सडक के अभाव में घायल महिला को कंधे पर लाद कर पहुंचा सडक तक

Publish 14-03-2019 19:17:29


सडक के अभाव में घायल महिला को कंधे पर लाद कर पहुंचा सडक तक

जोशीमठ/चमोली(संजय कुँवर)। पहाड को सरसब्ज किये जाने और पहाड से पलायन रोकने के नारे व दावे तब खोलने व बेमानी लगते है जब पहाड के लोगों की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही है। वर्षों से सडक की मांग कर रहे ग्रामीणों को जब सडक से महरूम रहना पडे और दुर्घटना के समय घायल को पहुंचाने के लिए कोई साधन न हो तो ऐसे में उस परिवार पर क्या गुजरती होगी ऐसी कल्पना से ही दिल दहल जाता है।


ऐसी ही एक घटना गुरूवार को चमोली जिले के जोशीमठ ब्लाॅक के उर्गम घाटी के किमाणा गांव में घटित हुई। किमाणा गांव की 52 वर्षीय विजया देवी पत्नी नारायण सिंह कुंवर दोपहर बाद अपने मवेशियों को चारापत्ति लेने पास की के जंगल में गई थी। जहां उसका पैर फिसल गया और वह खाई में जा गिरी और गंभीर रूप से घायल हो गई। घायल महिला को ग्रामीणों ने किसी तरह से निकाल कर घर तक पहुंचा लेकिन गांव में अस्पताल न होने के कारण उसके उपचार के लिए उसे जल्द से जल्द चिकित्सालय तक पहुंचाना अति आवश्यक था।


बता दें कि यह गांव आज भी सडक से नहीं जुडा है। इस गांव तक पहुंचने के लिए 14 किमी की खडी चढाई पार कर के गांव तक पहुंचा जा सकता है। ऐसे में घायल विजया देवी को मुख्य सडक तक पहुंचा ग्रामीणों के लिए एक मुसीबत का सबब भी बन गया था। गांव के कुछ जागरूक युवाओं ने गांव में ही रखी गये स्टेचर पर महिला को बांध कर उसे कंधे पर लाद कर 14 किमी पैदल चल कर सडक मार्ग तक पहुंचाया जहां से उसे गोपेश्वर जिला चिकित्सालय लाया जा जा रहा है जो देर रात तक गोपेश्वर पहुंचेगी।


क्षेत्र के युवा प्रदीप भंडारी की यह पहली घटना नही है। इससे पहले भी कई बार ऐसी घटना घट चुकी है। ग्रामीण दसको से गांव को सडक से जोडने की मांग करते आ रहे है लेकिन अभी तक उनकी मांग पर कोई गौर नहीं किया जा रहा है। जिसका नतीजा यह है कि ग्रामीण सडक व चिकित्सा के अभाव में दम तोड रहे है। ग्रामीण आज भी विकट व दुर्गम रास्ते से गांव पहुंचने के लिए विवश है।

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