पहाडों में भी खूब पसंद किया जा रहा है हाथ से चलाने वाला ट्रैक्टर

Publish 10-03-2019 15:22:27


पहाडों में भी खूब पसंद किया जा रहा है हाथ से चलाने वाला ट्रैक्टर

गोपेश्वर/चमोली(जगदीश पोखरियाल)। ट्रैक्टर  अब तक सिर्फ मैदानी क्षेत्रों के खेतोे में ही देखने को मिलता था या चलाया जाता था लेकिन अब पहाड के सीडीनुमा खेतों में भी ट्रैक्टर  चलने लगे है और यहां के किसानों के बीच हाथ से चलाये जाने वाला ट्रैक्टर  काफी पसंद किया जा रहा है।


पहाड में खेती करने के लिए बैलों का सहारा लिया जाता है। यहां पर सीडीनुमा खेत होने के कारण एक खेत से दूसरे खेत तक जाने के लिए काफी मुश्किल होती है, इसी लिए यहां पर बैलो की जोडी से खेती में हल लगाने का काम किया जाता है और सीडी नुमा खेत होने के कारण यहां पर  ट्रैक्टर  से खेती का काम किया जाना संभव नहीं था। लेकिन जब से नई तकनीकी में इजाफा हुआ और ट्रैक्टर  बनाने वाली कंपनियों ने हल्के और हाथ से चलाने छोटे ट्रैक्टर  बनाने शुरू किये और पहाड में कृषि विभाग ने इसका प्रदर्शन कर किसानों को इसकी उपयोगिता बतायी तो अब किसान इस नई तकनीकी से बने हल्के ट्रैक्टर  को हल जोतने के लिए प्रयोग में लाने लगे है। कृषि विभाग के अपर जिला कृषि अधिकारी चमोली डा. जितेंद्र भाष्कर बताते है कि अब तक चमोली जिले में व्यक्तिगत रूप से सौ से अधिक किसानों ने इस ट्रैक्टर  को खरीद कर खेती के काम में उपयोग में ला रहे है। बताया कि वर्तमान समय में सरकार ने एक नई स्कीम लॉन्च  की है जिसमें आठ लोगों के समूह को 10 लाख रूपये तक के कृषि के उपकरण 80 फीसदी सब्सिडी पर दिये जा रहे है। इस नई तकनीकी से बने ट्रैक्टर  के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि इससे एक लीटर डीजल में चार नाली भूमि पर हल लगा सकते है यह काम सिर्फ बेहतर चालक के माध्यम से एक घंटे के भीतर किया जा सकता है जिसके लिए बैल के माध्यम से काश्तकार को दो से तीन दिन का समय लग जाता है। ऐसे में समय की बचत भी हो जाती है और खेतों की जुताई कम समय में पूरी हो जाती है।


पोखरी के किसान श्रवण सती जो इस ट्रैक्टर  का उपयोग कर रहे का कहना है कि  बैलों को साल फल चारापत्ति खिलाने के बाद सिर्फ दो माह ही उस वक्त काम लिया जाता है तब जब खेती का काम हो। ऐसे में किसान को आर्थिक हानि भी होती है। वहीं जब से जंगलों पर चारापत्ति लाने पर प्रतिबंध लगा है तब से और भी अधिक परेशानी हो रही है। ऐसे में यह नई तकनीकी का ट्रैक्टर  हम किसानों के लिए वरदान साबित हो रहा है।

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