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सांप विशेष : नागपंचमी के दिन जानिये नागो के विषय में ज़रूरी तथ्य

06-08-2019 12:08:34

देहरादून (कुंवर विक्रमादित्य सिंह): सावन के महीने में आज नाग पंचमी का दिन है एवं आज बड़ी संख्या में भक्तजन तथा श्रद्धालु नागराज की उपासना और पूजा करके उन्हें दूध से स्नान भी कराएँगे और दूध पिलायेंगे भी. लेकिन क्या आप इस अलौकिक एवं अनूठे जीव के बारे में कुछ तथ्य जानते हैं. आईये जानें नाग के विषय में कुछ वैज्ञानिक तथा आवश्यक तथ्य

नाग दूध नहीं पीते. नाग सांप प्रजाति में आने वाला एक विषधर प्राणी है तथा इसका प्रमुख आहार मांसभक्षण है. छोटे जीव जैसे चूहे , मेंढक , छछूंदर तथा इसी प्रकार के अन्य छोटे विचरने एवं बिल बनाने वाले जीव उसका प्रमुख आहार है. सांप कभी दूध नहीं पीते क्यूंकि दूध उसका आहार भी नहीं न ही उसका पाचन तंत्र दूध पचाने योग्य है
सांप बेहरे होते है. सांपो को मनुष्यो को सुनाई देने वाली आवाज़ें नहीं सुनाई देती. वह पूर्णतः बेहरे होते है , हालाँकि सांपो के पास छिद्र रुपी कान होते हैं जिनसे वह उन ध्वनि तरंगो को सुनते हैं जो मनुष्य नहीं सुन पाते. जैसे की चमगादड़. सांप छोटे जीवों के चलने , रेंगने इत्यादि की ध्वनि का एहसास करके उनका शिकार करने के लिए घात लगाते हैं
 नागो के पास कोई मणी नहीं होती. भारतीय समाज में इच्छाधारी नाग नागिन तथा नागलोक तक का वर्णन है , यह एक भ्रान्ति है क्यूंकि ऐसा कोई जीव नहीं होता. सांपो के पास न ही कोई दिव्य मणि होती है. कुछ लोग सांप के सर से काले रंग के पत्थरनुमा मणि को निकालकर दिखाते है. वह दरअसल सांप की विषग्रंथि में जमा हुआ पुराना ज़हर होता है जो निष्क्रिय होकर नाग के सर में एकत्रित रहता है
 नाग के काटने का एकमात्र इलाज होता है उसी के ज़हर से बनाया हुआ एंटीडोट जिसे अंग्रेजी में एंटीवेनम भी कहा जाता है. झाड़ फूंक , लोहा , धतूरा इत्यादि इत्यादि उपचार नाग के ज़हर के प्रभाव को कम नहीं कर सकते. सही समय पर दिया गया एंटीडोट ही सांप के काटे का इलाज है जिसका वर्णन आयुर्वेद के सिद्धांतो में भी आता है.
नाग किसी मनुष्य का शत्रु नहीं होता न ही वह शत्रुता पालता है. किसी भी अन्य जानवर की भांति नाग स्वयं को खतरे में पाकर जान बचने हेतु अपने विष का प्रयोग करता है. भारतीय समाज में कालसर्प योग , नागबद्धा इत्यादि इत्यादि भ्रांतियों द्वारा नागो का भय फैलाया जाता है. नाग और सांप प्रजाति के जीव नमी और छाँव वाले इलाके में रहते हैं क्यूंकि वह अपना तापमान मनुष्यो की तरह स्वतः नियंत्रित नहीं कर पाते. इसीलिए ऐसे स्थानों में उनका पाया जाना सुलभ है. सावन के महीने में जहां नमी और हरियाली का प्रभुत्व होता है सांप अपनी निद्रा से बाहर आकर रहने लगते हैं इसलिए आमजन का उनसे सामना हो जाता है. नाग और सांप एकाकी स्वाभाव के साधारण जीव होते हैं जो अन्य मांसभक्षियो की भांति अपने भोजन एवं जीवन संरक्षण तथा प्रजनन में समस्त जीवन बिता देते हैं