बारिश के बीच कालागढ़ पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, "राह ताकता रह गया कालागढ़"

Publish 14-02-2019 18:43:20


बारिश के बीच कालागढ़ पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, "राह ताकता रह गया कालागढ़"

कालागढ़/पौड़ी गढ़वाल(कुमार दीपक) : भारी बारिश के बीच आखिरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करीब 12 बजे कालागढ़ पहुंचे सुबह से ही भिककावाला स्थित सेंट मैरी विद्यालय के समीप हजारों की संख्या में मोदी की एक झलक देखने के लिए दूर दूर से लोग इकट्ठा हो गए । परन्तु बारिश की वजह से व प्रोटोकॉल के चलते हुए प्रधानमंत्री किसी से भी नही मिले यहाँ तक कि स्थानीय भाजपा प्रतिनिधि मण्डल को भी प्रधानमंत्री के आस पास नही जाने दिया गया। बिना रुके मोदी अपने काफिले के साथ मुख्य बांध पर भ्रमण के लिए निकल गए मुख्य बांध से मोटर बोट में सफर कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कॉर्बेट पार्क की ढिकाला रेंज  सफारी की तत्पश्चात उन्होंने रुद्रपुर अपनी जनसभा के लिए उड़ान भरी । प्रधानमंत्री मोदी के साथ उत्तराखंड में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत व राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी मौजूद रहे ।

14 फरवरी को नरेंद्र मोदी की रुद्रपुर में जनसभा थी जिसको देखते हुए प्रधानमंत्री ने कालागढ़ भी व्यक्तिगत भ्रमण करना सुनिश्चित किया करीब परन्तु सुबह से ही हो रही तेज बारिश ने इस दौरे में पूरा खलल डाला और लगा कि दौरा रद्द हो जायेगा लेकिन साढ़े चार घंटे इंतज़ार के बाद प्रधानमंत्री करीब 11:30 बजे देहरादून से रवाना हुए और तकरीबन 12 बजे एमआई-17 हेलीकॉप्टर से मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के साथ कालागढ़ पहुंचे । कालागढ़ में पहले से ही बिजनौर और कोटद्वार का पूरा प्रशासन प्रधानमंत्री की सुरक्षा के लिए तैनात था । विमान से उतरते ही प्रधनमंत्री अपने काफिले के साथ बांध पर निकल गए जिससे उन्हें देखने आए लोग निराश घर लौट गए । सूत्रों के मुताबिक मोदी बोट से ढिकाला और उसके बाद रुद्रपुर के लिए अपनी जनसभा के लिए निकल गए । परन्तु इसमे निराशा की बात यह रही कि प्रशासन व कुछ एनजीओ की तानाशाही से बर्बाद हुए कालागढ़ की तरफ़ एक नजर भी नही घुमाई और ना ही स्थानीय प्रतिनिधि मंडल से मिले जो एक आश्चर्यजनक वाख्या था ।

बताया जा रहा है कि मोदी यहां  रामगंगा बांध के सौंदर्य को निहारने व कालागढ़ डैम की सैर करने आये थे । परंतु यदि कालागढ़ ही ना हुआ तो फिर आने वाले समय मे कोई सैर कैसे करेगा यह सवाल चर्चा का विषय रहा जिसका जवाब मिलता यदि प्रधानमंत्री स्थानीय प्रतिनिधि मण्डल से कुछ क्षण मुलाकात करते । इस सबके बीच पूरा कालागढ़ छावनी में परिवर्तित कर दिया गया जहाँ उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड की भारी पुलिस फोर्स चप्पे चप्पे पर तैनात रही ।

"राह ताकता रह गया कालागढ़"
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कालागढ़ होते हुए भी कालागढ़ नही थे कालागढ़  चीख चीख कर इंसाफ मांग रहा था परन्तु प्रधानमंत्री तक कालागढ़ की यह आवाज नही पहुँच पाई या कहे तो उत्तराखंड के राजनेता व वन विभाग के बड़े अधिकारी इस आवाज को प्रधानमंत्री के कानों तक पहुंचने देना नही चाहते इसी का नतीजा रहा कि एक दिन पूर्व जो हेलीपैड कालागढ़ रामलीला मैं बनाया गया था उसे रातों रात भिककावाला स्थानांतरित कर दिया गया ।

बात 60 के दशक की है , प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी को कालागढ़ आना था उनके लिए राम लीला ग्राउंड पर परमानेंट मंच बनाकर तैयारियां शुरू की गयी लेकिन अंतिम क्षणों में वो कार्यक्रम रद्द हो गया । दुखद बात ये है कि एक बार फिर पी एम् के उतरने के लिए राम लीला मैदान को वन विभाग ने मना कर दिया या कहे तो मना करवा दिया गया जिसके बाद कालागढ़ के इंटर कालेज की जगह भिक्कावाला स्थित मिशनरी के निजी इंटर कालेज के ग्राउंड को हैलीपैड बनाया गया है ।इसे सरकारी अदूरदर्शिता ही कही जा रही है की सरकारी पैसे का इस्तेमाल सरकारी विद्यालयों में ना कराकर निजी विद्यालयों में करा दिया है

असल में मिशनरी ने हर जगह अपने पैर इस तरह जमा लिए है की सरकारी अधिकारी भी इन्ही के साथ जुड़ने में गर्व महसूस करते है  सरकारी खेल इस कदर है की पी एम को नई कालोनी के बड़े ग्राउंड में इसलिए भी नहीं उतरने दिया गया है ताकि इसके चलते दशको से ख़राब वहां की सड़क को दुबारा बनाना ना पढ़ जाए I इसी का नतीजा रहा पीएम कालागढ़ आकर भी कालागढ़ नही आ पाए ।

"पोल खुलने के डर से विभाग ने दशकों बाद मिट्टी से भरे गड्ढे"
प्रधानमंत्री के आने की आकस्मिक खबर पाकर सभी विभागों के हाथ पैर फूल गए सिंचाई विभाग की बैचेनी इससे साफ नजर आती है कि जिन सड़को को एनजीटी का हवाला देकर वर्षो से उसकी मरम्मत नही करा रहे थे पीएम के आने की सूचना पाकर रातों रात सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने गड्ढो को मिट्टी व पत्थर से भर दिया । परन्तु कालागढ़ का दुर्भाग्य फिर यही रहा कि पीएम मोदी इन सड़कों पर सफर नही सके बल्कि वो मुख्य बांध से सीधा बोट से ढिकाला चले गए । इस दौरान सभी कालागढ़वासियों की ज़ुबान पर बस यही शब्द रहा कि काश पीएम एक बार इन सड़कों से गुजरते तो कालागढ़ की हालत देखकर शायद आंखे भीग जाती ।

"स्थानीय कार्यकर्ताओ में निराशा अफसरों पर लगाये मोदी को कालागढ़ आने से रोकने के आरोप "
प्रधानमंत्री मोदी के कालागढ़ पहुंचने से लोगो मे जहाँ खुशी की लहर थी वही स्थानीय कार्यकर्ताओं की प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात नही हो पाई जिस कारण स्थानीय कार्यकर्ताओ में निराशा मौजूद रही भाजपा स्थानीय कार्यकर्ता व कालागढ़ अध्यक्ष राजकुमार की माने तो यदि प्रधानमंत्री जी एक बार कालागढ़ घूमते या हमे 1 बार प्रधानमंत्री से मुलाकात का अवसर मिलता तो आज प्रधानमंत्री के सामने हम कालागढ़ के दर्द को मजबूती से सुनाते और हमे यकीन था कि इस समस्या का कोई ना कोई हल मोदी जी जरूर निकालते । परन्तु मोदी जी से मुलाकात ना होना जितना निराशाजनक है उतना ही कालागढ़ के लिए दुर्भाग्यपूर्ण भी है । वही पूर्व विधायक प्रतिनिधि व समाज सेवी नवीन पुजारी ने सिचाई विभाग व वन विभाग के अधिकारियों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जानबूझकर प्रधानमंत्री को कालागढ़ आने से रोका गया और रातों रात हेलीपैड को बदलवा दिया गया । इन दोनों विभागों के अफसरों को डर था कि यदि प्रधानमंत्री कालागढ़ आते तो इन विभागों की पोल खुल जाती और एनजीटी के आदेशों का हवाला लेकर जो इन्होंने कालागढ़ के साथ किया है वही इनके साथ भी होता जिस डर से मोदी जी को कालागढ़ आने से रोका गया ।

 

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