अशासकीय विद्यालयों में नियुक्ति मामले में जांच टीम गठित

Publish 06-02-2019 17:03:21


अशासकीय विद्यालयों में नियुक्ति मामले में जांच टीम गठित


फतेहपुर चौरासी, उन्नाव (रघुनाथ)। क्षेत्र में स्थित बांगरमऊ नगर के प्रसिद्ध बोधेश्वर मंदिर प्रांगण में आषाढ़ मास भर पूजा पाठ कथा भागवत इत्यादि होते रहते हैं।
श्रावण मास शुरू होते ही मंदिर पर भक्तों की भीड़ बढ़ जाती है। सुबह से लेकर देर रात तक नगर और आसपास के भक्त यहां पहुंचकर बाबा की पूजा आराधना करते हैं। बोधेश्वर मंदिर को बांगरमऊ के प्रथम देव के रूप में माना जाता है। यहां स्थापित पंचमुखी शिव लिंग अद्वितीय तो है ही साथ साथ सच्चे मन से आराधना करने वाले हर भक्तों की कामना पूरी करते हैं।
इस प्राचीन मंदिर का  इतिहास इस प्रकार है।
जनश्रुतियों के अनुसार इस मंदिर की स्थापना लगभग चार सौ वर्ष पूर्व की गयी थी। जानकर बुजुर्ग भक्त बताते हैं । कि नेवल के राजा इस मंदिर में स्थापित मूर्ति को किसी अन्य प्रदेश से लाए थे और मूर्ती को बैलगाड़ी से गंगा स्नान कराने के लिये ले जा रहे थे मंदिर स्थान के निकट नदी होने के कारण मूर्ती बैलगाड़ी से नीचे उतारी गयी थी, और नदी पार कराने के लिए राजा को सूचना दी गई थी। राजा तमाम आदमी लेकर आए और मूर्ति उठाकर नदी पार कराना चाहते थे, किंतु वह लोग मूर्ति उठा नहीं सके। रात्रि में राजा को स्वप्न मिला कि इस मूर्ति को यही स्थापित कर दें। बौद्ध कालीन समय में स्थापित की गई इस मूर्ति से बनाये गए मंदिर को पहले बौद्धेश्वर के रूप में जाना जाता था। लेकिन अब बोधेश्वर लोग कहते है। विशाल रूप धारण किये यह मंदिर यज्ञ शाला, बारह दरी सहित लंबे भू-भाग पर चहारदीवारी बनाकर प्रवेश के लिए अलग-अलग तीन द्वार बने हैं। पीएसी की एक टुकड़ी हमेशा यहां अपना डेरा जमाये रहती है।
वैसे तो मंदिर के कपाट दिन में बारह से तीन बजे तक बंद रहते हैं। किंतु श्रवण मास में दिनभर भक्तों का आना जाना बना रहता है। इसलिए पूरे दिन कपाट खुले रहते हैं। दिन में तीन बार मंदिर की साफ-सफाई की व्यवस्था की जाती है। सुबह शाम आरती और भोग भी बाबा का लगाया जाता है।
श्रवण मास में प्रत्येक सोमवार को लगने वाले मेले में भक्तों व दुकानदारों की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम किये जाते हैं। पूरे माह विशेष सफाई अभियान और बाहर से आने वाले भक्तों को रहने खाने की व्यवस्था भी की जाती है। कभी-कभी एक नाग नागिन का जोड़ा भक्तों को मंदिर परिसर में दिखाई पड़ता है। वह कहते है कि क्षेत्र के प्रसिद्ध संत बंशी वाले स्वामी जब कभी दर्शन करने आते थे। तो घंटों मंदिर के सामने नृत्य कर बाबा को बांगरमऊ का राजा बताया करते थे।
बांगरमऊ क्षेत्र के विशिष्टजनों और संत महात्माओं का यह कथन है। इस शिवलिंग का जो श्रावण मास भर नित्यप्रति बिलपत्र चढ़ाकर पूजन करता है उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

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