पद्धतियां हैं जिनसे साधारण और पुराने रोगों का इलाज किया जाता है।वैसे तो आयुर्वेद भारत की सबसे प्राचीन चिकित्सा पद्धति है, जो आदि काल से लोगों को निरोगी काया प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। आपको बता दें कि भारत में एलोपैथी चिकित्सा पद्धति ब्रिटिश शासन में आई। अग्रेजों के आगमन के साथ-साथ ऐलोपैथी पद्धति यहाँ आई और ब्रिटिश राज्यकाल में शासकों से प्रोत्साहन पाने के कारण इसकी जड़ इस देश में जमी और पनपी। इस पद्धति को आज स्वतंत्र भारत में भी मान्यता प्राप्त है। इसके अलावा अंग्रेजों के शासनकाल में ही होमियोपैथी पद्धति इस देश में आई और शासकों से प्रोत्साहन न मिलने के बावजूद भी यह पनपी। हालांकि उस दौरान यह राजमान्य पद्धति नहीं थी, लेकिन अब इसे भी शासकीय मान्यता मिल गई है।होमियोपैथी चिकित्सा दुनियाभर में एक जानी मानी वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति है। यह औषधियों के विषय में ज्ञान और इसके अनुप्रयोग पर आधारित चिकित्सा पद्धति है। आज होमियोपैथी की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। खास बात यह है की इस पद्धति में रोगी पर लगातार नजर रखते हुए रोग से उत्पन्न शारीरिक और मानसिक लक्षणों के आधार पर ही चिकित्सा की जाती है अर्थात इस पद्धति में बीमारी के आधार पर नही बल्कि रोगी के तन मन के हालात को देखते हुए चिकित्सा की जाती है।


होम्योपैथी 'समः समं, शमयति' के सिद्धांत पर काम करती है, जिसका अर्थ है समान की समान से चिकित्सा अर्थात एक तत्व जिस रोग को पैदा करता है, वही उस रोग को दूर करने की क्षमता भी रखता है। इस पद्धति के द्वारा रोग को जड़ से मिटाया जाता है ।वैसे तो बाजार में आजतक सबसे ज्यादा डिमांड में आयुर्वेदिक और एलोपैथिक दवाओं की भरमार रही है पर आजकल बहुत से लोग ऐसे है जो होम्योपैथिक दवा के इलाज में भरोसा रखने लगे है जिसका जीता जागता उदाहरण राजकीय बेस चिकित्सालय कोटद्वार के होम्योपैथिक विभाग से लगाया जा सकता है ।होम्योपैथिक विभाग में तैनात फार्मासिस्ट विकास कुमार ने बताया कि प्रतिदिन लगभग 200 मरीज दिखाने आते है । माना जाता है की भले ही इन दवाओं का असर अन्य दवाओं की तुलना में थोड़ा देर से होता है पर इन दवाओं का शरीर पर हानिकारक प्रभाव नहीं होता है।उन्होने बताया कि जो व्यक्ति भी होम्योपैथिक दवा का सेवन करते है तो उन्हें होम्योपैथी दवा की शीशी कभी भी खुली जगह पर नही रखनी चाहिये साथ ही इन्हे हमेशा ठंडी जगह पर रखे।दवा चाहे लिक्विड फार्म में हो या गोलियों के रूप में खुले में रखने से ये बेअसर हो जाती है।होम्योपैथी दवा को कभी भी हाथ में नहीं लेना चाहिए। गोलियां गिनने के लिए शीशी के ढक्कन का इस्तेमाल करें और ढक्कन से ही सीधा मुंह में डाल लें।होम्योपैथी दवा खाने के 30 मिनट बाद या खाने के आधे घंटे पहले कुछ न खाएं और न ही कुछ पीएं।इस नियम को हाफ एन आवर रूल कहा जाता है ।होम्योपैथी की दवा जारी रखते हुए अपने फ़ूड चार्ट पर जरूर ध्यान दें। लहसुन, अदरक और प्याज जैसी चीजों को खाने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इन दवाओं के इलाज में परहेज रखना बेहद जरूरी है।होम्योपैथी दवाओं के इलाज के साथ एलोपैथी और आयुर्वेदिक दवाओं को ना मिलाएं। खासकर हार्ट, ब्लड प्रेशर, डायबिटीज के मरीज दवा को छोड़ने या जोड़ने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।इसमें इमली और खट्टी चीजें खाने से परहेज करना चाहिए। अगर ये परहेज़ नहीं रखेंगे तो किसी तरह के साइड इफेक्ट हो सकता है या फिर दवाई पूरी तरह अपना असर नहीं दिखा पाती है ।

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