गौरेया संरक्षण को समर्पित सिराज का परिवार

Publish 23-03-2019 15:32:28


गौरेया संरक्षण को समर्पित सिराज का परिवार

कालागढ़/पौड़ी (कुमार):  क्षेत्र के पुराना कालागढ़ में गौरेया को संरक्षण देने और उनकी संख्या में वृद्धि को लेकर एक परिवार काफी लम्बे से प्रयास कर रहा है। जिसका असर अब क्षेत्र में गौरेया के बढ़ते कुनबे को देखकर लगाया जा सकता है। ज्ञात हो कि पक्के मकान बनने प्रदूषण के बढ़ने व पेड़ों के कम होने के कारण अब गौरेया की संख्या में काफी कमी आई है। कुछ वर्षों पहले आसानी से दिख जाने वह पक्षी अब तेजी से विलुप्त हो रहा है। जिसको लेकर देशभर के वन्यजीव प्रेमी व संस्थान चिंतित भी है । परन्तु इसके विपरीत एक मिसाल पक्षी प्रेमी पुराना कालागढ़ निवासी सिराजुद्दीन अंसारी का परिवार पिछले कई सालों से गौरेया के संरक्षण को बढ़ावा देकर पेश कर रहा है । सिराजुद्दीन के अनुसार गौरेया हमेसा इंसानों के बीच रहना पसंद करती है। पहले कच्चे घर होते थे, तब गौरेया आसानी से अपना घोंसला उन घरों में बना लेती थी। लेकिन इंसान अपनी सुविधा के अनुसार आधुनिक और पक्के मकानों को बनाता जा रहा है जिसका असर गौरेया की संख्या पर पड़ रहा है ।


गौरतलब है कि 20 मार्च को गौरेया दिवस मनाया जाता है। दुनिया में गौरैया पक्षी के संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए यह मनाया जाता है। गौरैया की घटती संख्या को लेकर यह दिवस मनाए जाने लगया और साल 2010 में पहली बार गौरैया दिवस मनाया गया था। एक समय में यह घर के आंगन में चहकती करती दिखाई दे जाती थी, लेकिन अब इसकी आवाज कानों तक नहीं पड़ती है। अगर यही आलम बदस्तूर जारी रहा और गौरेया के संरक्षण को लेकर हमने जरूरी कदम नहीं उठाए तब हम अपनी अगली पीढ़ी को गौरेया केवल फोटों में ही दिखा पाएंगे। एक रिपोर्ट के मुताबिक गौरैया की संख्या में करीब 60 प्रतिशत तक कमी आ गई है। इस दिवस का उद्देश्य गौरैया का संरक्षण करना है। दिल्ली व अन्य कई राज्यों में तो गौरैया इस कदर दुर्लभ हो गई है कि ढूंढे से भी ये पक्षी नहीं मिलता, इसलिए साल 2012 में दिल्ली सरकार ने इसे राज्य-पक्षी घोषित कर दिया था।

सिराज ने कहा कि गौरेया के संरक्षण के लिए बहुत कुछ करने की जरूरत नहीं है। सिर्फ अपने पक्कों मकानों में उनके लिए थोड़ी जगह देनी है। उनके लिए छोटे-छोटे घोसले बनाकर रख सकते हैं। जिसमें गौरेया अपना घर खुद बना लेती है। हालांकि सरकार इसको लेकर काफी योजनाए चला रही है। कोई भी योजना तभी सफल हो सकती हैं जब हम उस योजना में हिस्सेदारी लेंते हैं। सिराजुद्दीन के इस प्रयास की पूरा क्षेत्र सराहता है । गौरेया सरंक्षण को लेकर हरी सिंह एसडीओ वन विभाग बिजनौर ने बताया कि वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ और वन विभाग काफी समय से सक्रिय है और समय समय इसको लेकर जागरूक अभियान चलाते रहते है. फ़िलहाल ही एक जागरूक कार्यक्रम में 35 घोंसले लोगो को बांटे गये है.

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