विशेष : आखिर पिंकी की मौत का जिम्मेदार कौन ? अस्पताल या सरकार ?

Publish 22-03-2019 20:19:20


विशेष : आखिर पिंकी की मौत का जिम्मेदार कौन ? अस्पताल या सरकार ?

मथुरा/आगरा (परविंदर)| श्रीकृष्ण जन्म को ब्रज तैयार है। घर-घर में उल्लास का माहौल है, जोरशोर से तैयारियां चल रही हैं।  कृष्ण कन्हाई जन्म लेंगे। यहां आलौकिक छटा निखर कर आ रही है। मंदिर हों या घाट, बाजार हों या घर हर जगह जन्माष्टमी की धूम है।
भगवान श्रीकृष्ण सोमवार की रात को जन्म लेंगे। द्वापर के बाद वैसे ही योग बने हैं। द्वापर में कंस के कारागार में भगवान ने जन्म लिया था, आज सुरक्षा की दृष्टि से जन्मस्थान फिर कड़े पहरे में है। यमुना में जलस्तर अधिक है और इंद्रदेव भी उसी तरह मेहरबान हैं। आज फिर से ब्रजवासी कन्हैया के जन्मोत्सव की तैयारी कर रहे हैं।

द्वापर के सभी योग हैं इस समय
ज्योतिषाचार्य कामेश्वर चतुर्वेदी कहते हैं द्वापर युग के योग भाद्रपद मास, कृष्ण पक्ष, अष्टमी तिथि, निशीथ वेला, उच्च राशि के चंद्रमा, वृष राशि के चंद्रमा, सिंह राशि के सूर्य, मंगल मकर राशि और शुक्र तुला राशि के ठीक वैसे ही हैं। कामेश्वर चतुर्वेदी ने बताया कि वर्ष 2024 में स्मार्त और वैष्णव दोनों की जन्माष्टमी एक ही दिन 26 अगस्त को होगी। अन्यथा स्मार्त और वैष्णव की अलग-अलग जन्माष्टमी होती रही है। स्मार्त की पहले और वैष्णवों की जन्माष्टमी बाद में होगी।
इसलिए लिया रोहिणी नक्षत्र में जन्म आकाशवाणी के वरिष्ठ उद्घोषक राधाबिहारी गोस्वामी का कहना है कि रोहिणी नक्षत्र में भगवान कृष्ण ने जन्म इसलिए लिया क्योंकि वह अपनी दूसरी माता (वासुदेव की पत्नी रोहिणी) को भी प्रसन्न करना चाहते थे। माता देवकी और वासुदेव कंस के कारागार में थे। कंस के अत्याचार हो रहे थे, इसलिए वासुदेव ने अपनी पहली पत्नी रोहिणी को अपने मित्र नंदबाबा के यहां भेज दिया था। श्री कृष्ण ने देवकी के गर्भ से जन्म लेकर माता देवकी को प्रसन्न  किया, वहीं रोहिणी नक्षत्र में जन्म लेकर रोहिणी को भी प्रसन्न किया। राधाबिहारी गोस्वामी ने बताया कि इस कथा का वर्णन करीब 100 वर्ष पूर्व वैंकटेश प्रेस मुंबई द्वारा प्रकाशित पंडित ज्वाला प्रसाद की भागवत में है।

मंदिरों के कार्यक्रम...


श्रीकृष्ण जन्मभूमि
श्री कृष्ण जन्मभूमि में रात 11.00 बजे से नवग्रह पूजन होगा। 11.35 बजे तक सहस्त्र अर्चन (कमल पुष्प एवं तुलसी दल से) होगा। 11.59 बजे प्राकट्य दर्शन हेतु पट बंद होंगे। रात्रि 12.00 बजे प्राकट्य दर्शन होंगे। 12.10 बजे प्राकट्य आरती होगी। 12.15 बजे से 12.30 बजे तक जन्म महाभिषेक होगा। रात 12.40 से 12.50 बजे तक शृंगार आरती और रात्रि 1.28 से 1.30 बजे तक शयन आरती होगी।


द्वारिकाधीश मंदिर
पुष्टिमार्गीय संप्रदाय के द्वारिकाधीश मंदिर में सोमवार सुबह 6.30 बजे भव्य पंचामृत अभिषेक होगा। सुबह 6.30 बजे मंदिर के मुखिया ज्वारा ठाकुर जी का भव्य पंचामृत अभिषेक किया जाएगा। मंदिर के मीडिया प्रभारी राकेश तिवारी ने बताया कि इस पंचामृत में दूध, दही, शहद, बूरा और घी का प्रयोग किया जाएगा। इसके पश्चात सुबह 8.30 बजे भव्य शृंगार के दर्शन होंगे। इसके बाद मंदिर बंद हो जाएगा। शाम 7.00 बजे से उत्थापन, भोग, संध्या, आरती के दर्शन होंगे। रात्रि 11.45 बजे जन्म के दर्शन होंगे। यह दर्शन 12.00 बजे तक होंगे।


ठा. बांकेबिहारी मंदिर
ठा.बांकेबिहारी मंदिर में सोमवार रात्रि 11.30 बजे मंदिर के चबूतरे पर श्रीकृष्ण जन्म की कथा होगी। मध्य रात्रि 12 बजे बिहारीजी का अभिषेक (दर्शन नहीं) होगा। रात्रि 1.55 बजे मंगला आरती होगी। इसके बाद दो बजे से सुबह 5.30 बजे तक प्रभु दर्शन देंगे।


ठा. राधारमण मंदिर
ठा.राधारमण मंदिर में प्रभु का 21 किलो दूध, 54 तरह की महौषधियों से अभिषेक होगा। प्रात: नौ से 12 बजे तक अभिषेक के पश्चात दोपहर  एक से दो बजे, शाम 5.30 बजे से रात 10 बजे तक प्रभु भक्तों को दर्शन देंगे।


इस्कॉन मंदिर
श्रीकृष्ण बलराम मंदिर इस्कॉन में सोमवार को दिन में ठाकुर श्रीकृष्ण बलराम को विशेष प्रकार का भोग लगाया जाएगा। रात्रि को 10 बजे से 12 बजे तक ठाकुरजी के जन्म का महाभिषेक कराया जाएगा।

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