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तुलास इंस्टिट्यूट पर आरटीआई से बड़ा खुलासा : बीटेक ही पढ़ा रहा है बीटेक वालो को

04-08-2019 15:24:06

देहरादून : देवभूमि उत्तराखण्ड में उत्तराखण्ड तकनीकी विश्वविद्यालय के समीप चल रहे एक संस्थान में बीटेक योग्यता वाले शिक्षक ही बीटेक के विद्यार्थियों को शिक्षा दे रहे है. जी हाँ यह हम नही कह रहे है यह जानकरी एक आरटीआई में आयी है.  आपको बताते चले कि तुलास इंस्टिट्यूट  देहरादून की एक से एक नयी लीलाएं सामने आ रही हैं. अभी तीन दिन पूर्व ही हमारी एक्सक्लूसिव ब्रैकिंग न्यूज़ द्वारा आपको यह पता चला था की उत्तराखंड टेक्निकल यूनिवर्सिटी ने उस पर उच्च स्तर की जांच बैठा रखी है. अब हमें एक पूर्व प्रोफेसर ( पहचान गोपनीय) द्वारा दिए गए सूचना के अधिकार के दस्तावेजों से पता चला है की इस संस्थान में जो शिक्षक पढ़ा रहे है उनमें से अधिकतर के पास न्यूनतम योग्यता (AICTE के मानकों के अनुसार ) भी नहीं है.

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इस गोपनीय पूर्व प्रोफेसर के द्वारा पिछले डेढ़ साल से सुचना के अधिकार द्वारा मांगे गये चार  शिक्षकों के मास्टर्स डिग्री का अंत में अता -पता चला तो स्वयं टेक्निकल यूनिवर्सिटी ने माना की इनमें से दो  शिक्षक सिर्फ बीटेक  हैं , तथा एक महाशय ने अभी- अभी अपनी एमटेक पूरी की  है ( अप्रैल 2018) जबकि वह तुलास  इंस्टिट्यूट में 2010 से पढ़ा रहे हैं. एक आरटीआई में तुलाज इंस्टीट्यूट से 4 शिक्षकों सनी सैनी (सिविल विभाग) अंकुर गुर्जर (सिविल विभाग) पीयूष धूलिया (इलेक्ट्रॉनिक्स) विभाग और प्रियंका शर्मा धूलिया (इलेक्ट्रिकल) विभाग के एमटेक उत्तीर्ण करने से संबंधित प्रमाण पत्र मांगे गए थे लेकिन उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय द्वारा मांगे जाने के बाद भी यह सूचनाएं नहीं दी गई। वर्तमान में सूचना आयोग ने सूचना के अधिकार उल्लंघन के तहत विश्वविद्यालय को जुर्माना भरने तथा कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है। मजेदार बात यह भी है कि पिछले पत्राचार के जवाब में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय ने तुला इंस्टीट्यूट से अपना पल्ला भी झाड़ लिया है तथा समस्त कार्यवाही से स्वयं को अलग करने का निर्णय संस्थान को पत्र द्वारा भेजकर अवगत कराया गया है।


वर्तमान स्थिति में उक्त पूर्व प्रोफेसर से मिले सुचना के अधिकार प्रपत्रों से यह स्पष्ट भी हो गया और राज्य के सुचना आयोग तक इसकी धमक भी पहुँच चुकी है. आलम यह है की रंगा-बिल्ला की जोड़ी अब एक दुसरे पर ज़िम्मेदारी टालकर अपना अपना आँचल बचा रहे हैं क्यूंकि कार्यवाही और दंड की तलवार दोनों पर बराबर लटक रही है. फिलहाल इस खुलासे से उच्च शिक्षा में एक बड़े खुलासे की परतें खुलनी शुरू हुई हैं और हमेशा की तरह हम इसपर नज़र रखे हुए हैं. ऐसा लगता है की उच्च  शिक्षा में चले आ रहे बड़े खेल भी सामने आने वाला है. देहरादून  में हर वर्ष बाहरी राज्यों बिहार , पूर्वोत्तर एवं नेपाल के छात्र उच्च शिक्षा हेतु आते हैं. शिक्षा में अपने बच्चो पर पैसा पानी की तरह बहाने वाले अभिभावक कृपया सावधान एवं सतर्क हो जाएँ.